प्रेम का पथ

प्रेम का पथ प्रकृति ने सिखाया प्रेम समर्पित भाव से बंधन मानव से मानव करे प्रेम हृदय देखो बने चंदन। नेह से बने रिश्तों का महकता है सदा प्रकाश प्रेम जोत जगे हृदय में हो जाता मन वृंदावन। ममता के पलने में झूले प्रेम आनंदित हो संतान मात पिता , गुरू सखा प्रेम ही है…

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कैसे मनाएँ

कैसे मनाएँ कैसे मनाएँ आज़ादी का जश्न..? कैसे भुलाएँ कोरोना के ग़म…? विश्व पुरुष जब अश्रु बहाता हो, कैसे भारत माँ का श्रिंगार करें हम .. कैसे भुलाएँ कोरोना के ग़म। मानवता पर जब घना संकट मंडराता हो, जीवन ,मृत्यु से दया की भीख माँगता हो, मृत्यु का तांडव अविराम चलता हो.., हर गली-मोहल्ले में…

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पर्यावरण का करें ख्याल

पर्यावरण का करें ख्याल दुनिया भर में 5 जून का दिन विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में निर्धारित है। 1973 में पहली बार अमेरिका में विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया गया था। इस वर्ष भी हर वर्ष की तरह पर्यावरण दिवस पर दो-चार पेड़ लगाकर हम अपने दायित्व को पूरा कर लेंगे। लेकिन…

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निर्मला लौटेगी ज़रूर !

निर्मला लौटेगी ज़रूर ! हमारे शहर के इस हिस्से में यह तीन तल्ला,आलीशान पीली कोठी, वास्तुकला की अनुपम मिसाल है. जिसका,काले रंग का, ऊँचा सा भारी भरकम, कटाव-दार मुख्य दार है. लोहे की सर्पाकार सीढ़ियाँ, आबनूस की लकड़ी व रंगीन-सफेद काँच से बनी खिड़कियाँ-दरवाजे, ‘चायनीस-ग्रास’ से सजा कालीन-नुमा उद्यान,विलायती गुलाबों की क्यारियाँ, मुख्य द्वार पर…

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विरोधाभास की विलक्षणता: दिव्या माथुर

विरोधाभास की विलक्षणता: दिव्या माथुर जब पहली बार वातायन से जुड़ने वाली थी तो दिव्या जी से बात हुई, शब्दों में खरापन और स्नेह दोनों एक साथ थे, और ऐसा बहुत कम होता है।वैसे दिव्या जी के कई गुण हैं जो परस्पर विरोधाभास लिए प्रतीत होते हैं पर बहुत ही सरलता से उनमें समाहित हैं,चाहे…

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चेहरा बनाये बेदाग

चेहरा बनाये बेदाग स्कीन पर किसी प्रकार का दाग केवल आपकी खुबसूरती पर ही दाग नहीं है बल्कि आपके आत्मविश्वास को भी कम करता है । साथ ही साथ यह मानसिक तनाव का कारण भी बन जाता है। लेकिन आज के इस आधुनिक युग में अब प्रत्येक प्रकार के दाग का इलाज संभव है। केवल…

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हरफनमौला बंशी

हरफनमौला बंशी बंशी उठ जा! देख सभी उठ गए |सूरज पंक्षी पेड़ पौधे| देख गाय भी रंभा रही | उठ जा तू भी |बंशी को अम्मा परेशान सी झकझोर रही थी| वो चादर को सिर तक ओढ़ कर कमरे की कोने वाली चौकी पर अड़ा सा पड़ा हुआ था | उठ जा रे लड़के…. उठ…

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दंगों के बाद

दंगो के बाद दंगो के बाद वाला आसमान काला होता है कालिख बहुत दिन तक गिरती रहती है समाज के सर दंगो के बाद खतरनाक होता है राजनीति करना दंगो के बाद की राजनीति लेकिन सबसे खतरनाक होती है एक जली इमारत दूसरी को देखती है पूछती है तुम्हे क्यों जलाया जली इमारत रुआंसी है…

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रिटायरमेंट

रिटायरमेंट आज फिर उषा प्रियम्बदा की कहानी “वापसी” के किरदार गजाधर बाबू की याद मेरे ज़ेहन में बिजली की तरह कौंध गई। क्योंकि मेरे सामने दूसरे गजाधर बाबू दिखाई दे रहे थे। ४२ वर्ष का विद्यालय जीवन अनुभव कर २००२ में विद्यालय से रिटायर हो रहे थे आशू के पिताजी श्री दीनदयाल सिंह। बहुत खुश…

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