त्योहारों में उल्लास

त्योहारों में उल्लास ढूंढना हो अगर त्योहारों मे तो उसका ध्येय ढ़ूंढ़िए उद्देश्य ढ़ूंढ़िए। उपहारों के बंद डब्बों मे लेने वाले की मुस्कान देनेवाले का अरमान ढ़ू़ंढ़िए। त्योहार धर्मों का नहीं उमंग और उल्लास का होता है, बड़ी कठिन डगर है इस जीवन की ये छोटे छोटे त्यौहारों के पड़ाव ना होंगे तो हम थक…

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नारी सशक्तिकरण का स्वरूप – “सौत”

नारी सशक्तिकरण का स्वरूप – “सौत” हिंदी साहित्य में जब भी कहानी की चर्चा होगी, वह मुंशी प्रेमचंद जी का नाम लिए बिना हमेशा अधूरी ही रहेगी। उनकी कहानियों में समाज के सामान्य वर्ग; जिनमें छोटे, दबे कुचले, सहमे और सताए लोगों से जुड़ी समस्याओं का विशेष स्थान रहा है। अपने जीवन-काल में जिस आर्थिक…

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वीर स्थली का सिंह नाद

वीर स्थली का सिंह नाद 1 जुलाई, 2016 को भारतीय सेना की एक महत्वपूर्ण पलटन ‘9 पैरा स्पेशल फोर्सेस’ अपना 50वाँ स्थापना दिवस बड़े उत्साह और गर्व के साथ मना रही थी | सेना से सेवा निवृत हुए बहुत से अधिकारी भी सपरिवार इस महाकुम्भ में भाग लेने के लिए देश- देश से आए हुए…

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शिक्षा

शिक्षा विधिवत शिक्षा दे रहे , भाव हीन, नित ज्ञान । न संस्कार पोषित रहे, नहीं लेत संज्ञान । क्या होगा इस ज्ञान का, कहते प्रमाण पत्र । कोई नौकरी न मिलें, घूमो तुम सर्वत्र ।। अब शिक्षा के नाम पर, होता है व्यवसाय । शिक्षा रही न दान अब , कैसे जग समझाय ।…

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वो प्यारी पाती

वो प्यारी पाती वो कलम का उठाना उसके नीचे एक कॉपी का रखना आधा खत लिखकर सिरहाने धर लेना, फिर कुछ और मन की बातें लिखना, लिफाफे पर पता लिखकर वो गोंद पर ओंठ को घुमाना या फिर गीली उंगली से चिपका देना। वो प्यारा सा लाल डिब्बा जो बाहे पसारे इंतज़ार करता था। जिसका…

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शून्य से समग्र की ओर

” शून्य से समग्र की ओर “…. इस विराट ब्रह्मांड में हमारे होने का सत्य ही यह जीवन है ।धरती पर बसे हर जीव की अपनी एक कहानी है। संवेदनाओं की अनुभूति गहरे चिंतन के बाद अभिव्यक्ति का वह भास्वर बनती है जहां पारस्परिक एकात्मकता जीवन को मजबूती प्रदान करती है। कहते जिसका जितना समर्पण…

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My Christ

My Christ Turn your gaze to the world, to every living being in the Universe. Merciful to your children who, while asking for your help, Oh Christ, they continue to scourge You every day. Pitiful, suffering eyes, they beg man to change. My brother, listen: open your heart, it is my Christ who speaks to…

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पिता

पिता देखा है बचपन से कैसे अपनी हर ख्वाहिश को छिपा कर हम भाई बहन को दी हर सुख की छांव कभी न रुके न थके कभी न कहीं गए कभी न कोई छुट्टी बस काम और बस काम अच्छी से अच्छी शिक्षा खान पान ,पहनावा रखा हम भाई बहन का कर खुद के लिए…

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