शहादत

शहादत शहादत जो हुआ सो हुआ अब तू संभाल ले खुद को दूर चलना है, रास्ता अभी बाकी आशाओं की तरह | आसान नहीं है रास्ता यहाँ जंगल भी है फूलों भरी बगिया भी, खूंखार शेर भी है मासूम तितली भी | फिर भी चलना है लक्ष्य के लिए और दिल में प्रेम लिए.. |…

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स्वतंत्रता उर्फ़ स्वाधीनता या स्वछंदता,.?

स्वतंत्रता उर्फ़ स्वाधीनता या स्वछंदता,.? स्वतंत्रता क्या है,..? स्वतंत्रता का अर्थ क्या है,..? अपने मन मुताबिक चलने की आज़ादी,..? या मनमानी करने की आज़ादी,..? या अभिव्यक्ति की आज़ादी,..? आखिर क्या है स्वतंत्रता?? एक पतंग जो खुले आकाश में उड़ती है आज़ाद होती है? या एक पंछी जो अपनी काबिलियत और सामर्थ्य के दम पर उड़ता…

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तू धरती पर ख़ुदा है माँ

तू धरती पर ख़ुदा है माँ, पंछी को छाया देती पेड़ों की डाली है तू माँ. सूरज से रोशन होते चेहरे की लाली है तू, पौधों को जीवन देती है मिट्टी की क्यारी है तू. सबसे अलग सबसे जुदा, माँ सबसे न्यारी है तू. तू रोशनी का खुदा है माँ, बंजर धरा पर बारिश की…

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वो धुकधुक 

वो धुकधुक    “रात के दस बज गए, आज फैक्ट्री में कुछ ज्यादा ही देर हो गई!” घना सन्नाटा उसे दबोचकर जैसे उस पर हावी होना चाहता था मगर घबराती गरिमा स्ट्रीट लाइट की रोशनी की आड़ में अपनी चुन्नी से सिर ढक चेहरा छुपाती हुई बस स्टॉप की ओर जल्दी-जल्दी तेज कदमों से कभी…

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देवी नहीं, नारी हूँ मैंं

देवी नहीं, नारी हूँ मैंं मुझे चाहत नहीं मैं कोई देवी बनूँ, शक्ति का पर्याय कहलाऊँ करुणा की वेदी बनूँ चाह मुझे बस इतनी कि मैं इंसान रहूँ खुलकर साँस लूँ अविरल धारा सी बहूँ, खुले आसमान में पँख फैलाकर उड़ूँ, खुश रहूँ,सपने देखूँ उसे निर्बाध पूरा करूँ अपने प्रेम को हँसता देखूँ अपनी ममता…

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कोरोना वाइरस से संघर्ष

कोरोना वायरस से संघर्ष संपूर्ण मानवता आज कोरोना वायरस नाम के बीमारी से खौफ में हैं,जिसे सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस -2 (SARS-CoV-2) का नाम दिया गया है, जिससे पिछले चार-पांच महीनों से कोविड-19 नाम की बीमारी हो रही है।चमगादड़ इन वायरस के प्राकृतिक पोषिता/स्रोत माने जाते हैं. कोविड- 19 को आम तौर पर…

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जय श्री राम

जय श्री राम    राम जी की शरण में चले आइए प्रेम प्रभु जी से सच्चा सभी पाइए कौन अपना है संसार में ये कहो राम जी के ही गुण बस सदा गाइए   राम जी सबके दुख आप हर लीजिए और सब पर दया आप अब कीजिए पाप सबने किए हैं बहुत ही यहाँ…

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तेरे जैसा दोस्त कहाँ

जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी! सिर्फ हमारे प्यार में ही नहीं बल्कि दुनिया के हर रिश्ते में शामिल होना चाहिए दोस्ती का एक अहम भाव क्योंकि सुना है दोस्त तब भी जान लुटा सकते हैं जब दोस्त की जान पर बन आए फिर चाहे वो सही हो या गलत, दोस्त अपनाते हैं…

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बचपन: उजला पक्ष

बचपन: उजला पक्ष उम्र के इस पड़ाव पर बचपन याद करना अच्छा लग रहा है। मेरा जन्म अपने बाबा के घर गोरखपुर में हुआ। हमारे बचपन में घर में खाने-पीने की सामग्री भरपूर होती थी मसलन दाल-चावल, आटा, दूध-दही मगर सजावट या प्रदर्शन के नाम पर कुछ नहीं था। हम बहुत अमीर नहीं थे पर…

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चाय

चाय चाय;तुझे गोरों ने लाया हमारी धरती, पहाड़ों और तराइयों पर बसाया बने हरे भरे चाय बगान हज़ारों कामगार को मिले रोज़गार। चाय, तेरे रूप अनेक रच बस गई इस धरती पर पूरब -पश्चिम उत्तर -दक्षिण अमीर -ग़रीब बन गई सबकी चाहत चाय तेरे भिन्न भिन्न रंग! कभी गोरी कभी काली सर्दी में अदरक वाली,…

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