सोशल डिस्टेंसिंग और सोशल नेटवर्किंग

सोशल डिस्टेंसिंग और सोशल नेटवर्किंग वैश्विक बीमारी कॉरोना ने आज विश्व की तमाम जनसंख्या को घर की चारदिवारी में क़ैद करवा दिया है । ” सोशल डिस्टेंसिंग ” आम बोलचाल का शब्द हो गया है , जिसका अर्थ भी सबको समझ में आ रहा है । समाज में पिछले कुछ वर्षों के प्रचलन पर ध्यान…

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मेरी मुट्ठी में आसमां

मेरी मुट्ठी में आसमां आज जब मैं महिला सशक्तिकरण की बातें सुनती हूं तो सोचने लग जाती हूँ कि मैं कितनी सशक्त हूँ , यह समाज की महिलाएं कितनी सशक्त हैं l हम एक आधुनिक दौर में जी रहे हैं, जहां शिक्षा, सुख सुविधाएं, समाज का प्रोत्साहन सभी कुछ हम स्त्रियों को मिल रहा है…

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द्विचाली

द्विचाली उठ जाग मुसाफिर भोर भयो अब रैन कहाँ जो सोवत है………खर्र खरर्र इसी गाने को गुनगुनाते हुए शिक्षिका सावित्री शीक के झाड़ू से झाड़ू लगा रही थी जहाँ उसके साथ संगत कर रहे थे शीक के झाड़ू की खरर्र खर्र चिड़ये चुनमुन की चहचहाहट और खेतों की ओर जाते गोधन की टनर् टनर् घंटी।…

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डेटिंग द ऐरा ऑफ़ लार्ड राम

डेटिंग द ऐरा ऑफ़ लार्ड राम (Dating the Era Of Lord Ram) मुझे याद है अक्टूबर 1991 का वो दिन जब मुझे पता चला कि मै गुर्दे के कैंसर से पीड़ित हूँ।एक सप्ताह के अंदर ही मेरा दांया गुर्दा ऑपरेशन के जरिए निकाल दिया गया।अपेक्षाओं के विपरीत विषाद की यह केवल शुरुआत भर थी। पांच…

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Contrasting Natural Calamities Situations of Assam & Afghanistan

Contrasting Natural Calamities Situations of Assam & Afghanistan A natural calamity or a disaster is a major event of adverse nature resulting from natural happeings, such as earthquakes,floods,cyclones,landslides,hurricanes, volcanic eruptions,wildfires etc which impact community at large and also make an area more vulnerable for a certain period. According to International Federation of Red Cross and…

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कोरोना कोंस्पिरेसी

कोरोना कोंस्पिरेसी किसी बात को ठीक से समझने के लिए उसकी पृष्ठभूमि को समझना आवश्यक होता है | चीन से शुरू हुई इस वैश्विक महामारी को समझने के लिए भी उसकी पृष्ठभूमि जानना जरूरी है कि वह कब कैसे और किन परिस्थितियों में शुरू हुई | नवम्बर दिसम्बर 2019 में दो महत्वपूर्ण खबरें थी जिसे…

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मुक्तिधन

मुक्तिधन प्रेमचंद की हर कहानी अपने आप में बेजोड़ है। कोई न कोई सामाजिक संदेश उसमें छिपा ही होता है। लेकिन पिछले बरस भिन्न-भिन्न समुदाय के लोगों के गौमांस खाने संबंधी स्वीकारोक्तियों पर हिंदुस्तान जितना उबलता जाता था, मुंशी प्रेमचंद की लिखी ‘मुक्तिधन’ कहानी मेरे दिल को उतना ही ज्यादा याद आती गई । इस…

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“मातृभाषा हिंदी”

“मातृभाषा हिंदी” “वर्तमान समय में प्रायः सब हिंग्लिश बोलते हिंदी के एक वाक्य में तीन चार शब्द अंग्रेजी के होते हैं आपसी मिलाप तो संस्कृति हमारी हिंदी ने भी अंग्रेजी से मेलजोल स्वीकारी मुश्किल फिर भी आई भारी अंग्रेजी स्कूल और नेटफ्लिक्स ने और हालत बिगाड़ी बच्चे अब दादा दादी से नहीं बतियाते क्योंकि अब…

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ममता कालिया से सन्दीप तोमर की साहित्यिक चर्चा

ममता कालिया से सन्दीप तोमर की साहित्यिक चर्चा ममता कालिया हिंदी साहित्य की प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। वे कहानी, नाटक, उपन्यास, निबंध, कविता जैसी अनेक साहित्यिक विधाओं में बराबर दखल रखती हैं। हिन्दी कहानी के परिदृश्य पर उनकी उपस्थिति सातवें दशक से निरन्तर बनी हुई है। लगभग आधी सदी के काल खण्ड में उन्होंने 200…

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हामिद के बहाने आज का विद्रूप समाज !

हामिद के बहाने आज का विद्रूप समाज !! जब भी टी वी पर मैं हवेल्स केबल का विज्ञापन देखता हूँ, जिसमे माँ का हाँथ रात का खाना(रोटी) बनाने के क्रम में जलने जैसा होता है, और पास ही खाने के लिए बैठा एक नन्हा सा बालक इसे देखता है….अनुभव करता है और अचानक उठ कर…

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