साथी हाथ बढ़ाना !

साथी हाथ बढ़ाना ! श्रमिक हमारी सभ्यता-संस्कृति के निर्माता भी हैं और वाहक भी। हजारों सालों तक मनुवादी संस्कृति ने उन्हें वर्ण-व्यवस्था के सबसे निचले पायदान पर रखा। उन्हें शूद्र, दास और अछूत घोषित कर उनके श्रम को तिरस्कृत करने की कोशिश की गई। सामंती व्यवस्था ने गुलाम और बंधुआ बनाकर उनकी मेहनत का शोषण…

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भारत की बातें

भारत की बातें ये भाषण भी ले लो, ये राशन भी ले लो, हमें मत सुनाओ तुम्हारी कहानी, सुनाओ हमें सिर्फ़ भारत की बातें. वो गीता की गरिमा, वो वेदों की बानी। वो भारत का दुनिया को रस्ता दिखाना, वो शांति, अहिंसा की राहों पे जाना, वो चाणक्य, अकबर, शिवाजी, वो राणा, वो झांसी की…

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भई अपनी तो बस अब हो ली !!

भई अपनी तो बस अब हो ली !! धूल उड़ाना रंग लगाना धमाचौकड़ी खूब मचाना , रंगो से भरी पिचकारी से अपनों गैरों को रंग जाना, अब कहां वो बेफिक्री के रंग कहां अब दिल के हमजोली, अब कहां वो बचपन की होली वो मस्तीखोरी वो हंसी -ठिठोली!! मां के हाथ के वो दही बड़े…

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वाणी और कर्म की धनी-फ्लोरिंस रे कैनेडी

वाणी और कर्म की धनी-फ्लोरिंस रे कैनेडी “फ्लो के साथ पांच मिनट आपका जीवन बदल देगा “– स्टीनम पत्रिका के संस्थापक का यह कथन अनेक व्यक्तियों के जीवन में अक्षरश: चरितार्थ हुआ है, ऐसा बताया जाता है। एक मुखर अधिवक्ता की हैसियत से मानव अधिकारों की अत्यंत सशक्त प्रवक्ता और नारीवादी आंदोलन की प्रखर नेता…

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भारत और आत्मनिर्भरता

भारत और आत्मनिर्भरता जब विश्व कोरोना वैश्विक आपदा से लड़ रहा था भारत कोरोना को हराने के साथ साथ खुद को आत्मनिर्भर बनाने के सपने संजोए आगे बढ़ रहा था। इस महामारी से पूरी मनुष्य जाति प्रताड़ित थी और इस पर किसी तरह काबू पाने के लिए जूझ रही थी। कारखाने ,दफ्तर सभी निर्माण कार्य…

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मातृ दिवस

मातृ दिवस मां तो मां ही होती है, हर मां की अपनी अलग पहचान अलग कहानी होती है। शायद पहले कभी ये न समझ पाए कि ये भी कोई खास चीज कहलाती है। क्योंकि हर सांस में शायद वो बसती थी,आज भी मेरे हर कोने में उसकी ही छवि मेरे अंदर दिखती है। और अब…

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करवा चौथ का उपहार

करवा चौथ का उपहार तेरे प्रेम के सिंदूर से मेरा जीवन हो सप्तरंग तेरे स्नेह की बिंदिया से फिले रहे मेरा मुख तेरे विश्वास की चुडिय़ां से खनकती रहे मन तेरा मंगल होना ही मेरा मंगलसूत्र रहे तेरी खुशियों ही मेरे पायल की छुनछुन रहे तेरी सफलता की खुशी से ओठ सुर्ख लाल रहे तुझे…

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पापा की तरह

पापा की तरह नहीं बन पाती कलाकार पापा की तरह फटी जेब में भी जो मुस्कुराहटें संभाल लाते थे परेशानियों के गद्दे पर भी जो रेशमी चादर बिछाते थे हर ईंट में खुद को ढाल घर हमारे लिए बनाते थे । नहीं आता हुनर पापा की तरह पसीने से तर – बतर जो जेठ की…

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चलकर देखें

चलकर देखें   इरादा कर ही लिया जब कि चलते जाना है फिर जरूरी है क्या कि अँधेरे को हम डरकर देखें हौसला लेकर चलें हल की तरह कांधे पर जहाँ पर रौशनी का घर है वहाँ चलकर देखें कसैलेपन के लिए जिंदगी ही काफी है ये जरूरी नहीं कि हर बार हम मरकर देखें…

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