पिता पूरा संसार है

पिता पूरा संसार है माँ आधार है तो पिता पूरा संसार है पूरी दुनिया में जो बिना थके चले वो बेशुमार प्यार है बच्चों का भविष्य सुधार सके इसके लिए हर दम तैयार है ऊपर से सख्त अंदर उनके प्यार ही प्यार है माँ आधार है तो पिता पूरा संसार है जिससे सीखा ईमानदारी का…

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अयोध्या केस

अयोध्या केस (1528 विवादित ढांचा के निर्माण से लेकर 2024 भव्य राम मंदिर तक…) अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। 22 जनवरी को भव्य राम मंदिर में रामलला को विराजमान कराया जाएगा। इस कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई दिग्गज नेता, अभिनेता, कलाकार व उद्योगपतियों…

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खूब याद करती हूँ तुम्हे, कभी उदास मत होना

खूब याद करती हूँ तुम्हे, कभी उदास मत होना एक हमारे बड़े होते-होते छूट गए कई छोटे-छोटे सुख। मुट्ठी में छिपाये गए छोटे-छोटे चॉकलेट केएफसी और डोमिनो के पिज्जा-बर्गर से ज्यादा लजीज थे। खेल में बार-बार हार कर मेरे आउट होने पर तुम्हारा अचानक छोटे से बड़ हो जाना और मेरी जगह खेलकर मुझे जीता…

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दो मोर्चों पर स्त्री

दो मोर्चों पर स्त्री पुरूष मानसिकता वाले इस समाज में आसान नहीं स्त्री का खड़ा हो पाना स्वतंत्रता से ,बेबाक ,हँसना-मुस्कुराना । पढ़-लिख कर काबिलियत के बल -बूते बाहर पाया मुकाम, बनायी अपनी पहचान भाया तेरा कमाना, काम के लिए बाहर जाना पर नहीं रास आया , तेरा निर्णायक कुछ कह जाना दो-दो मोर्चों पर…

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अनु बाफना की कविताएं 

  अनु बाफना की कविताएं  1.मशाल सी कलम प्रखर हो सूर्य किरणों-सा,तपिश से लोह भी पिघले । करे जो सत्य-आराधन,खरा सोना सदा उगले । दिखे जब राष्ट्र खतरे में, कि तीरों की करे वर्षा । बहे जब लेखनी ऐसी,सितारा देश का उजले । रचा साहित्य ऐसा था,लगे वनराज की गर्जन। जगाये ओज तन-मन में, उफन…

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दिव्या माथुर की रचनाओं पर प्रतिष्ठित लेखकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

दिव्या माथुर की रचनाओं पर प्रतिष्ठित लेखकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं दिव्या की कहानियों में एक तरफ़ औरत की परजीविता और यथस्थिति का यथार्थ है तो दूसरी तरफ़ संस्कार जनित संवेदनाएं। उनके लेखन में कहीं भी कथ्य या भाषा का आडम्बर नहीं है। अपने देश से दूर रहते हुए भी उनके पास भारतीय यथार्थ और संस्कार…

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“यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमन्ते  तत्र देवता”

“यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमन्ते  तत्र देवता” नारी के बिना इस सृष्टि की कल्पना करना संभव ही नही है। युवा हो या अधेड़ या हो वृद्ध। सभी पुरुषों को यह समझना जरूरी है। आज छोटी बच्चीयों से लेकर वृद्ध महिलाएं सुरक्षित नही है ,यह 21 वी सदी में रहते हुए भी बड़ी वेदना की बात है।…

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पलायन

पलायन पलायन क्यों? खतरे से घबराना क्यूं?? क्यों का कोई अर्थ नहीं, तुम्हें लगता कि….. हम जा रहे उस ओर, जहां कुछ तो होगा !! पर ! यह पलायन जरूरी नहीं, पूरा देश हमारे साथ है, फिर क्यों? आपदा व विपत्ति से घबराना, आग्रह है सुरक्षा का, दायित्व हमें निभाना है, दुःख की घड़ी में…

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नमक का दरोगा

नमक का दरोगा प्रेमचंद की सभी कहानियों में से “नमक का दरोगा” कहानी मुझे बहुत प्रभावित करती है। यह कहानी इस तथ्य को पुख्ता करती है कि ईमानदारी, नेक इरादे और सद्भाव रखने वालों को थोड़ा कष्ट जरूर सहना पड़ता है, परन्तु अंततः अंजाम हमेशा ही अच्छा और सकारात्मक होता है। यह कहानी धन और…

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हिंदी दिवस के जन्मदाता

हिंदी दिवस के जन्मदाता गत वर्ष गृहस्वामिनी में मेरा एक संस्मरण प्रकाशित हुआ स्वर्गीय व्यौहार राजेंद्र सिंह से जुड़े , उनके साथ कुछ पल रेलवे प्लेटफॉर्म पर एक छोटी सी मुलाकात के रूप में । आज उनके ही पौत्र डॉ व्यौहार अनुपम सिन्हा , जो मेरी छोटी बुआ का मंझला बेटा काका जी( श्री राजेंद्र…

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