भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- राजा राम मोहन राय

नवजागरण युग के पितामह- राजा राम मोहन राय राजा राम मोहन राय 18 वी सदी के महापुरुष,आधुनिक समाज के जन्मदाता,ब्रह्म समाज के संस्थापक,देश को जगाने वाले स्वतंत्रता सेनानी,बहुआयामी समाज सेवी, भारत भाषायी प्रेस प्रवर्तक तथा बंगाल के नवजागरण युग के पितामह। स्वर्गीय राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 को राधा नगर जिला मुर्शिदाबाद,…

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एक दूजे के लिए

प्र.-  शादी के बाद कितनी बदली आप लोगों की जिंदगी???  उ.- शादी के बाद कुछ परिवर्तन आतें तो है परंतु हम दोनों एक दूसरे से पहले से परिचित थे और परिवार भी बहुत अच्छा और प्रेम करने वाला रहा इसलिये ज्यादा मुश्किलें नही आयी। दोनों ही परिवारों में मैं सबसे छोटी थी इसलिये मुझपर किसी…

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माँ शारदे वर दे

माँ शारदे वर दे तिल तिल तमस सम, तड़पते मनुज को, हिम कण सम शीतल, ज्ञान तुषार की रौ दे, माँ शारदे वर दे।। अशांत अधीर, अवसादित जड़ को , सागर के लहरों सी, उल्लासित चेतन कर दे, माँ शारदे वर दे ।। क्या ये गलत है ? क्या ये सही है? इसी दोराहे पर…

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रचना उनियाल की कविताएं

रचना उनियाल की कविताएं १.संकल्पों की निष्ठाओं के भू नंदनवन के सौरभ से ,सकल जगत महकायेंगे। संकल्पों की निष्ठाओं के ,पुष्प धरा खिल जायेंगे।। विगत काल की रेखाओं पर ,हम नव रेखा खींचेंगे। सदियों के माता गौरव को ,कण कण में अब सीचेंगे।। शाश्वत संस्कारों की जय को ,जन मन तक पहुँचायेंगे। संकल्पों की निष्ठाओं…

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रोबोट

रोबोट इस आधुनिक शिक्षा प्रणाली ने बच्चों को रोबोट बना दिया हैं।नन्हें-नन्हे कंधों पर भारी बस्तें और स्कूल से आते ही कोंचिग जाने की तैयारी,वहां से आकर होमवर्क के बाद जल्दी सुलाने की कवायद। अपने छोटे से पोते-पोती की दिनचर्या देखकर सविता मन ही मन कुढ़ती और बच्चों पर बेहद तरस आता। लेकिन कुछ कह…

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अयोध्या- आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत

अयोध्या- आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत किसी भी देश की सभ्यता और संस्कृति उस देश की ऐतिहासिक प्रगति का आईना होती है।देश की सभ्यता और संस्कृति निर्मित होती है उसकी खास भूमि पर जिये गये खास व्यवहारों से,जो वहाँ पर रहने वाले लोगों द्वारा क्रियान्वित की जाती है।किसी भी भूमि पर उसके निवासियों द्वारा जब नैतिकता…

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हिन्दी और हम

हिन्दी और हम आज हिंदी दिवस है, इस दिन भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी गयी हिंदी भाषा को भारतीय गणराज्य की राजभाषा घोषित किया था। हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए तत्कालीन भारतीय सरकार ने प्रतिवर्ष १४ सितम्बर,१९४९ को हिंदी दिवस के रूप में मनाने का अनुरोध किया था। वर्ष…

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राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी

राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी शर्मसार हैं हम बापू , अंधे ,बहरे और गूँगे बन कर ही रह गए , क्याें न पड़ा हमारे कानों में किसान, मज़दूर और दलित का क्रंदन, क्याें न हम देख पाए निम्न वर्ग का शोषण, क्याें न हमने आवाज़ उठाई अत्याचार के ख़िलाफ़, क्याें हम सुषुप्ति में डूबे रहे बेख़बर,…

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वास्तविक आजादी से दूर

  वास्तविक आजादी से दूर हम भारतवासी पिछले 70 वर्षों से आज़ादी की खुशफ़हमी में जरूर जी रहे हैं, परन्तु क्या वास्तव में हम स्वछन्द, स्वतन्त्र और निर्भीक जीवन बिता पा रहे हैं। आज भी देश का एक बड़ा वर्ग जीवन के मूलभूत आवश्यकताओं, जैसे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्याप्त सन्तुलित आहार इत्यादि से भी वंचित है।…

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मानवता की सेवा में सन्नद्ध–कर्मवीरों के नाम

मानवता की सेवा में सन्नद्ध–कर्मवीरों के नाम है नमन तुम्हे मानवता हित जीवन अर्पित करने वालों सेवा से संकट मोचक बन हमको गर्वित करने वालों हर जंग जहां जीती हमने दुश्मन को धूल चटाई है संक्रामकता -निशिचर के दमन की कसम उठाई है है नमन तुम्हे खतरों से भी आंधी बन टकराने वालों है नमन…

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