दहलीज

‘दहलीज’ लगभग बाइस-तेईस बरस की कमली घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन धोने का काम करती है। पति मजदूर है और सात बरस से कम उम्र के चार बच्चे थे दोनों के। उनमें से दो बड़े बच्चे स्कूल जाते हैं। तीसरी और चौथी बच्चियां अभी बहुत छोटी हैं। उन्हें घर पर अकेला छोड़ना सहज न था…

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पिता के नाम पत्र

पिता के नाम पत्र पूज्य पापा, सादर प्रणाम सबसे पहले आपको मैं पितृदिवस की हार्दिक शुभकामनायें देते हुये ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करती हूँ ।सुबह सबेरे जब हमने आपसे फोन पर बात की थी तब आपको उन खतों की याद दिलाई थी जो हमनें आपको लिखे थे बहुत लम्बे लम्बे खर्रों के…

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वो लड़का

वो लड़का वो लड़का जिसे मैंने बेहद करीब से जाना था, उसके संघर्षों की साक्षी रही हूँ, आज न्याय-व्यवस्था के शीर्ष पद पर शपथ ले रहा था। उसकी आँखों में खुशी और गम की बूँदे झलक रही थी। शपथ-कार्यक्रम में जो भी शामिल थे – करीबी, परिवार, दोस्त सभी उस पल के साक्षी थे। अगर…

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मिथिला का लोक पर्व “सामा- चकेवा”

मिथिला का लोक पर्व “सामा- चकेवा” सामा-चकेवा एकमात्र मिथिला में मनाया जाने वाला लोक पर्व है. यह पर्व मिथिला की संस्कृति से जुड़े होने के साथ ही इसकी पौराणिक मान्यता भी है. बहनो द्वारा भाई के लिए मनाया जाने वाले इस त्यौहार का शुभारम्भ कार्तिक शुक्ल सप्तमी, छठ के पारण यानि सुबह के अर्घ के…

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एक लड़की थी…

एक लड़की थी… शरारती किस्से वो फ़ोन पर सुनाया करती थी एक लड़की थी मुझे गोद में सुलाया करती थी बिन बाबा के कैसे बीती थीं उसकी माँ की रातें कुछ बेचैनियाँ थीं सिर्फ़ मुझे बताया करती थी डर मेरी उल्फ़त से था, कोई और पसंद था उसे इसी बात पर ज़्यादा खुद को रुलाया…

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औरत ,औरत की दुश्मन

प्रायः यह जुमला सुनने को मिल ही जाता है जब कभी किसी औरत को दूसरी औरत द्वारा प्रताड़ित या परेशान किया जाता है। काफ़ी लोगों का यह मानना है कि अधिकतर औरत ही औरत की परेशानी का कारण होती है। यदि हम आस – पास नज़र डालें और औरतों के प्रति हो रहे अपराधों के…

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वह

वह — किताबों की जिंदगी से तब्दील हुई जब गृहिणी में आटा-दाल से सम्बंध जो कर बचत का हिसाब लगाना, साड़ी बांधना, पल्लू सम्हालते हुए रोटी बेलना, चूडियों और पायल के बंधनों से बंधना, नये सम्बंधों और संबोधनों को दिनचर्या का हिस्सा बनाना, उसी बीच माँ की प्यार भरी थपकी अपनी जुगनू सी रोशनी से…

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फागुन में

फागुन में रंग उड़ने लगे हैं लाल पीले सखी री फागुन में गीत कोयल भी गाये सुरीले सखी री फागुन में मौसम लेता है अँगड़ाई पेड़ों पर नव कोंपल आई कलियाँ अपने घूँघट खोले गुन गुन करते भँवरे डोले रंग फूलों के हुए चटकीले सखी री फागुन में रंग उड़ने लगे हैं लाल पीले सखी…

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