अमर शहीद अशफाक उल्ला खां

अमर शहीद अशफाक उल्ला खां हमारा भारतवर्ष सैकड़ों वर्षों तक गुलामी के दंश को झेलता रहा । इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो यह स्पष्ट होता है कि कोई बहुत बड़ा आक्रमणकारी आकर हमें गुलाम नहीं बनाया। इसके पीछे का कारण हम सभी अच्छी तरह जानते हैं हमारा देश छोटे-छोटे राज्यों में बटा…

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सूर्योपासना का महापर्व: लोकपर्व छठ

सूर्योपासना का महापर्व: लोकपर्व छठ आस्था की भावभूमि भारत, जहाँ संस्कृतियों की महानदी आकर एकाकार हो जाती है, जहाँ जीवन त्योहारों, लोकपर्वों, परंपराओं की रंगोली से सदैव सुशोभित होता रहता है, ऐसे’ विविधता में एकता ‘ वाले देश की अपनी विशिष्टता है- विविध प्रांतों की अपनी-अपनी क्षेत्रीय संस्कृति, उस संस्कृति के अनुरूप मनाए जाने वाले…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-होमी जे. भाभा

होमी जहांगीर भाभा :जनक भारतीय परमाणु कार्यक्रम    परमाणु भौतिकी वैज्ञानिक,वास्तु शिल्पी , संगीत-कला प्रेमी और लोकोपकारी व्यक्तित्व के धनी  “होमी जहांगीर भाभा” बहुमुखी प्रतिभा संपन्न एक ऐसी शख्सियत हैं जिनका नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा गया है ।भारत विश्व के नौ अग्रणी देशों में एक  है जिनके पास न्यूक्लियर पावर है और इस उपलब्धि का…

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दसवें दिन ‘माँ दुर्गा’ क्यों नहीं ??

दसवें दिन ‘माँ दुर्गा’ क्यों नहीं ?? हर बार नवरात्र समाप्त होते ही दसवें दिन ‘श्रीराम’ एक नायक के रूप में उभरकर सामने आते हैं, और ‘रावण’ खलनायक के रूप में पेश किया जाता है। विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी देखा जाता है। मैंने शायद एक-दो बार ही रावण…

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बड़े घर की बेटी

बड़े घर की बेटी भारतीय समाज में भारतीय संस्कारों को सही स्वरूप में जन मानस के समक्ष लाने में मुंशी प्रेमचंद के अवदान को हम “मील का पत्थर” मानते हैं । उनका साहित्य उस आम समाज की कहानी कहता है जो रहता तो हर काल में है परन्तु उसे कलम बद्ध करना अपनी जिम्मेदारी समझी…

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मैं ख़ुद ही हूँ एक गुलाब

मैं ख़ुद ही हूँ एक गुलाब प्रतीक्षा तो थी मिलेगा मुझे भी गुलाब मन मसोस कर रह गयी जब बिन कुछ कहे चले गए वो, मायूस हो जा खड़ी हुई आईने के सामने क्या सचमुच उम्र हो चली अब ? क्या नहीं हक़ एक गुलाब का भी ? तभी आई अंतस से आवाज़ न हो…

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ऊँची उड़ान को मिले पंख

ऊँची उड़ान को मिले पंख न्यू यॉर्क से दिल्ली तक की फ्लाइट ने दोनों का बुरा हाल कर दिया था और अब जेट लेग की समस्या से भी जूझना था । एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही डीज़ल के धुएँ से भरी गर्म हवा और कानफोड़ू हॉर्न ने स्वागत किया । टैक्सी लेकर दोनों एरोसिटी के…

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हां मैं प्रेम में हूं

हां मैं प्रेम में हूं प्रेम में हूँ..! हां मैं प्रेम में हूं..! स्वयं के..! और लगता मुझे… ये सारा संसार है प्रेममय…! शबनमी रेशमी एक सूत.. एक धागा महीन सा..! जुड़ता जोड़ता… रूहों की खुशबूओं से.. रूहों को… और रूहानियत से.. सराबोर ये ब्रम्हांड…! कल कल करता झरने सा…! अकूत स्तोत्र के खजानों संग……

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मौसी

मौसी मैं ‘आल इंडिया ओरिएण्टल कांफ्रेंस’ में शिरकत करने कश्मीर गई हुई थी।उस दिव्य प्रदेश का अवलोकन कर मैं अचरज में थी कि इतना मनोरम दृश्य ! वास्तव में इसे धरती का स्वर्ग कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा। यह तो ख्वाब से भी बढ़ कर है। मैं ऐसा अनुभव कर रही थी, जैसे स्वप्न देख…

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