ओह, पुरुष क्या तुम नहीं जानते?

ओह,पुरुष “ओह, पुरुष क्या तुम नहीं जानते?” ओह, पुरुष क्या तुम सुनते नहीं हो, तुम्हारी पत्नी कई आँसू रो रही है! ओह, पुरुष क्या तुम देखते नहीं हो तुम्हारी पत्नी कई डर छुपा रही है! ओह, पुरुष क्या तुम्हें महसूस नहीं हो रहा तुम्हारी  पत्नी सुरक्षा के लिए तरस रही है! ओह, पुरुष क्या तुम्हें…

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स्त्री मूर्ति नहीं है

“स्त्री मूर्ति नहीं है “ हर रोज कई सवाल कई नजरों के बीच से गुजरती है निर्भयाएं । कहीं बचतीं हैं नजरों और सवालों से , कहीं लड़तीं हैं नजर और सवालों से , निर्भयाएं हर रोज लड़तीं हैं एक युद्ध अपनी पहचान के लिए । ऐसा युद्ध जहाँ सीधे रास्ते भी जाने क्यों बार-बार…

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चेहरा बनाये बेदाग

चेहरा बनाये बेदाग स्कीन पर किसी प्रकार का दाग केवल आपकी खुबसूरती पर ही दाग नहीं है बल्कि आपके आत्मविश्वास को भी कम करता है । साथ ही साथ यह मानसिक तनाव का कारण भी बन जाता है। लेकिन आज के इस आधुनिक युग में अब प्रत्येक प्रकार के दाग का इलाज संभव है। केवल…

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बचपन: उजला पक्ष

बचपन: उजला पक्ष उम्र के इस पड़ाव पर बचपन याद करना अच्छा लग रहा है। मेरा जन्म अपने बाबा के घर गोरखपुर में हुआ। हमारे बचपन में घर में खाने-पीने की सामग्री भरपूर होती थी मसलन दाल-चावल, आटा, दूध-दही मगर सजावट या प्रदर्शन के नाम पर कुछ नहीं था। हम बहुत अमीर नहीं थे पर…

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तीज के बहाने

तीज के बहाने तीज के बहाने स्त्रियां महीनों पहले से देखने लगती हैं पंचांग करनी होती हैं उसे कई तैयारियां नयी साड़ी, सिंदूर की डिब्बी, बिंदी, चुड़ियां और भी कई सुहाग की निशानियां तीज के बहाने बनाती है परम्परागत पकवान गुजिया ठेकुआ में मिलाती हैं अपने संस्कारों की मिठास फल फूल और पूजा सामग्री से…

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चलो, धरती को रहने योग्य बनाएँ

चलो, धरती को रहने योग्य बनाएँ प्रकृति और मनुष्य – दोनों जैसे न जाने कैसा लुका छिपी का खेल खेल रहे हैं। प्रकृति मनुष्य को बार-बार आगाह करती है और मनुष्य जैसे सब कुछ समझकर भी अनसुनी कर रहा है। पर्यावरण दिवस यानि कि 5 जून को हर वर्ष हम अपनी प्रतिज्ञा दोहराते हैं कि…

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डैडी होम

  डैडी होम दिशांत दौड़ता हुआ अस्पताल में आया और खून में लथपथ नवजात को आगे कर बोला “प्लीज इसे जल्दी भर्ती करिए, इसकी हालत बहुत खराब है, प्लीज सिस्टर!” नर्स ने बच्ची को लिया और तुरंत एन.आई.सीयू. में भर्ती कर लिया। वहां बच्ची का इलाज शुरु हुआ। दिशांत वहीं चहलकदमी कर रहा था। नर्स…

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स्वाद

स्वाद आज कोई खास बात है क्या? कोई भी घर से नहीं जा रहा हैं। इतने बजे तक तो बहू अलका, बेटा अरविंद और पोता अरुण चले ही जाते हैं। अलका टीचर है, बेटा आई.टी कंपनी में मैनेजर और अरुण आठवीं क्लास में। तो क्या आज सब घर में रहेंगे ?यह लॉकडाउन क्या है? मतलब…

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नैतिक शिक्षा की आवश्यकता

नैतिक शिक्षा की आवश्यकता भारत माता ग्राम वासिनी,आज आजादी के 70 साल बाद भी यह तस्वीर नही बदली है,आज भी गरीबों के आँसू को देख भारतमाता कराहती है ।अपने करोड़ों बच्चों के नग्न तन को देख क्षुब्ध होती है।कभी हमने गहराई से सोचा कि इतने दिनों बाद अपने ही शासन में भी क्यों हमारी स्थिति…

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डॉ जसबीर कौर की कविताएं

डॉ जसबीर कौर की कविताएं 1.नारियां मानवता का गौरव, वात्सल्य प्रेम सौरभ, सृजन की मृदुल परिभाषा हैं ये नारियां सहिष्णुता को निहित कर, शक्ति पराकाष्ठा बन अद्भुत करूणाकलित अभिलाषा हैं ये नारियां। मानवता का गौरव…..   जीवन सुरभित करें , प्रेम सानिध्य बन पीयूष शक्ति सी ,जग उत्थान करें नारियां ईश की ये प्रतिध्वनि, धर…

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