वो लड़का

वो लड़का वो लड़का जिसे मैंने बेहद करीब से जाना था, उसके संघर्षों की साक्षी रही हूँ, आज न्याय-व्यवस्था के शीर्ष पद पर शपथ ले रहा था। उसकी आँखों में खुशी और गम की बूँदे झलक रही थी। शपथ-कार्यक्रम में जो भी शामिल थे – करीबी, परिवार, दोस्त सभी उस पल के साक्षी थे। अगर…

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रूपांतर

रूपांतर सोचती है सारा काम निपटा कर ही जाए पर हो नहीं पाता उससे। बॉस के दिए फ़ाइलों की संख्या कम है पर बहुत कुछ निपटाना है उनमें। काम मिलता उसे ज़्यादा है, जानती है वह, क्योंकि ज़िम्मेदार है, कर्त्तव्यनिष्ठ है। हरिनारायण बॉस ज़रूर हैं पर उसका कष्ट समझते हैं समझाते भी हैं। एकल अभिभावक…

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बेटी और बैल

बेटी और बैल बिहार के बेगुसराय में एक गरीब किसान ने अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए अपने खेत और दो बैल बेच दिया- यह कल के राष्ट्रीय समाचार में था। उसे बाद उसके घर नेताओं की लाइन लग गयी, यह दिखने के लिए कि वो कितने सम्बद्ध हैं- उसकी गरीबी से और कितने प्रभावित…

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और भी है राहें

और भी है राहें आज सुबह नाश्ता करते हुए शालिनी माथुर सोच रही थी कि रेशमा अभी तक नहीं आई। पता नहीं क्या बात है?सुबह के नौ बज गए है।वो तो आठ बजे ही चली आती है।नहा कर मैंने नाश्ता भी कर लिया, पर रेशमा न जाने अभी तक क्यों नहीं आई ।दस बजे रेशमा…

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आवाज़ दो हम एक हैं !

आवाज़ दो हम एक हैं ! भौगोलिक सीमाओं से घिरे ज़मीन के टुकड़ों से सिर्फ देश निर्मित होते हैं। देश कोई भी हो, स्थायी नहीं होता। समय के साथ उसकी सीमाएं,उसका स्वरुप बनता और बिगड़ता रहता है। अपने ही देश का इतिहास देखिए तो इसका आकार और इसकी सीमाएं लगातार परिवर्तित होती रही हैं। असंख्य…

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बदलाव

बदलाव दीदी अस्पताल से घर आ गई हैं …चार कंधों पर सवार ..घर की दहलीज से कमरे तक का सफर भारी हो रहा है ,…कमरे का सन्नाटा अचानक महिलाओं .बच्चों के रुदन से गूंज उठा ,–आज घर की मालकिन .लक्ष्मी –चली गई ..पर अपने पीछे यादों का एक लम्बा काफिला छोड़ कर …घर -आंगन में…

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कालांतर में बौद्ध और जैन धर्मस्थली

कालांतर में बौद्ध और जैन धर्मस्थली अयोध्या एक अद्भुत विरासत जिसे प्रभु राम की नगरी के रूप में जाना जाता है। अयोध्या जिसके कण कण में राम समाये हुए हैं, वहां के लोगों के रोम रोम में राम निवास करते हैं। सनातनियों को अयोध्या अपने प्राणों से भी प्यारा है। सच कहूं, तो उन्हें ही…

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अमिट छाप

अमिट छाप हिंदी के महान कहानीकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म काशी के समीप लमही नमक गांव में ३१ जुलाई १८८० को हुआ था।प्रेमचंद जी का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।८ वर्ष की उम्र में इनकी माता एवम् १६ वर्ष की उम्र में इनके पिताजी का देहांत होने से घर का…

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