मशाल

मशाल दरवाजे की घंटी बजी।मैंने किवाड़ खोला और सामने श्यामा खड़ी थी। वह चुपचाप घर में प्रवेश कर गई। मेरी निगाहें उसका पीछा करती हुई उसके मुखमंडल पर छाई भाव -भंगिमा को पढ़ने लगी। आज उसके चेहरे पर मुझे उल्लास की कोई रेखा दिख नहीं रही थी। उसकी चुप्पी में उदासी के बादल छाए हुए…

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तुम में ही खुद की तलाश है

तुम में ही खुद की तलाश है लोग कहते है तू मेरी परछाई है मैं कहती हूँ तू मुझमे है मैं तुझमे हूँ ये क्या एहसास है कि तुम में ही खुद की तलाश है ज़ब भी देखूँ तुम्हे मेरा अक्स नज़र आये आइना है मेरा तू ,तुझे देख ही श्रृंगार हो जाये ये क्या…

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अबल पुरुष

अबल पुरुष पहले रहे होंगे पुरुष प्रबल और प्रभावशाली, पर आजकल वे बड़े अबल होते जा रहे हैं। सच में, क्या कहा? आप नहीं मानते? चलिए तो मैं बताती हूं।जब से सोशल मीडिया और डेटिंग साइट का बोलबाला हुआ है तब है पुरुष, जो है, बेचारा होता चला जा रहा है।ये हम सभी को ज्ञात…

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एक पेड़ गुलमोहर का

एक पेड़ गुलमोहर का लगाया था एक पेड़ लाल गुलमोहर का घर के आँगन में अपने ही हाथों से आपकी याद में  पिताजी  खड़ा है मेरे साथ आज भी जैसे आप खड़े रहते थे अपनत्व की छाँह लिए अपलक निहारते थे आप जिस तरह निहारती हूँ हरदम मैं लाल गुलमोहर झड़ते हैं लाल लाल फूल…

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पलाश

पलाश ’’माँ…….माँ ………. हमारे खेत की मुँडेर पर जो पेड़ लगे हैं उन पर कितने सुन्दर फूल आऐं हैं, देखा तुमने?” “वह तो हर साल आते हैं……. इन्हीं दिनों, होली के समय……… टेसू कहते हैं उसे….” “माँ….उन फूलों का रंग कितना सुन्दर है, गहरा पीला…नारंगी…….. कहीं कहीं काले धब्बे हैं पर माँ ऐसा लग रहा…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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होली के रंग

होली के रंग चहुँ ओर फैला उल्लास फाल्गुन का ये सुंदर मधुमास होली आयी होली आयी ढोलक-मृदंग सब रस लाई खिले पलाश हैं लाल कोयलिया की कुहू कुहू गान अधरों ने छेड़ी जो तान… मौसम हुआ गुलनार सुखद लगे है बयार रास विलास को लाये होली घन बरसत रंग फुहार उन्मुक्त प्रेम भरे दिलों में…

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मुंशी प्रेमचंद

मुन्शी प्रेमचंद कथा सम्राट, उपन्यास सम्राट कहानी सम्राट लघु कथा, प्रेमचंद जी की रचनाओं में ग्रामीण परिवेश रहन सहन जीवन शैली देखते ही बनती है उनकी किसी भी कहानी लघु कथा या निबंध आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है उनके किसी एक रचना को रुचि कर बताना बहुत ही मुश्किल कार्य है उनके कहानी…

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सुमधुर भारत वर्ष हमारा जाने कितनी कवियों ने दोहराई होगी बात पुरानी , आज सुनाता हूँ मैं तुमको नव भारत की नई कहानी। नई पुरानी सभ्यताओं का संगम भारत वर्ष कहाता, यहाँ कभी ना टूटा नई पुरानी संस्कृतियों का नाता। यहाँ जुड़ी है कड़ियां कितने रस्मों और रिवाजों से, यहाँ मिली है धड़कन कितनी धर्मों…

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भारतीय वैज्ञानिक 

भारतीय वैज्ञानिक      मैं ऋषि कणाद का अनादि कण, हूँ सूक्ष्म किन्तु न मेरा कोई अंत,   मैं देता ज्ञानी आर्यभट्ट सा जगत को शून्य का तत्व, सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण क्यों होता है सुलझाता मेरा तत्त्व,   मैं रसायनशास्त्री नागार्जुन का रसरत्नाकर, अलग-अलग धातु से स्वर्ण बनाऊ ऐसा मैं जादूगर,   मैं योगाचार्य ऋषि पतंजलि…

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