माँ

माँ माँ तो केवल माँ होती है , हर सुख -दुख में ठंडी छाँव होती है । गरम थपेड़े सहकर भी बच्चों की रहनुमा होती है । सूरज की पहली किरण वह , चाँद की चमकती रोशनी वह, नीले आसमान -सी विशाल वह , हवा का सुगंधित झोंका वह , ममता से भरी गागर वह…

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पापा की तरह

पापा की तरह नहीं बन पाती कलाकार पापा की तरह फटी जेब में भी जो मुस्कुराहटें संभाल लाते थे परेशानियों के गद्दे पर भी जो रेशमी चादर बिछाते थे हर ईंट में खुद को ढाल घर हमारे लिए बनाते थे । नहीं आता हुनर पापा की तरह पसीने से तर – बतर जो जेठ की…

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Happy Anniversary

जीवन साथी जीवन पथ पर अकेली थी . अल्हड सी थी अलबेली सी … चलते चलते अनजानी राहों पर .. मिल गए एक दिन तुम यूँ ही … मेरे जीवन साथी बन कर … बन मांझी पतवार थाम कर … उतर पड़ी जीवन नदिया में …. हाँथ थाम कर चल दी तुम संग .. जिधर…

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दिव्या माथुर-सुपर अचीवर

दिव्या माथुर -सुपर अचीवर वातायन- यूके की संस्थापक, रॉयल सोसाइटी ऑफ़ आर्ट्स की फ़ेलो, लंदन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन-2000 की सांस्कृतिक अध्यक्ष, यूके हिन्दी समिति की उपाध्यक्ष और कथा-यूके की अध्यक्ष­ रह चुकी, दिव्या माथुर का नाम ‘इक्कीसवीं सदी की प्रेणात्मक महिलाएं’, ‘ऐशियंस हूज़ हू’ और विकिपीडिया की सूचियों में भी सम्मलित है।  25 वर्षों तक नेहरु केंद्र-लन्दन में वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी के रूप…

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समर्पित जीवन

समर्पित जीवन जब से होश संभाला स्वयं को शिक्षकों के बीच पाया | हिंदी के प्रखण्ड विद्वान्-दादा डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव राजेन्द्र कॉलेज छपरा के प्राचार्या थे जिन्होंने अपने ज्येष्ठ पुत्र शैलेन्द्र की शादी हिन्दी स्नातकोत्तर की गोल्ड मेडलिस्ट वीणा से बिना कुण्डली देखे बिना उपजाति पूछे ,सिर्फ अंक पत्र देखकर की थी | शैलेन्द्र और…

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छठ पूजा विशेषांक

छठ पर्व : भावनाओं का ज्वार पवित्र कार्तिक मास आते ही वातावरण ज्योतिर्मय होने लगता है… शक्तिदायिनी माँ दुर्गा के आगमन के बाद से ही मातृ शक्ति का एक प्रवाह मन की भावनाओ को झंकृत करने लगता है … बंगाल की कोजागरी लक्खी पूजा, काली पूजा, जगद्धात्री पूजा तो अन्य स्थानों पर धन की देवी…

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जीवनसाथी

जीवनसाथी (करवाचौथ पर जीवनसाथी को समर्पित) रिक्त स्थान के मध्यांतर का भराव हो तुम कभी सुनी है धड़कनों के बीच की एक गहराई सुनो वह मेरी गहरी आवाज़ हो तुम..!! अक्सर दिमाग में उठते है कई सवाल और उन सवालों के जवाब कभी नही मिलते सुनो एक गुमशुदा प्रतिउत्तर हो तुम …!! शांत बहते पानी…

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‘आज का होरी’ कौन लिखेगा ?

‘आज का होरी’ कौन लिखेगा ? किसान की फसल जब तबाह हो जाती है तब सियासत की फसल लहलहा उठती है। ‘भारत एक कृषि-प्रधान देश है’ जब यह पंक्ति हमारे नीति-निर्माता, योजनाकार जब मौके-मौके पर कहते हैं तो उनके मुँह से यह सुनकर न तो हँसी आती है और न ही गुस्सा, बल्कि यह सोचना…

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इन्तजार

इन्तजार गत चार सालों से उर्मि रांची के मानसिक चिकित्सालय में जिन्दगी के मनहूस दिन काट रही है । हर शाम उसे किसी न किसी का इन्तजार रहता है । आँखें दरवाजे पर लगी रहती हैं शायद कोई आ जाय । किसी मरीज के घरवाले आते हैं किसी के रिश्तेदार मिलकर जाते हैं , पर…

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