एक निमंत्रण मानसून को

एक निमंत्रण मानसून को आसमान मे तक, श्याम बादलोँ को, दे दिया उन्हें नेह निमंत्रण। आ मानसून आ, बहा ले जा अपने साथ, पिशाचिनी कोरोना को। जिसने कितनी माँओं से उनके बच्चें छीने, और कितने बच्चों से छिना, उनके पिता का दुलार। जिसके कुचक्र में फँसकर कराह रही हेै आदमजात। आ मानसून आ, बहा ले…

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डॉ. अंबेडकर

डॉ. अंबेडकर अंबेडकर एवं भारतीय संसदीय प्रणाली पर उनके विचार !! अंबेडकर ने कहा था कि भक्ति या नायक पूजा शर्तिया तौर पर पतन और उसके संभावित तानाशाही की ओर ही ले जाती है। भारत में भक्त होना आसान है समझदार होना मुश्किल है। क्या इस देश में भूख, बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक असामनता जैसे ज्वलंत…

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एक शिक्षिका ऐसी भी

एक शिक्षिका ऐसी भी बात उन दिनों की है जब मेरी नियुक्ति मुम्बई के एक प्रसिद्ध कनिष्ठ महाविद्यालय में हुई थी।परिवार,दोस्त,रिश्तेदार सभी प्रसन्न थे कि सरकारी नौकरी मिल गयी,अब जिंदगी आराम से गुजरेगी।काम हो ना हो,तनख्वाह तो शुरू ही रहेगी।आज भी सरकारी नौकरी के प्रति लोगों की मानसिकता में अधिक अन्तर या बदलाव नहीं आया…

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दिल का सूकुन

दिल का सूकुन दिल को सुकून देता है तेरा चांद सा मुखड़ा। बड़े भाई की जान है तू मम्मी पापा के जिगर का टुकड़ा।। बड़ी मिन्नत से तुमको पाया मां अंबे का आशीर्वाद है तू । सूने हमारे आंगन में छन छन पायल की आवाज है तू ।। तेरी बोली- मधुर रस की गोली कानों…

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My Life

My Life My name is Peppe Altimare .I was born in Naples, Italy, to parents of humble origins. Since I was a child, I have always played with feelings, always carrying them in my heart and molding them according to circumstances. My cultural education has been seen since I was a child, when what happened…

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विकास का प्रयास 

  विकास का प्रयास कॉग्रेस के 65 साल सरकार के बाद भी देश बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा और कुपोषण से ग्रस्त था देश। लेकिन हमारी सरकार जब से आई ,बेरोजगारी दूर करने के लिए स्टार्टअप इंडिया, मुद्रा लोन योजना, कौशल विकास जैसे योजनाओं को लागू कर युवाओं को प्रशिक्षित कर स्वयं रोजगार पैदा कर बेरोजगारी दूर…

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कोरोना की मार झेलता बचपन

कोरोना की मार झेलता बचपन कोरोना ने पूरी दुनिया को फिर से सहमा दिया है। पिछले साल के कहर को अभी हम भूले नहीं थे। फिर भी इस उम्मीद से बंधे थे कि कुछ दिनों की बात है, फिर सब कुछ सामान्य हो जाएगा। लेकिन अब कोरोना वायरस की दूसरी खतरनाक लहर इस उम्मीद को…

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हामिद के बहाने आज का विद्रूप समाज !

हामिद के बहाने आज का विद्रूप समाज !! जब भी टी वी पर मैं हवेल्स केबल का विज्ञापन देखता हूँ, जिसमे माँ का हाँथ रात का खाना(रोटी) बनाने के क्रम में जलने जैसा होता है, और पास ही खाने के लिए बैठा एक नन्हा सा बालक इसे देखता है….अनुभव करता है और अचानक उठ कर…

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