छठ महापर्व: बिहार में क्यों?
छठ महापर्व: बिहार में क्यों? वैदिककालीन मध्य भारतवर्ष के कीकट प्रदेश में गयासुर नामक एक दानव रहता था| वह भगवान विष्णु का उपासक था| गयासुर की काया भीमकाय थी| कहते हैं कि, जब गयासुर पृथ्वी पर लेटता था, उसका सर उत्तरी भारत में होता तथा उसके पैर आंध्र क्षेत्र में होते थे| सबसे महत्वपूर्ण यह…
युगदृष्टा प्रेमचंद
युगदृष्टा प्रेमचंद प्रेमचंद युग भारत की दासता का युग था। उस समय देश का जीवन जीर्ण शीर्ण हो गया था ।आडंबर और सामंतवाद का बोलबाला था। वह भारत की अधोगति का समय था किंतु धीरे धीरे अंग्रेजों के अधीन होते हुए भी देश में पुनरुत्थान की भावना जागृत होने लगी।प्रेमचंदजी ने एक सजग, ईमानदार और…
Suhartini’s Poem
Suhartini’s Poem STRAW HOUSE I have already told you, don’t go far away! Because our straw house can not survive from the storm How could I plant the two young shoots that were sheltering on the pillars of our house? I’ve already told you before, don’t go far away It was enough for me to…
दंगों के बाद
दंगो के बाद दंगो के बाद वाला आसमान काला होता है कालिख बहुत दिन तक गिरती रहती है समाज के सर दंगो के बाद खतरनाक होता है राजनीति करना दंगो के बाद की राजनीति लेकिन सबसे खतरनाक होती है एक जली इमारत दूसरी को देखती है पूछती है तुम्हे क्यों जलाया जली इमारत रुआंसी है…
तू धरती पर ख़ुदा है माँ
तू धरती पर ख़ुदा है माँ, पंछी को छाया देती पेड़ों की डाली है तू माँ. सूरज से रोशन होते चेहरे की लाली है तू, पौधों को जीवन देती है मिट्टी की क्यारी है तू. सबसे अलग सबसे जुदा, माँ सबसे न्यारी है तू. तू रोशनी का खुदा है माँ, बंजर धरा पर बारिश की…
PRESIDENTIAL ELECTION OF U.S.A : DEFINING MOMENT
PRESIDENTIAL ELECTION OF U.S.A : DEFINING MOMENT Battle for becoming 47th President of USA has entered it’s final round.A lot of water has flown down the rivers of this vast country ever since Kamala Harris,a black qualified woman of South Asian origin entered the fray in July. Donald Trump has a solid backing of…
कोरोना ने सिखाया : धर्म का सही मर्म
कोरोना ने सिखाया : धर्म का सही मर्म कार्ल मार्क्स ने कहा था कि धर्म एक अफीम है । आज कोरोना काल जैसी विभीषिका और महामारी के दौर में भी कुछ लोगों ने धर्म की ऐसी व्याख्या और ऐसा अनुपालन किया है कि पुन: एक बार यह सोचने की जरूरत आन पड़ी है कि धर्म…
शैल अग्रवाल की कविताएं
शैल अग्रवाल की कविताएं 1.प्रेम में अक्सर शब्द जो कभी कहे ही नहीं गए साफ-साफ सुने जाते हैं जैसे बारिश की बूंदें गिरती हैं रेगिस्तान में खो जाने को धीरे धीरे जैसे भूखे की आँख में आ जाती है चमक रोटी की आस में जैसे प्रार्थना में शब्द उच्चारते हम मंत्र की तरह पर…