नयी दिशा

नयी दिशा धूप-गुगुल के सुगंध से सुवासित और स्त्रियों के शुभ मंगल गान से गुंजायमान था हरिपुर गांव का वातावरण। लाल-पीली साड़ियों में स्त्रियाँ, धोती-कुर्ते में पुरुष और रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चे-बच्चियाँ उत्सव सा माहौल बना रहे थे,उनके परिधान सुख-समृद्धि की गवाही दे रहे थे।सब के चेहरे से संतुष्टि और खुशी झलक रही थी।अवसर…

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भूखा दर्द

भूखा दर्द हरामजादी…कुतिया.. जन्मते बप्पो खयलिं तहियो तोर भुख्हे खतम नाय होलो-कजरिया के पीठ पर ताबड़-तोड़ धौल जमाती परवतिया तो जैसे पागल हुई जा रही थी। माँ के इस व्यवहार से हतप्रभ कजरिया को जैसे साँप सूंघ गया।नज़रे उठाकर कातर निगाह से माँ को देखने लगी जो इस समय किसी रणचंडी से कम नहीं लग…

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नवगीत की सशक्त हस्ताक्षर- शांति सुमन

नवगीत की सशक्त हस्ताक्षर- शांति सुमन जिनका व्यक्तित्व सुगंधित फूलों का बगीचा है, जिनकी शाब्दिक अभिव्यक्ति में शांति का संदेश है, जिनकी कलम किसी अदृश्य को सदृश्य से जोड़ती है, जिनकी भावाभिव्यक्ति में उन्मुक्त कंठ की जादूगरी है , जिनके शब्दों में खो जाता है सुनने वाले का मन ऐसे स्वनाम धन्य है आदरणीय शांति…

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ओ सितंबर

ओ सितंबर ओ सितंबर ! तुम आ ही गए. गुनगुनाते से कुछ छोटे होते दिन और मीठी सी सिहरन वाली लंबी रात लिए. ठहरी हुई हवा एक भूला-सा नगमा सुना रही है. चिनार ने फिर बिखरा दी है एक सुनहरी चादर….. पत्तो के बदलते रंग जैसी ख्वाहिशें भी कुछ और अमीर हो गयी हैं. पेड़ो…

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बचपन: उजला पक्ष

बचपन: उजला पक्ष उम्र के इस पड़ाव पर बचपन याद करना अच्छा लग रहा है। मेरा जन्म अपने बाबा के घर गोरखपुर में हुआ। हमारे बचपन में घर में खाने-पीने की सामग्री भरपूर होती थी मसलन दाल-चावल, आटा, दूध-दही मगर सजावट या प्रदर्शन के नाम पर कुछ नहीं था। हम बहुत अमीर नहीं थे पर…

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My Christ

My Christ Turn your gaze to the world, to every living being in the Universe. Merciful to your children who, while asking for your help, Oh Christ, they continue to scourge You every day. Pitiful, suffering eyes, they beg man to change. My brother, listen: open your heart, it is my Christ who speaks to…

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शहादत

शहादत क्या कहें कैसे कहें ,कहने को कुछ रहा नहीं । माँ की लंबी तपस्या , बक्से में बंद रहा नहीं । बक्से में तन टुकड़ों में , आत्मा ब्रह्म लीन है । साधना सिद्धि तपस्या , देश धरोहर रहा नहीं । बस तिरंगा देखतीं हूं , लाल मेरा दहाड़ा नहीं । आस थी विश्वास…

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प्रेम कहानी

प्रेम कहानी प्रेम कहानी अपनी साजन कैसे तुम्हें बताऊँ रे। तू बैठे हो पास जो मेरे, मैं कुछ कह ना पाऊँ रे। नयना जो बतिआये साजन, अधरों से लग जाऊँ रे। मैं देखूँ जो दर्पण में तो, जाने क्यों शरमाऊँ रे। रहूँ अकेले में जो साजन, खुद से क्यों बतियाउँ रे। पता नहीं क्यों हुई…

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सुबह, दोपहर और शाम

सुबह, दोपहर और शाम दिसम्बर का अंतिम सप्ताह भारत के उत्तरी भाग में सिहरन, ठिठुरन, धूप की गर्मी, कम्बल और रजाई के मखमली अहसास और आग की तपन का होता है। और इसी महीने में आता है क्रिसमस का रंगीन त्यौहार। बाकी भारतीय पर्वों की तरह इसके दिन और महीने नहीं बदलते – यह हमेशा…

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