मेरे राम आ गए
मेरे राम आ गए मेरे राम आ गए प्रभु फिर लौट कर अपने अयोध्या धाम आ गए मुकुट माथे सजा कर अब मेरे श्री राम आ गए जगमग हुई अयोध्या नगरी प्राण प्रतिष्ठा हो रही ग्रहण है पांच सदियों का व्यथा उर की पुरानी है हुआ अवतार सरयू पर दबी इक इक निशानी…
मेरे राम आ गए मेरे राम आ गए प्रभु फिर लौट कर अपने अयोध्या धाम आ गए मुकुट माथे सजा कर अब मेरे श्री राम आ गए जगमग हुई अयोध्या नगरी प्राण प्रतिष्ठा हो रही ग्रहण है पांच सदियों का व्यथा उर की पुरानी है हुआ अवतार सरयू पर दबी इक इक निशानी…
विरोधाभास की विलक्षणता: दिव्या माथुर जब पहली बार वातायन से जुड़ने वाली थी तो दिव्या जी से बात हुई, शब्दों में खरापन और स्नेह दोनों एक साथ थे, और ऐसा बहुत कम होता है।वैसे दिव्या जी के कई गुण हैं जो परस्पर विरोधाभास लिए प्रतीत होते हैं पर बहुत ही सरलता से उनमें समाहित हैं,चाहे…
रंगभूमि प्रेमचंद ने अपने लेखन की शुरुआत आदर्शात्मक रुझान से की थी। प्रेमचंद अपने संक्षिप्त रचना काल में कई मार्गों पर चले और कुछ दूर चलकर अगर उन्हें खटका होता था तो राह बदल लेते थे। सुधार वाद ,आदर्शवाद ,गांधीवाद और साम्यवाद यह सभी उनके मार्ग रहे। हिंदी कथा साहित्य को जीवन की यथार्थता और…
हिन्दी : कल, आज और कल हिन्दी हमारी मातृभाषा और हमारी राष्ट्रभाषा है। हमारे राष्ट्र के माथे की बिन्दी है। भाषा संप्रेषण का सशक्त साधन होता है। जीवंतता, स्वायत्तता तथा लचीलापन भाषा के प्रमुख लक्षण हैं। इसलिये देश में हिन्दी बोली जाने के आधार पर 14 सितंबर 1949 को संविधान की भाषा समिति ने हिंदी…
माँ! मेरे यह गीत सारे,आज तुझको हैं निवेदित मन के मेरे भाव निर्मल,तेरे चरणों में हैं प्रेषित शीत की ऊष्मा हो माते और हवा सा प्यार हो स्नेह का सागर समेटे, तुम दैवीय उपहार हो जो मेरा जीवन है गुंजाता,तुम वो अनहद गान हो क्या तुम्हें उपमा मै दूँ माँ,तुम स्वयं उपमान हो जीवनशाला का…
स्वर्णिम लेखनी बहुत कठिन प्रश्न है यह कि मुंशी जी की कौन-सी रचना सर्वाधिक पसंद है और क्यों ?जिस लेखनी से कथा का अर्थ समझा व पढ़ने का सलीका आया वह है कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कलम। हर कहानी मन-मस्तिष्क पर अंकित। चाहे मजदूर हो या किसान, सूदखोर महाजन या खून चूसता जमींदार, सरकारी…
घरेलू हिंसा मुझे हिंसा अपने आप में ही बहुत बुरी लगती है ।आमतौर पर लोगों को ऐसा लगता है कि हम हिंसक हो जाएंगे तो हमें हमारा हक मिल जाएगा , लोग हम से डर जाएंगे लेकिन यह गलतफहमी है ।हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है ।जब यहीं हिंसा घर में होने…
कैसी कायरता रावण के वंशज , तुमने यह कैसी कायरता दिखलाई है पीठ में छुरा घोंपकर, कैसी हैवानियत दिखलाई है चवालीस घर का दीपक बुझाकर, यह कैसा अन्याय किया पुलवामा की धरा पर यह कैसी क्रूरता दिखलाई है वीर सपूतों का बदला लेकर रहेंगे शहीदों की शहादत लेकर रहेंगे कैसी छीना -झपटी चाल है तेरी…
Self-awareness Oneiric wordplay scripture of life avant-garde of existence I dream of eternity I know it sounds insane but I have an anchor in my heart Plot What comes to my mind is my mind’s Intellectual solitude radiance of hope silence sounds It so suprises me the reversal of my own desires to myself Quotation…