भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- डॉ बिधानचंद्र राय

भारत रत्न डॉ बिधान चंद्र राय  (चिकित्सक,स्वतंत्रता सेनानी समाज सेवी राष्ट्र निर्माता) डॉ बिधान चंद्र रॉय जी को  भारत और विश्व में एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी वरिष्ठ चिकित्सक, शिक्षाविद, निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी,कुशल राजनीतिज्ञ और प्रसिद्ध समाज सेवक के साथ-साथ आधुनिक भारत के राष्ट्र निर्माता  के रूप में बड़े ही श्रद्धा और सम्मान से स्मरण…

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“यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमन्ते  तत्र देवता”

“यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमन्ते  तत्र देवता” नारी के बिना इस सृष्टि की कल्पना करना संभव ही नही है। युवा हो या अधेड़ या हो वृद्ध। सभी पुरुषों को यह समझना जरूरी है। आज छोटी बच्चीयों से लेकर वृद्ध महिलाएं सुरक्षित नही है ,यह 21 वी सदी में रहते हुए भी बड़ी वेदना की बात है।…

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ममता कालिया से सन्दीप तोमर की साहित्यिक चर्चा

ममता कालिया से सन्दीप तोमर की साहित्यिक चर्चा ममता कालिया हिंदी साहित्य की प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। वे कहानी, नाटक, उपन्यास, निबंध, कविता जैसी अनेक साहित्यिक विधाओं में बराबर दखल रखती हैं। हिन्दी कहानी के परिदृश्य पर उनकी उपस्थिति सातवें दशक से निरन्तर बनी हुई है। लगभग आधी सदी के काल खण्ड में उन्होंने 200…

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मानव को आलोकित करता शिक्षक

मानव को आलोकित करता शिक्षक पं.श्रीकृष्ण चन्द्र झा का जन्म जमींदार परिवार में हुआ था।१० वर्ष के ही थे तो उनके पिता का देहान्त हो गया ।अल्प आयु के कारण सारे रिश्तेदारों ने सम्पत्ति हड़प लिये थे, जमींदारी भी छीन ली थी सरकार ने। भाइयों की देखभाल भी उन्हें ही करनी पड़ी थी। भाइयों को…

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रीता रानी की कविताएं

रीता रानी की कविताएं 1.अनुपात – समानुपात किसी भी शोक को सभी ने अपने-अपने पाव में नापा , प्रविष्ट हुए सब अपनी- अपनी खोह में , दुख की कालिमा को देखने के लिए । थोड़ी देर के लिए शोक समानुपातिक हो गया , इस तरह व्यक्तिगत होकर भी वह सार्वजनीन हो गया ।   समाज…

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कोरोना और मैं

कोरोना और मैं 12 अप्रैल 2021 को मैं कानपुर से एक मुशायरा कर के वापस आई ।कहीं भी जाने से पहले मैं अपनी माता जी को जरूर बता कर और उनका आशीर्वाद लेकर जाया करती हूँ पर उस दिन मुझे डर था ,कोरोना फैल चुका था और मुझे पक्का पता था कि मेरे मम्मी मुझे…

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श्रद्धांजलि

महान लोक-शिक्षक ……स्वामी विवेकानंद !! नव भारत का उदय होने दो। उसका उदय हल चलानेवाले किसानों की कुटिया से, मछुए, मोचियों और मेहतरों की झोपड़ियों से हो, बनिये की दुकान से, रोटी बेचने वाले की भट्ठी के पास से प्रकट हो। कारखानों, हाटों और बाजारों से वह निकले। वह नव भारत अमराइयों और जंगलों से,…

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मन मंदिर में बस गए राम

मन मंदिर में बस गए राम अयोध्या में आयी पुण्य बेला, साकार हुई जो बसी छवि। दिशाएं सुरभित, देव मगन, विस्मित, हर्षित है आज रवि। भक्तों के सपने आकार ले रहे, पीयूषवन्त छवि नयनाभिराम। मन मंदिर में बस गए राम। लंबे संघर्ष का विकट काल, भूला नहीं रक्तिम इतिहास। प्राणों की आहुतियाँ पड़ी यहाँ, तब…

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