यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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“मातृभाषा हिंदी”

“मातृभाषा हिंदी” “वर्तमान समय में प्रायः सब हिंग्लिश बोलते हिंदी के एक वाक्य में तीन चार शब्द अंग्रेजी के होते हैं आपसी मिलाप तो संस्कृति हमारी हिंदी ने भी अंग्रेजी से मेलजोल स्वीकारी मुश्किल फिर भी आई भारी अंग्रेजी स्कूल और नेटफ्लिक्स ने और हालत बिगाड़ी बच्चे अब दादा दादी से नहीं बतियाते क्योंकि अब…

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साँझ

साँझ गाड़ी तेजी से पटना से राजगीर की ओर बढ़ रही थी। हल्की बूंदा-बांदी शुरू हो गई थी। आषाढ़ का महीना चढ़ा ही था। मोना सुबह आठ बजे पति राजेश के साथ घर से निकली थी। राजेश को ऑफिस के कार्य से वहाँ तीन दिनों के लिए रूकना था। मोना की एक सहेली रीना राजगीर…

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Invocation

Invocation To You, Our Lady of life The distinct You bridge the hearts of our world You deceive the sun not to set to offer a heavenly embrace Generously you endure the pain Wisely You dominate bright horizons Your tears become earth’s breath Your hands are solid rocks You scatter clouds in your passage Oh,…

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जीवनशैली में बदलाव -कोविड19

जीवन शैली में बदलाव- कोविड 19 यदि हम गूगल में खोजें कि कोरोना वायरस क्या है, इसकी उत्पत्ति कहाँ से हुई, इसका संक्रमण कैसे होता है, संक्रमण को कैसे रोका जा सकता है, फलां फलां तो पलभर में इन सबके जवाब हमें मिल जाएँगे लेकिन यदि हम खोजें कि कोरोना संक्रमण कब रुकेगी, दुनिया कब…

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वेलेनटाईन-डे और करफ़्यू

वेलेनटाईन-डे और करफ़्यू आज वेलेनटाईन-डे के अवसर पर भावनाओं में महकती है भीनी भीनी ख़ुशबू जिस्म-व-जान में दोड़ती है एक मदहोश लहर आत्मा के झरोखों से आने लगती है स्वर्ग की सुगन्धित पवन इस दिन की प्रतीक्षा थी पूरे वर्ष कि मिलन का अवसर मिल जाए किसी रेस्टुरां के काफ़ी टेबल पर खोल देते हम…

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फागुन आया

फागुन आया मह-मह मंजर महुआ ले फागुन आया सखि, फिर बागों में वसंत हुलसाया! धानी चादर ओढ़ कहीं मटर सेम गदराया सखि,फिर बागों में वसंत हरषाया!! पीक कूक डाली-डाली बेदर्द दर्द सुलगाया हे सखि, फिर से वसंत भरमाया!! पीली सरसों,मदभरे नयन करता नर्तन संग पवन मन मदन राग यह गाया सखि,फिर हिय मध्य वसंत कुछ…

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भई अपनी तो बस अब हो ली !!

भई अपनी तो बस अब हो ली !! धूल उड़ाना रंग लगाना धमाचौकड़ी खूब मचाना , रंगो से भरी पिचकारी से अपनों गैरों को रंग जाना, अब कहां वो बेफिक्री के रंग कहां अब दिल के हमजोली, अब कहां वो बचपन की होली वो मस्तीखोरी वो हंसी -ठिठोली!! मां के हाथ के वो दही बड़े…

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जन्मजात शासिका- कैथरीन द ग्रेट ऑफ़ रसिया

जन्मजात शासिका- कैथरीन द ग्रेट ऑफ़ रसिया “कैथरीन द ग्रेट” के नाम से जानी जाने वाली,रूस की सबसे अधिक प्रसिद्ध तथा सर्वाधिक समय तक शासन करने वाली साम्राज्ञी थी कैथरीन! उसने 9 जुलाई 1762 से लेकर मृत्यु पर्यन्त शासन किया। उसका शासनकाल “रूस का स्वर्णयुग” कहलाता है। कैथरीन द्वितीय का जन्म प्रुसिया में हुआ था।…

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