कोविड -19 और गर्भवती स्त्री

कोविड -19 और गर्भवती स्त्री आज कोविड-19 ने पूरे विश्व को अपने चपेट में ले लिया है । विश्व में बढ़ते हुए संक्रमण को संभालने और इलाज करनें के लिए हर स्तर पर विस्तार से कार्य हो रहें हैं। इस वायरस के तीव्रता को मेडिकल सेवा और रिसर्च में लगें, हर क्षेत्र के चिकित्सकगण और…

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चाँद जाने कहाँ खो गया

चाँद जाने कहाँ खो गया ग़ुल खिले और कलियाँ हँसीं,बाग फिर ये जवां हो गया तितलियों की जो देखी अदा भँवरों को फ़िर नशा हो गया तेरे होठों ने कुछ न कहा , मुझसे भी तो कहा ना गया। क़िस्सा तेरे मेरे इश्क़ का ख़ुद ब ख़ुद ही बयां हो गया।। एक अहसान मुझ पे…

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बूढ़ी काकी

बूढ़ी काकी हिंदी कहानीकारों में मुंशी प्रेमचंद जी का प्रमुख स्थान है। उनकी कहानियां निम्न वर्ग को दर्शाती है। मानव समाज और जीवन के यथार्थ को दिखाना है उनकी कहानियों को विशेष बना देता है ।उनकी सभी कहानियां मर्मस्पर्शी है पर मुझे उनकी कहानी “बूढ़ी काकी” बहुत पसंद है। यह सामाजिक समस्या पर केंद्रित उत्सुकता…

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जिंदगी एक एवरेस्ट है

  जिंदगी एक एवरेस्ट है एवरेस्ट के शिखर पर फतह पाने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल ,सही महिलाओं के लिए एक आदर्श व प्रेरणास्रोत हैं। उनके अचीवमेंट के पीछे उनका निरंतर संघर्ष, प्रयास, मेहनत, लगन और चुनौतियों का सामना पूरे आत्मविश्वास और साहस के करने की प्रकृति के कारण ही संभव हो पाया है…

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मदर्स डे पर मेरी मां

मदर्स डे पर मेरी मां मातृ दिवस के अवसर पर मेरे पुत्रों ने अपनी मां का सम्मान करने का आयोजन कियाl पत्रकार पुत्र सतेंद्र, कुमार, पुत्र अमरेंद्र के साथ खड़ी थी बहु हे- रूपा, रिंकी, रानी, अपूर्वा, पोता शिवम, आशुतोष, पोती मुस्कान, वैष्णवी, छोटा पोता श्याम, अभिराज तथा अभिनंदन और बीच में उनकी दादी दमयंती…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- राम प्रसाद बिस्मिल

राम प्रसाद बिस्मिल सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बाजूए-कातिल में है इन पंक्तियों को आत्मा में उतार कर कोई जिया हो तो वे हैं राम प्रसाद बिस्मिल। भले ऐसा समझा जाता है इनके रचयिता वास्तव में बिस्मिल अजिमाबादी थे। ११जून १८९७ को शाहजहाँपुर गाँव में पंडित मुरलीधर और…

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हमारी लड़ाई

हमारी लड़ाई नर्स आकर जब कुलवंती के कान में यह कहने लगी तो कुलवंती को मूर्छा आ गई| उसका पूरा शरीर कांपने लगा| … “यह क्या हुआ” कहते हुए वह थहरा कर बैठ गई | कुलवंती को दांत लग गया| नर्स अपना पूरा जोर लगा कर कुलवंती को पकड़ कर सामने पड़े ओसारे के पर…

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सपनों का भारत

” सपनो का भारत “ हो न अमन की कमी इस जहां में मिलजुल सब रहें इस जहां में हर विस्थापितों को मिले आशियाना रहे अनाथ ना कोई इस जहां में आतंकी के आतंक का हो खात्मा उन्हें भी प्यार मिले इस जहां में बागों में खिले हर इक कली कहीं कुम्भला न जाए इस…

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बड़े घर की बेटी

बड़े घर की बेटी भारतीय समाज में भारतीय संस्कारों को सही स्वरूप में जन मानस के समक्ष लाने में मुंशी प्रेमचंद के अवदान को हम “मील का पत्थर” मानते हैं । उनका साहित्य उस आम समाज की कहानी कहता है जो रहता तो हर काल में है परन्तु उसे कलम बद्ध करना अपनी जिम्मेदारी समझी…

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