भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- खुदीराम बोस

खुदीराम बोस जीवन परिचय : खुदीराम बोस का जन्म 03 दिसम्बर 1889 को बंगाल के मिदनापुर जिले के हबीबपुर गांव में त्रैलोक्यनाथ बोस के यहां हुआ था. उनकी माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था. केवल 6 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपने माता पिता को खो दिया था. उनका लालन पालन उनकी बहन करती…

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ये पात्र हर तीसरे घर में हैं ….

ये पात्र हर तीसरे घर में हैं …. प्रेमचन्द को याद करते ही ढेर सारे पात्र साथ साथ चले आते हैं, दिमाग में मन्डराने लगते हैं फ़िर चाहे वह धुनिया,झुनिया, गोबर, होरी, निर्मला, तोताराम हों या कहानियों में से झांकते हलकू, अलगू जुम्मन ,खाला, बड़े घर की बेटी, बुधिया, हामिद, दादी, हीरा मोती की जोडी…

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ममता कालिया से सन्दीप तोमर की साहित्यिक चर्चा

ममता कालिया से सन्दीप तोमर की साहित्यिक चर्चा ममता कालिया हिंदी साहित्य की प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। वे कहानी, नाटक, उपन्यास, निबंध, कविता जैसी अनेक साहित्यिक विधाओं में बराबर दखल रखती हैं। हिन्दी कहानी के परिदृश्य पर उनकी उपस्थिति सातवें दशक से निरन्तर बनी हुई है। लगभग आधी सदी के काल खण्ड में उन्होंने 200…

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A Nondescript Thought

A Nondescript Thought One of the noticeable and remarkable annual events,World Environment Day(WED) is being organised in all the Continents since1972.It is one of the Dream if Not Cream initiatives of the UNO.It aims at creating adequate awareness about importance of nature,the nature which surrounds us,the nature that comprises of Bio-diversity. The components thereof, are:…

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पहला झरोखा (मैं और नानी)

पहला झरोखा (मैं और नानी) मैं शायद पाँच साल की… खड़ी हूँ नानी के साथ। चेन्नई का मैलापुर इलाक़ा। स्त्री, पुरुष, युवा सभी कीमती रेशमी कपड़ों में सजे, मैं और नानी सामान्य पर पारम्परिक वस्त्रों में…नानी नौ गज की साड़ी में, मैं सूती पावाड़ा में। सामने मंच पर सुर बद्ध चार संगीतकारों के समूह में…

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कोरोना की मार और 15 अगस्त

कोरोना की मार और 15 अगस्त 15 अगस्त … स्वतंत्रता-दिवस …खुशी और आनंद का दिवस…अंग्रेज़ी हुकूमत से भारत की आज़ादी का, बंधन-मुक्त होने का दिवस…… मुझे याद आते हैं, मेरे बचपन के दिन.. जब मैं स्कूल में थी और 15 अगस्त का दिन आता था… वह साठ का दशक था.. आज़ादी मिले चन्द साल ही…

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ललिता वर्मा की कविताएं

ललिता वर्मा की कविताएं 1.साथ दोगे हमेशा तुम कभी भी मुझ को बिखरने न दोगे है मुझे ये यकीं साथ दोगे हमेशा तुम कभी भी………. जब कभी राह की ठोकरों से गिरूं तो फिर से उठकर संभलने की हिम्मत भी दोगे तुम कभी भी ……. जब कभी भी अवसाद घेरेगा मुझ को गीत बनकर ह्रदय…

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