रोज डे

रोज डे लखिया अनमना सा कॉलेज के सामने से गुजर रहा था … दो लडकियो ने हाथ दिया गांधी चौक कहते हुए रिक्शा में बैठ गई | लखिया ने उसी सवारी से सुना आज रोज डे है ,, एक एक लाल गुलाब दोनों के हाथ में थे ,, एक दूसरी से बतिया रही थी ,,…

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छठ महापर्व: बिहार में क्यों?

छठ महापर्व: बिहार में क्यों? वैदिककालीन मध्य भारतवर्ष के कीकट प्रदेश में गयासुर नामक एक दानव रहता था| वह भगवान विष्णु का उपासक था| गयासुर की काया भीमकाय थी| कहते हैं कि, जब गयासुर पृथ्वी पर लेटता था, उसका सर उत्तरी भारत में होता तथा उसके पैर आंध्र क्षेत्र में होते थे| सबसे महत्वपूर्ण यह…

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भारतीय संविधान और टी.टी. कृष्णामाचारी

भारतीय संविधान और टी.टी. कृष्णामाचारी टी.टी. कृष्णामाचारी का प्रारंभिक जीवन हमारा देश सन् 1947 में अंग्रेज़ों की अधीनता से स्वतंत्र हुआ। तब विविधताओं से सम्पन्न भारत के शासन संचालन के लिए एक सुव्यवस्थित शासन प्रणाली की आवश्यकता थी। इसी उद्देश्य से भारत के संविधान के निर्माण की आवश्यकता महसूस की गई। संविधान निर्माण के लिए…

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आदित्यपुर में बदलता पर्यावरण और हम

आदित्यपुर में बदलता पर्यावरण और हम झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड में आदित्यपुर क्षेत्र आता है l बीसवीं सदी तक आदित्यपुर में गाँव का वजूद मौजूद था l पेड़-पौधे थे, हरियाली थी और साफ-सुथरे जल स्त्रोत मौजूद थेl वर्तमान समय में आधुनिकीकरण और औद्योगिकीकरण की अंधी दौड़ में यह सब कुछ धूमिल…

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विश्व स्वास्थ्य दिवस और हम

विश्व स्वास्थ्य दिवस और हम आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है।इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस के प्रभाव से जूझ रही है, ऐसे में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। आज ही के दिन साल 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना हुई थी।विश्व स्वास्थ्य संगठन, जिसे डब्ल्यूएचओ (WHO)के नाम से जाना जाता…

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रिश्तों की रेखा

रिश्तों की रेखा   “मेम साहिब,आप के जाने के बाद जाने कौन आयेगा इस बंगले में?” बिजया ने काँच के गिलासों को अख़बार में लपेटते हुए कहा था। बिजया की बात सुन कर याद आया बस एक हफ़्ता ही तो रह गया है हमारा असम में। आलोक का तबादला दिल्ली हो गया था। “बिजया मौसी,…

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बदलाव बचाव के लिए

बदलाव बचाव के लिए हर जगह कोरोना वायरस का ही नाम है। इसकी अभी कोई भी दवाई नहीं इजाद की गई है ।पहले भी वायरस हुआ करते थे। कुछ मजबूत वायरस जैसे कि चिकन पॉक्स और पोलियो की हुए हैं जिन्हें खत्म करने में सालों लग गए और उनकी वैक्सीनेशन तैयार हो पाई। इसी तरह…

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एक खत मेरे डैडी के नाम

एक खत मेरे डैडी के नाम लोग कह रहें हैं आज पिता दिवस है आज बेशक आप हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं आप तना बन कर रहे मेरे जीवन वृक्ष का वो सुबह पार्क से चमेली के फूलों को तोड कर लाना और मेरे सिराहाने रख उनकी खुशबू मुझे जागने पर मजबूर कर देना…

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प्रथम गुरु – मां

गुरु पूर्णिमा विशेष प्रथम गुरु – मां मां तुम मेरी प्रथम गुरु हो तुमने ही मुझे पढ़ाया है तुमने ही सुख दुख में मुझको जीवन का सार बताया है, करूं वर्णन कैसे तेरी महिमा का मेरी नींव है तुम पर टिकी हुई जीवन में हर एक रिश्ते की पहचान तुम्हीं से मिली हुई तुमने ही…

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