ग्रामीण संवेदनाओं का कुशल चितेरा मुंशी प्रेमचंद !!

ग्रामीण संवेदनाओं का कुशल चितेरा मुंशी प्रेमचंद !! साहित्य का उद्देश्य केवल लोगों को संदेश देना नहीं होता है। बल्कि श्रेष्ठ साहित्य तो अपने युग का जीता-जागता दस्तावेज होता है। उसमें उस कालखंड की समस्याओं, विशेषताओं, राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक परिस्थितियों का विशद वर्णन होता है जिसे पढ़ कर पाठकों की अन्तःचेतना में एक नई…

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कान्हा का मनका

कान्हा का मनका अब तो लौ लागी कान्हा, तेरे श्यामल श्री चरणों में । जन्म जन्म का साथ हमारा, युगों युगों की मेरी प्रीत। बना दे मुझे छोटा सा मनका, चुन ले मुझ को, जड़ ले मुझ को, अपनी रुनझुन पैजनियों में । अब तो लौ लागी कान्हा , तेरे श्यामल श्री चरणों में। औक़ात…

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अमिट छाप

अमिट छाप हिंदी के महान कहानीकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म काशी के समीप लमही नमक गांव में ३१ जुलाई १८८० को हुआ था।प्रेमचंद जी का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।८ वर्ष की उम्र में इनकी माता एवम् १६ वर्ष की उम्र में इनके पिताजी का देहांत होने से घर का…

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चलकर देखें

चलकर देखें   इरादा कर ही लिया जब कि चलते जाना है फिर जरूरी है क्या कि अँधेरे को हम डरकर देखें हौसला लेकर चलें हल की तरह कांधे पर जहाँ पर रौशनी का घर है वहाँ चलकर देखें कसैलेपन के लिए जिंदगी ही काफी है ये जरूरी नहीं कि हर बार हम मरकर देखें…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-ए पी जे अब्दुल कलाम

महामहिम अब्दुल कलाम— सपनों का सौदागर!   देश की स्वतंत्रयोत्तर समुन्नति की, विज्ञान के क्षेत्र के महानायक श्री अबुल पकीर जैनलुब्दीन अब्दुल कलाम साहब का नाम तक लेते हुए जबान लड़खड़ाती है और महानता देख गर्दन ऊँची हो जाती है। हिंदू पौराणिक कथाओं में स्वर्गाधिपति इंद्र की कथाएँ प्रसिद्ध है। इंद्र ऐसा पद है जो…

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तुम मेरे पास हो …हमेशा!

माँ, तुम हो यहीं कहीं,..मेरे आसपास, भींगी पलकें जब यादों का सहारा चाहती हैं, तुम तब भी -मेरे साथ होती हो ..माँ, जैसे मैं तुम्हें छू सकती हूँ, महसूस कर सकती हूँ– ”तुम्हारे कदमों क़ि आहट, जब ये अधर कुछ्फरियाद करते हैं, तो जैसे.. तुम सुनती हो मेरी आवाज, बिन कहे मान लेती हो, मेरी…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन  मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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हम स्वतंत्र हैं

हम स्वतंत्र हैं हम स्वतंत्र हैं…. क्योंकि….. प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस…. हर्षोल्लास से मना रहे हैं। सड़कें गड्ढों से पटी पड़ी तो क्या??? रेल-बस ठसाठस भरी हुई तो क्या??? बुलेट ट्रेन तो आ रही है हम स्वतंत्र हैं… गरीबी, अशिक्षा, मंहगाई अब बहुरूपिये हो चले, सरकारी आंकड़ों में… नज़र ना आएंगे… वैसे यत्र-तत्र-सर्वत्र नज़र ही नज़र…

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बदला सावन

बदला सावन इस बार सावन, कुछ बदला-बदला है। ना उमंग है,ना तरंग है। लागे सब देखो वेरंग है। चारों ओर हाहाकार मचा है। मुँह खोल बिकराल खड़ा है इस बार सावन, कुछ बदला बदला है। बगियाँ फूलों से भरी, पर सूनी-सूनी हैं। ताल-तलैया तृप्त हुऐ, पर प्यासी-प्यासी हैं। इस बार सावन, कुछ बदला-बदला हैं। काले-काले…

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