राम का राज्याभिषेक

राम का राज्याभिषेक आश्वस्त हैं राम अपने धर्म,सभ्यता और संस्कृति से परंतु आशंकित है वर्षों बाद घर वापसी में, मंथरा का (दासो का) कुनबा पूँछ सकता हैं उनका नाम और जन्मस्थान -!!! सीता तुम पुरूष चित्त से सोचना मानवीय आचरण के राम मर्यादा के पुरूषोत्तम राम तुम्हारे लिए वन वन भटके राम कितना कठिन है…

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महिला सशक्तिकरण/सक्षमीकरण

महिला सशक्तिकरण/सक्षमीकरण वैसे भी महिला सशक्तिकरण पर लिखना ही अपने आप को “अबला” साबित करना है, हमे अपने आप पर लिखना ही एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है.. क्यों?? लिखने पर पाबन्दी नही है, खुब लिखे पर,खुद के लिए दया, विफल नारी, आश्रित,कहकर मत लिखिए, “नारी”ईश्वर की अनुपम और सर्वश्रेष्ठ कृति,सृजन करने वाली,और जब वह सृजन…

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आया बसंत

आया बसंत खेतों में सरसों के फूल, बागों में गेंदे के फूल- प्रकृति की यह अनुपम छटा बसंत के आगमन का संकेत है। ऋतुओं का राजा बसंत तन-मन को गुदगुदा देने वाला संदेश लेकर आता है। बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा की जाती है। ज्ञान, बुद्धि और संस्कार की देवी सरस्वती को आह्वान करते हुए…

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स्वाद

स्वाद आज कोई खास बात है क्या? कोई भी घर से नहीं जा रहा हैं। इतने बजे तक तो बहू अलका, बेटा अरविंद और पोता अरुण चले ही जाते हैं। अलका टीचर है, बेटा आई.टी कंपनी में मैनेजर और अरुण आठवीं क्लास में। तो क्या आज सब घर में रहेंगे ?यह लॉकडाउन क्या है? मतलब…

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तेंतर

तेंतर महान साहित्यकार, समाजसेवी, युगदृष्टा, युगपुरुष प्रेमचंद जी का जन्म ३१ जुलाई सन १८८० में बनारस के पास मगही गाँव में हुआ था. बचपन का नाम धनपत राय था. घोर गरीबी, सौतेली माँ के दुर्व्यवहार और  पिता की अकाल मृत्यु ने उन्हें तोड़ दिया. बमुश्किल मैट्रिक की परीक्षा दे सके. प्रतिकूल परिस्थियां भी उनके साहित्य…

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समा जाये तेरे हर गुण मुझ में

समा जाये तेरे हर गुण मुझ में माँ जीवन का सार हो तुम मेरी ताल लय मीठी धुन हो मेरी तेरे जैसे बनना है, सदा रहूँ कदमों में तेरी। सदा नयन में बसती हो मेरी हृदय में विराजती मेरी जीवन से और कोई चाहत नहीं परछाई बनना है तेरी। हो धरा सी क्षमाशीला जानकी सदृश…

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माँ की याद

माँ की याद ————— तुम याद बहुत आती हो माँ। खुद में तुमकों, तुममें खुद को पाती हूँ, माँ तुम याद बहुत आती हो माँ। आती हैं याद बचपन की। जब बच्चो को करती प्यार डांट और फटकार लगाती, तब तुझको खुद में पाती हूँ माँ। तुम याद———-। हम बच्चों के खातिर, दिन भर करती…

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अनिर्णित आख्यान

अनिर्णित आख्यान मोबाइल पर हाथ जाते ही सीधे फेसबुक पर उंगलियां चहलकदमी करना शुरू कर देती हैं। फेसबुक पर नए मित्रों की,कुछ पुराने मित्रों की फोटो पोस्ट दिख रही है। लाइक कमेंट का खेल चल रहा है। कुछ पोस्ट पूरी पढी, कुछ आधी- अधूरी पढ़कर कमेंट कर दिया। कहां तक सबको पूरा पढ़े ,पर कुछ…

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