गणतंत्र

गणतंत्र आज घर लौटते हुए शालिनी बहुत थकान महसूस कर रही थी। अगले दिन २६ जनवरी थी, इसलिए वो स्कूल में होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह के लिए बच्चों को तैयार कर रही थी। पांचवी कक्षा की क्लास टीचर होने के साथ साथ उस पर स्कूल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी जिम्मेदारी थी।…

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माँ

मां मां तो मां होती है, जननी जीवन देने वाली, बच्चों को वो सेने वाली। कठिन विकट पथपर भी, बच्चों के हित चलने वाली। मां तो मां होती है, मां तो बस मां होती है। बिना स्वार्थ सब कुछ करती, नयन नेह से दुख वो हरती। सबसे सुन्दर छवि है उसकी, खुशियों से दामन है…

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पटना विमेंस कॉलेज और मेरा क्रिकेट का खेल

पटना विमेंस कॉलेज और मेरा क्रिकेट का खेल साल १९७६: मैट्रिकुलेशन के रिजल्ट आ गए थे . मार्क्स बहुत अच्छे थे और लगता था पटना साइंस कॉलेज में एडमिशन हो जायेगा . घर में इसकी चर्चा थी. घर में लोग मुझे डॉक्टर का करियर चुनने की सलाह दे रहे थे.पहले से भी मेरे अपने चाचा…

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हमारी त्वचा

हमारी त्वचा स्वस्थ एवं सुंदर त्वचा, निखरा हुआ रंग हरेक की चाहत होती है। आइए पहले जानते हैं कि आखिर यह त्वचा है क्या? त्वचा शरीर का वाह्य आवरण है जिसे एपिडर्मिस भी कहते हैं। यह शरीर प्रणाली का सबसे बड़ा अंग है और उपकला उत्तक की कई परतों द्वारा बनता है ।अंतर्निहित मांसपेशियों, अस्थियों,…

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ये जंग भी हम जीतेगें

ये जंग भी हम जीतेगें क्या तुमने सोचा था कभी, कि ऐसा समय भी आएगा। ये कोरोना वायरस दुनिया को, अलग सा अनुभव दे जाएगा। पूजा की थाली ना होगी, बन्द होंगे पूजा के द्वार। मन्दिर में प्रसाद न होगा, होगी ना भक्तों की कतार। पिता का आँगन, माँ का खाना, मैके की बस रहेगी…

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छत से छाये पिता

छत से छाये पिता माँ के आशीष-फूल में तुम मनका से जड़ते रहे पिता मौसम की बौछारों में भी तुम छत से छाये रहे पिता रोके थे अपने दम-खम से दिन के सब झंझावातों को गिरने से बचा लिया हरदम तुमने सपनों के पातों को विपरीत दिशा से धूलों की रोकते रहते आँधियों को जगते…

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माँ! अब मैं जान गई हूँ

माँ! अब मैं जान गई हूँ नन्ही-सी मुन्नी उम्र में छोटी है तो क्या हुआ चौदह-पंद्रह साल की छोटी-सी उम्र में उसको प्यार,लड़ाई और गालीगलौज़ सब समझ आता है। दिल्ली की एक गन्दी बस्ती में छोटी-सी खोली है उनकी। उस खोली में रहने वाले पांच प्राणी, माँ-बाबा,मुन्नी और उसके दो छोटे भाई नंदू और छोटू|…

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नमन

नमन गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।। कहते हैं हमारा अहम और खुद की शंकाए ही हमें अपने गुरुजनों और अपनों के पास या करीब जाने से रोकती हैं। स्वतः हम इसके जिम्मेदार होते हैं। हमारे मन के अंदर का कचरा हम में इस क़दर भरा रहता हैं कि वह दूसरी अच्छी…

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‘सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ’

‘सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ’ सावन के मौसम में बड़े पैमाने पर वर्षा होती है जिसे मानसून कहा जाता है. “मानसून में तीन अलग-अलग कारक शामिल होते हैं – हवा, जमीन और समुद्र। मानसून का वर्णन प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। ऋग्वेद और सिलप्पाधीकरम, गाथासप्तशती , अर्थशास्त्र, मेघदूत, हर्षचरित्र जैसे…

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BASANT

BASANT (Spring)   Flowers during winter, Hide in earth’s cosy bed, Eager in summer for rebirth, Lifting their beautiful heads. Leaves and flowers, Just wait for the dark, wintry nights to go, And long bright sunny days to grow. Soon you see, in the months of, March April and May, Hazy mist and fog driven…

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