बदबूदार कमरे

बदबूदार कमरे —————— स्वतंत्रता का उत्सव क्या खाक मनायें हम, अनगिनत घावों से रिस रहा जब इस धरा का तन मन। नन्हीं कलियों के कुचले जाने के खबरों का है बाजार गरम, और फिर भी कहते रहतें हैं बहुत महान है अपना वतन। इधर सड़कें सजीं, मैदान सजें और तिरंगो से सजता रहा गगन, उधर…

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पेट की आग

पेट की आग रमिया का विवाह दीनू से लगभग सात वर्ष पूर्व महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में हुआ था। दीनू गन्ने के खेतों में श्रमिक के रूप में काम करता था। घर का गुज़ारा किसी तरह चल ही जाता था। धीरे-धीरे उसके चार बच्चे भी हो गए थे। रमिया, दीनू को समझाती थी…

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पटना विमेंस कॉलेज और मेरा क्रिकेट का खेल

पटना विमेंस कॉलेज और मेरा क्रिकेट का खेल साल १९७६: मैट्रिकुलेशन के रिजल्ट आ गए थे . मार्क्स बहुत अच्छे थे और लगता था पटना साइंस कॉलेज में एडमिशन हो जायेगा . घर में इसकी चर्चा थी. घर में लोग मुझे डॉक्टर का करियर चुनने की सलाह दे रहे थे.पहले से भी मेरे अपने चाचा…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- एम. एस. स्वामीनाथन

भारत के अन्नदाता- एम. एस. स्वामीनाथन खेतों में बालियान खड़ी थीं पर उसमें दाने कम थे भूखा था देश सारा और पड़े बेवस से हम थे दुखी हुआ स्वामीनाथन तब खोज कुछ ऐसी कर डाली हरित क्रांति आयी देश में मुस्कुरायी गेंहूं की बाली। गोदाम भरे अनाजों से जेबों में हरियाली छाई धरती उम्मीद से…

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शुभेच्छा

शुभेच्छा संप्रेषित कीजै सब अभिव्यंजनाएं साकार होवें सब मधुर कल्पनाएं खंडित हो जाएं कलुषित वर्जनाएं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।। पल्लवित हों सम्यक संकल्पनाएं झेलनी न पड़े कभी अवहेलनाएं स्पर्श करे नहीं आपको प्रवंचनाएं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।। कलम से निर्गत हों अधिसूचनाएं नाम से जारी हों कई परियोजनाएं संयमित वाणी त्यागे…

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Anthea

Anthea You cut an olive branch you called it life. You knit wreaths of hope and hung them on our collapsed walls. You cried for the lost dreams and prayed so as not to be lost, to be transformed into a source of resurgence. You are tired to look at doubtful shadows on the horizon….

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इस बार यूँ होली

इस बार यूँ होली कुछ सतरंगी सी चाहत यूँ आज मचल रही है जैसे इस फागुन होली अनकही भी कह रही है मेरी हसरतों को यूँ निखार देना तुम ले सूरज की धूप सूनहरी मेरी गालों पे लगा देना तुम सजा देना माँग मेरी पलाश के सूर्ख लाली से जो चूनर ओढ़ लूँ मैं धानी…

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शुभकामना संदेश

शुभकामना संदेश  जनवरी २०२०, आज से तीन वर्ष पूर्व गृहस्वामिनी परिवार ने अर्पणा संत जी के नेतृत्व में एक छोटा सा बीज डाला था। भयंकर कोविद महामारी अपनी चरम सीमा पर थी | पूरे विश्व में तबाही छाई थी | भारत भी अछूता न था | हर परिवार से कोई न कोई प्रियजन इस से…

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ढ़ाई आखर प्रेम

ढ़ाई आखर प्रेम प्रेम शाश्वत है।इसे परिभाषित करना कठिन है।प्रेम ही जीवन का आधार है।मानव जीवन का अन्तहीन सफ़र है।मानवीय मूल्यों का निकष है प्रेम।प्रेम ही रसों का उद्गमस्थल है। बिना प्रेम दुनिया में जीना असंभव है। प्रेम स्त्री पुरुष में ही नहीं सीमित है।यह कभी कहीं किसी से हो सकता है। यहाँ पति पत्नी…

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