नारी अबला नहीं है

नारी अबला नहीं है 1908 ई. में अमेरिका की कामकाजी महिलाएं अपने शोषण के विरुद्ध और अपने अधिकारों की मांग को लेकर सडकों पर उतर आईं। उनका मुख्य मुद्दा महिला और पुरुष के तनख्वाह की समानता का था । 1909 ई. में अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने उनकी मांगों के साथ राष्ट्रीय महिला दिवस की…

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एक स्त्री की तीन आवाजें !

एक स्त्री की तीन आवाजें !   दोपहर की चाय जब तक उबलती, तब तक सीमा खिड़की के पास रखी कुर्सी पर बैठ जाती। सामने स्कूल से लौटते बच्चे, दूध वाला, दोपहर की सुस्ती में पसरे कुत्ते और बगल की अरोड़ा आंटी की आवाज़ें – सब रोज़ की तरह चल रहा होता, पर सीमा की…

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जीने की ललक

जीने की ललक रेमडेसिविर दिया जा चुका था। डॉक्टर को उम्मीद थी वो बच जाएगा। मगर आज उसका ऑक्सीजन लेवल बहुत गिर गया था। वो बार बार ऑक्सीजन मास्क को उतार फेंक रहा था। और एक ही रट लगाए जा रहा था, “मैं नहीं बचूँगा मुझे घर जाने दो बच्चों को एक बार देख लेने…

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रूहानियत

रूहानियत ‘एक कहानी लिखनी है मुझे, सच्ची कहानी.. मेरे और आपके प्यार की।’ ‘क्या दुनिया हज़म कर पाएगी इसे? और फिर लिखोगी क्या इसमें?’ ‘सिर्फ दर्द, मेरा और आपका..’ ‘फिर तो भूल ही जाओ.. कोई नहीं पढ़ेगा इसे।’ और यही चुनौती तो वह शुरुआत थी मेरी और अरुण जी की कहानी की, जिसे मैं न…

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महारानी विक्टोरिया

महारानी विक्टोरिया यूँ तो माँ भारती की वीरभूमि में कई महानायिकाओं ने जन्म लिया है। किन्तु विश्वमंच भी ऐसी कई महान विभूतियों से भरा पड़ा है। झोपड़ी से लेकर महलों तक में इन वीरांगनाओं की प्रखर ओजस्वी गाथाएँ आज भी गाई जाती हैं। इनकी विशेषताओं और जज़्बे ने इतिहास रच डाला है। भारत की रानी…

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मेरी बेटियाँ:मेरी शान

मेरी बेटियाँ:मेरी शान लोग गलत थे जो कहते थे अक्सर, बेटों से चलता परिवार है, जो कहते थे मेरा बेटा मेरे घर की शान है, आज उनका घर खाली पड़ा श्मशान है, बेटियों से ही बढ़ती हर घर की शान है, बेटियाँ ही माता पिता का अभिमान हैं। खुद रहते हैं वो अब वृद्धाश्रम में…

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गर्मियों में सही खानपान

गर्मियों में सही खानपान गर्मी का मौसम चल रहा हैं इसलिए अपने खानपान का पूरा ध्यान जरूर रखें. आपका भोजन या आहार ऐसा होना चाहिए जो आपके शरीर को ठंडा रखे, आसानी से पचे और आपके स्वस्थ को ठीक रखें. शुद्ध और संतुलित आहार लेने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, पाचन क्रिया बढ़िया…

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मन के मोड़

मन के मोड़ कहते हैं राह तो सीधी होती है, मोड़ तो सारे मन के हैं। पहाड़ों के मोड़ों पर लिखा होता है कि मोड़ तीखे हैं, हार्न बजाएँ। जिंदगी में शायद कोई नहीं बताता कि आगे मोड़ है, यहाँ से निकलना मुश्किल होगा और आगे ना बढ़ें। मालती खिड़की से बाहर देखती हुई सोच…

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