श्रेया

श्रेया   ऑफिस से लौटकर श्रेया कमरे में अपनी बैग रखने गई । अनायास ही उसकी नज़र दीवार पर टँगी नानी की तस्वीर पर गई।श्रेया के जीवन में नानी की अहमियत बहुत थी । या यूँ कहें कि नानी उसकी सब कुछ थी।तस्वीर को देख श्रेया की आँखों से अविरल आँसू बहने लगे ।  …

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माँ का मातृत्व

माँ का मातृत्व नौ महीने गर्भ से हो जाता सफर शुरू माँ का फिर जन्म देते ही उसकी सारी दुनिया घूमती सिर्फ अपने बच्चे के ही इर्द गिर्द हर आँसू, हर दर्द, हर दुःख हर तकलीफ बन जाती उसकी छोटी अपने बच्चे की मुस्कान के आगे माँ का मातृत्व ही कुछ ऐसा है जिसका न…

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दिनकर जी की जयंती पर विशेष

दिनकर जी की जयंती पर विशेष हिंदी में दिनकर-काव्य की राष्ट्रीयता अथवा राष्ट्रीय चेतना पर विद्वानों और शोधकर्ताओं ने विविध कोणों से प्रकाश डाला है। लेकिन इस राष्ट्रीय चेतना की आधारभूमि उनकी युग चेतना का मूल्यांकन कभी भी गंभीर विवेचना का विषय नहीं बनाया गया।इस युग चेतना की व्याख्या, परिज्ञान और मूल्यांकन के बिना राष्ट्रीय…

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मन मंदिर में बस गए राम

मन मंदिर में बस गए राम अयोध्या में आयी पुण्य बेला, साकार हुई जो बसी छवि। दिशाएं सुरभित, देव मगन, विस्मित, हर्षित है आज रवि। भक्तों के सपने आकार ले रहे, पीयूषवन्त छवि नयनाभिराम। मन मंदिर में बस गए राम। लंबे संघर्ष का विकट काल, भूला नहीं रक्तिम इतिहास। प्राणों की आहुतियाँ पड़ी यहाँ, तब…

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नारीशक्ति बनाम नारीवाद

नारीशक्ति बनाम नारीवाद दुनिया की आधी आबादी स्त्री;सृजन की स्वामिनी, सृष्टि की सारथी ,पृथ्वी सी पोषिका, हवा सी जीवनदायिनी ,महक की भाँति मनाहाल्दिका, सुमन की तरह सौंदर्यसम, हरियाली की भाँति हर्षिका, वर्षा की तरह नवजीवनवर्धिका परंतु कालक्रम में कई बार और कितनी जगह विसंगतियों के समक्ष खड़ी। “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता:” कई जगह…

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गर्मियों में सही खानपान

गर्मियों में सही खानपान गर्मी का मौसम चल रहा हैं इसलिए अपने खानपान का पूरा ध्यान जरूर रखें. आपका भोजन या आहार ऐसा होना चाहिए जो आपके शरीर को ठंडा रखे, आसानी से पचे और आपके स्वस्थ को ठीक रखें. शुद्ध और संतुलित आहार लेने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, पाचन क्रिया बढ़िया…

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प्रतीक्षा

    प्रतीक्षा     आभास पाकर धुंधली छवि का आकार लेता प्रिय रूप तुम्हारा द्वार की ओट से ताकती अपलक हर पल रहता है इंतजार तुम्हारा।   क्यों झेलती मैं विरह की व्यथा? जब बसे हो हृदय में कमल बन रोक लेती मैं तुम्हें आवाज देकर बस देख लेते गर तुम पलटकर।   प्राण…

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महामारी में भी ओछी राजनीति

महामारी में भी ओछी राजनीति एक बड़े शायर का शेर है लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे, पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे। उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद, और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।। महाभारत काल में अखंड भारत के मुख्यत: 16 महाजनपदों कुरु, पंचाल, शूरसेन,…

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वजूद

वजूद सच में! आज का दिन ही खूबसूरत था, चमचमाता सूरज, ताज़ी हवा, चहकते पंछी, सुबह सुबह चाय पीकर, जल्दी से नहाने चल दी ‘किरण’। आज कुछ जल्दी भी उठ गई वह या यूं कहो की रात बस करवट बदल बदल कर काटी। आज उसके काम का पहला दिन था कितना कुछ चल रहा था…

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वन्दें मातरम् 

वन्दें मातरम्  _____________________________________ आओ बच्चों तुम्हें सिखाएं जीवन है श्रमदान की माँ भारती की मिट्टी है मिट्टी है बलिदान की वन्दें मातरम् वन्दें मातरम् पावन पुण्य प्रेम धरा है अन्न धन से पूर्ण भरा है माँ भारती की रक्षा करना रक्षा गृह किसान की वन्दें मातरम् वन्दे मातरम् लहरों पर कश्ती खेना तुफ़ा दीया जला…

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