मंजिल मिलेगी, चुनैतियों के पार

मंजिल मिलेगी, चुनैतियों के पार बात पुरानी है, यही कोई साठ साल पहले की… मैं अपने घर की चुलबुली, सुन्दर, हँसने-हंसाने वाली सबकी लाड़ली गुडिया थी …मेरी बड़ी बहन मुझसे ठीक विपरीत, गंभीर, शान्त, पढ़ाकू …. एक दिन मेरे ताऊ जी ने मेरी बहन का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से मुझसे कहा, “ज़रा अपना हाथ…

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ज्ञान की बात

ज्ञान की बात टेलीविजन पर शंकराचार्य और मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का प्रसंग चल रहा था। जीत और हार के लिए जो मानक निर्धारित किए गए थे मुझे उस समय वह बड़े हास्यास्पद लग रहे थे। दोनों के गले में फूलों की एक-एक माला थी और जिस की माला मुरझा जाएगी उसी को हारा हुआ…

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मानव सभ्यता का अदृश्य दुश्मन कोविड 19

मानव सभ्यता का अदृश्य दुश्मन कोविड 19 कोरोना पर चिंतन ‌करने से पहले हम अपनी पुरानी सभ्यता संस्कृति पर एक नजर डाल लें । पृथ्वी , काल और समय के अनुरूप सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और भौगोलिक मांग के अनुसार अपना संतुलन बनातीं रही हैं । त्रेतायुग में एक युद्ध ,द्वापरयुग में एक युद्ध फिर अभी…

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श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि आदरणीय पापाजी, सादर नमन”राधे-राधे” अत्र कुशलम तत्रास्तु!के उपरांत आगे समाचार यह है कि मैं इस दुनिया में ठीक हूं और उम्मीद करती हूं आप भी तारों की दुनिया में कुशल से होंगे। पापा मन अक्सर अकेले में बैठकर आपसे बातें करता है,वह चाहता है आपसे खुल पर बातें करें लेकिन अब आप… एक टीस,एक…

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नज़रिया

नज़रिया   कोरोना काल में समय कैसे गुजर जाता है पता ही नही चलता, एक दिन नीलू ने सोचा कि क्यों ना आज सुबह सुबह माया दीदी से बात की जाये ,फोन उठाया –दीदी कैसे हो,जीजाजी कैसे है,आपके शहर में कोरोना की स्थिति कैसी है? माया –अरे साँस तो लेने दो,कितने सवाल करोगी?? हम सब लोग…

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बुलंदियों के गगन में लहराएँ तुझे शान बान से

“बुलंदियों के गगन में                लहराएँ तुझे शान बान से” हम कौन थे ,क्या हो गये हैं और क्या होंगे अभी, आओ विचारें आज मिलकर ये समस्यायें सभी । सोने की चिड़िया कहा जाने वाला भारत देश अगर गरीबी, अशिक्षा ,बेरोजगारी आदि मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है तो…

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बदल रही है भारत की तस्वीर

बदल रही है भारत की तस्वीर हमारा गणतंत्र -हमारी राष्ट्रीय एकता-सम्प्रभुता-और अस्मिता का एक गौरवशाली दिन, पूर्ण स्वराज्य की अवधारणा के साकार प्रतिफलन का एक उज्जवल क्षण , एक नई सुबह-जागृति की, विश्वास की,एकता व गर्व-बोध से भरे गणतंत्र की, हाथों में तिरंगे झंडे उठाये हजारों बच्चों की एक सम्मिलित आवाज ” भारत माता की…

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वह

वह — किताबों की जिंदगी से तब्दील हुई जब गृहिणी में आटा-दाल से सम्बंध जो कर बचत का हिसाब लगाना, साड़ी बांधना, पल्लू सम्हालते हुए रोटी बेलना, चूडियों और पायल के बंधनों से बंधना, नये सम्बंधों और संबोधनों को दिनचर्या का हिस्सा बनाना, उसी बीच माँ की प्यार भरी थपकी अपनी जुगनू सी रोशनी से…

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