स्पेशल-वार्ड

स्पेशल-वार्ड “दीदी, माँ आएगी न….माँ मेरे पास क्यों नहीं आती?….. मुझे बहुत दर्द हो रहा है….. मुझे उसके बिना नींद नहीं आती.” पांच साल का नन्हा रोहित अस्पताल के स्पेशल-वार्ड के बेड नंबर ग्यारह पर पड़ा, आने-जाने वाली हर नर्स से यही सवाल करता, फिर सुबक-सुबक कर रोने लगता. अस्पताल के उस स्पेशल वार्ड की…

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भारत की बातें

भारत की बातें ये भाषण भी ले लो, ये राशन भी ले लो, हमें मत सुनाओ तुम्हारी कहानी, सुनाओ हमें सिर्फ़ भारत की बातें. वो गीता की गरिमा, वो वेदों की बानी। वो भारत का दुनिया को रस्ता दिखाना, वो शांति, अहिंसा की राहों पे जाना, वो चाणक्य, अकबर, शिवाजी, वो राणा, वो झांसी की…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- रानी गाईदिन्ल्यू

क्रांतिकारी वीरांगना गाईदिन्ल्यू भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के काल में अंग्रेज प्रशासन को भयभीत रखने वाली अदम्य साहसी योद्धा के अतुल्य योगदान को नमन। “मैं (रानी) अंग्रेजों के लिए जंगली जानवर के समान थी, इसलिए एक मजबूत रस्सी मेरी कमर से बाँधी गई । दूसरे दिन कोहिमा में मेरे भाई ख्यूशियांग की भी बड़ी क्रूरता से…

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विरासत का वर्तमान

  विरासत का वर्तमान आखिर, जिस बिहार का अतीत इतना गौरवशाली रहा है आज वह इतना विकृत कैसे हो गया। बिहार में न तो प्राकृतिक संसाधनों की कमी है और न ही योग्यता की। आखिर वो कौन-से कारण हैं जिनके कारण रोजी-रोटी कमाने बिहारियों को दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। कुछ तो होगा। ऐसा…

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कफन

कफन उपन्यास सम्राट प्रेमचंद जी के, सभी उपन्यास,कहानियाँ वक्त की नब्ज को पकड़ कर लिखी गईं है।समाज का दर्पण हैं।यूँ तो मुंशी जी की सभी रचनायें अप्रतिम हैं,लेकिन जब किसी एक की पसंद का बात हो तो यकायक बिजली सी कौंध जाती है,स्मृति पटल पर वह रचना,जो किसानों के शोषण,साहूकार,जमींदारों के प्रभुत्व को दर्शाने के…

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शहीदों के नाम

शहीदों के नाम आज मौन हैं मेरे शब्द नहीं लिखनी मुझे कोई कविता क्या सचमुच इतने समर्थ हैं मेरे शब्द ? इतनी सार्थक है मेरी अभिव्यक्ति / कि रच दूँ आपके बलिदानों को सिर्फ एक कविता में…… हाँ, नहीं लिखना मुझे अपने जज्वात अपने अंदर उपजे असीम वेदना की लहर…. कैसे व्यक्त कर दूँ कुछ…

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उठो पार्थ, अब साधो बाण

उठो पार्थ, अब साधो बाण   निवी चाय को उफनते देख रही थी। कभी गैस की आँच को कम कर देती तो अगले ही पल एक और उफ़ान देने के लिए गैस की आँच को तेज़ कर देती। उसके चेहरे का तनाव बता रहा था कि किसी गहरे सोच में डूबी हुई है। तभी बेटी…

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बेचारी शिक्षा

बेचारी शिक्षा पुस्तकों की गलियों में भटकते – भटकते, मुलाकात हो गई शिक्षा से, मैंने पूछ लिया उससे, यूंही हाल उसका। रूआंसी होकर बोली वह, मत पूछो क्या हाल है मेरा, पहले रहती थी गुरुकुलों में, सादगी और संस्कारों के संग, पर अब हो गईं हूँ बाजारू, कभी पैसों के बल पर बेची और खरीदी…

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