वसीयत

वसीयत दिन – रात, सोते- जाते ,उठते- बैठते, एक ही ख्याल, एक ही बात , एक ही विचार, अपनी लाडली के नाम वसीयत में क्या करूँ ? क्या दूँ उसे जो उसकी मुस्कान सदाबहार बनी रहे ? क्या करूँ उसके नाम कि उसकी आँखों में बिजलियाँ चमकती रहें, क्या लिख दूँ जिसे पाकर वह सनातन…

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रामोतार की फोटो

रामोतार की फोटो “लो आ गए बड़के भैया की मोटर… राम- राम बड़के भैया! राम-राम चाची ! बड़ी दीदी राम-राम !” धारीदार पाटरे का पैजामा, फुल शर्ट को बाहों में लपेटे ,कंधे पर लाल रंग का अंगौछा डालें वह लगभग चार फुट पांच इंच का, रंग पक्का यह अदना सा व्यक्तित्व सबका अभिवादन कर रहा…

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मेरी मुट्ठी में आसमां

मेरी मुट्ठी में आसमां आज जब मैं महिला सशक्तिकरण की बातें सुनती हूं तो सोचने लग जाती हूँ कि मैं कितनी सशक्त हूँ , यह समाज की महिलाएं कितनी सशक्त हैं l हम एक आधुनिक दौर में जी रहे हैं, जहां शिक्षा, सुख सुविधाएं, समाज का प्रोत्साहन सभी कुछ हम स्त्रियों को मिल रहा है…

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शराबी

शराबी “चलो – चलो, जल्दी -जल्दी लादो… कंबल सब लदा गया न, और खाने का पैकेट….” वार्ड पार्षद के प्रत्याशी गाड़ी में सामान लदवा रहे थे । गाड़ी के ऊपर चिपके हुए पोस्टर, पेंट किये हुए चुनाव चिन्ह और लटकाए हुए बैनर ने गाड़ी के आकार, ढ़ांचे और रंग को उसी तरह से ढ़ंक रखा…

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अंतस् का संवाद …

अंतस् का संवाद … तेरा तेरे अंतस् से होता हुआ संवाद हूँ ! या कह लो मैं शिक्षक हूँ , या कहो उस्ताद हूँ ! अंभ अगोचर पथ कंटकमय , हिय तनू आक्रांत तो सत्य सनित मैं संबल सा नित काटता अवसाद हूँ ! मैं ही गीता की थाती हूँ , धौम्य का भी रूप…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- इंदिरा गांधी

इंदिरा प्रियदर्शिनी गाँधी “किसी ने इंदिरा गाँधी को ‘कोल्ड ब्लडेड रूथलेस वोमन’ (Indira Gandhi is a cold blooded ruthless woman) कहा | क्या आपको पता है किसने ?”, अचानक इंटरव्यू बोर्ड के एक सम्मानित सदस्य ने अकस्मात् ही पूछा | आज से कुछ ५० वर्ष पूर्व, आईएएस की लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद,…

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फागुन आया

फागुन आया मह-मह मंजर महुआ ले फागुन आया सखि, फिर बागों में वसंत हुलसाया! धानी चादर ओढ़ कहीं मटर सेम गदराया सखि,फिर बागों में वसंत हरषाया!! पीक कूक डाली-डाली बेदर्द दर्द सुलगाया हे सखि, फिर से वसंत भरमाया!! पीली सरसों,मदभरे नयन करता नर्तन संग पवन मन मदन राग यह गाया सखि,फिर हिय मध्य वसंत कुछ…

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अबल पुरुष

अबल पुरुष पहले रहे होंगे पुरुष प्रबल और प्रभावशाली, पर आजकल वे बड़े अबल होते जा रहे हैं। सच में, क्या कहा? आप नहीं मानते? चलिए तो मैं बताती हूं।जब से सोशल मीडिया और डेटिंग साइट का बोलबाला हुआ है तब है पुरुष, जो है, बेचारा होता चला जा रहा है।ये हम सभी को ज्ञात…

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Rise

Rise Rise o mankind Rise from the gloom Ruby red poinciana has spread it’s hue Golden shower falling from the branches has spread wings like blessings from heaven Rise dear rise from the fear , learn to live with the C Plight should not fright Rise don’t fret the future is yours Rise and smile…

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प्रेमपत्र सन बहत्तर का

प्रेमपत्र सन बहत्तर का किशन आज बहुत लंबे समय के बाद तुम दिखे।समय को दिनों, महिनों और वर्षों में बाँटने की शक्ति कहाँ थी मुझमें।हर एक पल तो युग की तरह बीता था। कितने युग बीत गए इसका भान ही कहाँ रहा मुझे।मन तो सदा तुम्हें खोजता रहता था। आज तुम पर दृष्टि पड़ी तो…

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