DEFINITENESS OF PURPOSE

DEFINITENESS OF PURPOSE Floating thoughts in reverberations, are gently flickering on the screen of our visions. I’m just downloading a beam of stars and inhaling diamond stream from my heart. Hey, you little boy, pulsing inside here, are you happy to be seen on your purple screen? Or, at least, you’re breathing a misty awakening…

Read More

निर्णय

निर्णय एक तो खुद अपने परिवार की इतनी बड़ी जिम्मेदारी और ऊपर से मौसमी के घर की पहरेदारी। और भी तो कितने पड़ोसी हैं ,सबके साथ मौसमी की अच्छी पटती भी है।कई बार सोची कि मौसमी से कह दूं कि तुम अब चाबी किसी और के घर में रखा करो। पर पता नहीं क्यों मैं…

Read More

पर्यावरण और त्योहार

“पर्यावरण और त्योहार “ डरे सहमे से पेड़-पौधे जा पहुंचे मानव के पास दीपावली करीब आ गई तो उनकी थीं शिकायतें खास.. पत्ते, शाखाएं, फूल और कलियाँ सबके सब कुछ घबराए थे नन्ही घास,बेलें, लताएँ, फल मुँह बनाए और गुस्साए थे-.. “हर तरफ दीवाली की खुशियाँ हैं पर हम सब सहमे से खड़े हैं अजीब…

Read More

कोरोना बेचारगी और विडम्बनाएं

कोरोना बेचारगी और विडम्बनाएं कैसा खुलासा था हमारी बेचारगी का कि मिटाने के लिए स्थानीय श्रमिकों की भी भूख शुरू किया जा रहा था दुबारा भवन निर्माण जब तक इसकी चर्चा हो रही थी दूरस्थ भोपाल में ठीक था सब बहुत परेशान थीं शहर की एक अग्रणी कवयित्री अंतर राष्ट्रीय ख्याति की घूम रही थीं…

Read More

तेरे संग का रंग

तेरे संग का रंग होली में हमारे घर भांग पिसी जाती और उसे छुपा कर ठंडई में, पुआ में डाल दिया जाता ताकि देवरों नंदो को पता न चल पाए भाभी के मज़ाक का, और पति को भी आनंद के रंग में डुबो दिया जाए। उन दिनों परिवार बड़ा था और होली में मायका ससुराल…

Read More

आउटहाउस

आउटहाउस शिव शंकर जी और मालती जी के बंगले का आउटहाउस कुछ दिनों से खाली पड़ा था। आउटहाउस में रहने की आकांक्षा में कई लोग आए पर सफल ना हो पाए।अंततः एक ऐसा परिवार आया जिस दंपति के चार बच्चे थे।बड़ी दो जुड़वां बेटियां और उसके बाद दो बेटे। सबसे छोटा वाला बेटा मात्र ढाई…

Read More

शुभकामना संदेश

शुभकामना संदेश  जनवरी २०२०, आज से तीन वर्ष पूर्व गृहस्वामिनी परिवार ने अर्पणा संत जी के नेतृत्व में एक छोटा सा बीज डाला था। भयंकर कोविद महामारी अपनी चरम सीमा पर थी | पूरे विश्व में तबाही छाई थी | भारत भी अछूता न था | हर परिवार से कोई न कोई प्रियजन इस से…

Read More

निर्बाध प्रेम

निर्बाध प्रेम भादों की नदी-सी बहती .. हृदय की प्यास है प्रेम . भावना का उफान मात्र नहीं! अनुभूति की सच्चाई से भरी… पानी में नमक के एकाकार -सा … स्वाति के बूंदों की बेकली से प्रतीक्षा चातक का हठ है प्रेम ! विरह के बिना उपजता नहीं यह सभी विकारों को भस्म कर देने…

Read More

भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-रानी चेन्नमा

  कित्तूर की रानी चिन्नमा नारी दया,ममता, त्याग और प्रेम की प्रतिमूर्ति है। किंतु इतिहास गवाह है कि जब नारी पर अतिरिक्त कार्यभार या ज़िम्मेदारी पड़ती है तो वो उसे भी बखूबी निभाना जानती है।आज युग और समय काफ़ी बदल चुका है। बहुत से साकारात्मक बदलाव आए हैं समाज में।अब नारी पहले से कहीं अधिक…

Read More