दिल का सूकुन

दिल का सूकुन दिल को सुकून देता है तेरा चांद सा मुखड़ा। बड़े भाई की जान है तू मम्मी पापा के जिगर का टुकड़ा।। बड़ी मिन्नत से तुमको पाया मां अंबे का आशीर्वाद है तू । सूने हमारे आंगन में छन छन पायल की आवाज है तू ।। तेरी बोली- मधुर रस की गोली कानों…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- रतन टाटा

रतन नवल टाटा “मैं सही निर्णय लेने में विश्वास नहीं करता। मैं निर्णय लेता हूं और फिर उन्हें सही करता हूँ।” – रतन टाटा भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण (2000) और पद्म विभूषण (2008) से सम्मानित रतन टाटा एक प्रसिद्ध भारतीय उद्योगपति हैं, जिन्होंने न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी ख्याति प्राप्त की…

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सुबह, दोपहर और शाम

सुबह, दोपहर और शाम दिसम्बर का अंतिम सप्ताह भारत के उत्तरी भाग में सिहरन, ठिठुरन, धूप की गर्मी, कम्बल और रजाई के मखमली अहसास और आग की तपन का होता है। और इसी महीने में आता है क्रिसमस का रंगीन त्यौहार। बाकी भारतीय पर्वों की तरह इसके दिन और महीने नहीं बदलते – यह हमेशा…

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COVID AND HEALTH

COVID AND HEALTH As the world continues to deal with the COVID-19 pandemic at least a third of the global population continues to find itself under a so-called ‘lockdown’, while others are having to follow some form of social distancing. While many countries are considering plans to lift restrictions in the coming months, this will…

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ऊंगली पकड़ कर तुमने….

ऊंगली पकड़ कर तुमने…. साठ के दशक में जन्‍में हम सब एक ऐसी बिरादरी का हिस्‍सा हैं, जो कि न बहुत पुरानी सोच के मोहताज हैं, और न ही बहुत नई तड़क-भड़क में विश्‍वास रखते हैं। और हमारी ऐसी सोच को बनाया, सजाया संवारा और एक रूप रेखा दी है हमारे माता-पिता ने। दहलीज के…

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भूख

भूख मुझे बेशक गुनहगार लिखना साथ लिखना मेरे गुनाह, हक की रोटी छीनना । मैंने मांगा था, किंतु, मिला तो बस, अपमान, संदेश, उपदेश, उपहास, और बहुत कुछ । जिद भूख की थी, वह मरती मेरे मरने के बाद । इन, अपमानों, संदेशों, उपदेशों, उपहासों, से पेट न भरा, गुनाह न करता तो मर जाता…

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कन्यादान एक विवशता

कन्यादान एक विवशता सामान्यतः मध्यमवर्गीय परिवारों मे लड़कियों के विवाह के लिए आदर्श उम्र स्नातक के बाद से ही मानी जाती है ।ज्यादातर मामलों मे उच्च शिक्षा और भविष्य संबंधी सभी निर्णय लड़की के भाग्य और ससुराल पक्ष के मिजाज पर निर्भर करता है!हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, बात उन दिनों की है,…

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सुनो दिसम्बर

सुनो दिसम्बर सुनो दिसंबर, यह जो वक्त की गाड़ी तुम खींचकर यहाँ तक लाए हो बहुत भारी थी मजदूरों पर, मजबूरों पर कमजोरों पर, मजबूतों पर कितनों की कमर टूटी कितनों की संगत छूटी बेबस रहा हर एक लम्हा जीवन भी रहा कुछ थमा-थमा परेशान रहे हम सभी कैद रही हर चलती साँस पर इंतजार…

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एक स्त्री की तीन आवाजें !

एक स्त्री की तीन आवाजें !   दोपहर की चाय जब तक उबलती, तब तक सीमा खिड़की के पास रखी कुर्सी पर बैठ जाती। सामने स्कूल से लौटते बच्चे, दूध वाला, दोपहर की सुस्ती में पसरे कुत्ते और बगल की अरोड़ा आंटी की आवाज़ें – सब रोज़ की तरह चल रहा होता, पर सीमा की…

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ये चाय की प्याली

ये चाय की प्याली हो लबालब ये चाय की प्याली, छलके जबतब ये चाय की प्याली । जन्नतों का सुकून हो हासिल, छू ले जो लब ये चाय की प्याली । पाँच बजते ही बस तलब उट्ठे , माँगे साहब ये चाय की प्याली । हसरतों से वो जब मुझे देखे, इसका मतलब ये चाय…

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