अंतस् का संवाद …

अंतस् का संवाद … तेरा तेरे अंतस् से होता हुआ संवाद हूँ ! या कह लो मैं शिक्षक हूँ , या कहो उस्ताद हूँ ! अंभ अगोचर पथ कंटकमय , हिय तनू आक्रांत तो सत्य सनित मैं संबल सा नित काटता अवसाद हूँ ! मैं ही गीता की थाती हूँ , धौम्य का भी रूप…

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क्षमायाचना

क्षमायाचना हे नेता सुभाष बोस जी-तुम्हे शत शत नमन्न हमारा है। गुनाहगार ये है देश आपका-जिसने यूं मौन को धारा है।। तेरे क्रान्ति के जज़्बे को-और हम तेरे साहस को भूल गए। हम तो उन्हे भी भूले हैं-जो हंस हंसकर फांसी झूल गए।। आज़ादी के दिवानों का-नही हमने है कोई प्रतिकार किया। प्रतिकार तो क्या…

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अब मैं भी माँ जैसी ही माँ बनूँगी

अब मैं भी माँ जैसी ही माँ बनूँगी… ” मैं भी एक माँ हूँ पर टूट जाती हूँ कई बार… फिर माँ आती है … कभी ख़्वाबों में,कभी बातों में और बढ़ाती है अपना हाथ खींच लेती है मेरे सारे दर्द दफन कर लेती है उन्हें भी अपने सीने में किसी को भनक नहीं लगने…

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हार कभी न मानी

  हार कभी न मानी   राह कठिन है जीवन की पर हार नहीं मानी है. पर्वत-सी ऊँची मंज़िल पर चढ़ने की ठानी है. जीवन के पाँच दशक पार हो जाने के बाद जब अपने जीवन को एक द्रष्टा के तौर पर देखती और विश्लेषण करती हूँ तो लगता है एक व्यक्तित्व वस्तुतः अपने माता-पिता…

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अनुभूति

अनुभूति ” माँ कल मेरे स्कूल में लेख प्रतियोगिता है, क्या आप मेरी मदद कर देंगी ” – अंकुर ने स्कूल से आ कर माँ से कहा । ” हाँ क्यों नहीं बेटा किस विषय पर लिखना है ” – माँ ने प्यार से पूछा । ” प्रेम ” पर — कहा अंकुर ने अरे…

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पवित्र प्रेम

पवित्र प्रेम प्रेम, इश्क़, मुहब्बत महज़ शब्द नहीं होते इसमें निहित होता है किसी का एहसास कई ‘सुनहरे ख़्वाब’, कुछ खट्ठी मीठी ‘स्मृतियाँ’ प्रेम एक पल में किसी एक व्यक्ति से होने वाली ”क्षणिक अनुभूति” होता है। जहाँ निहित होता है निःस्वार्थ ”समर्पण’ देह से परे दो आत्माओं का ”अर्पण” एक ”विश्वास” समाहित होता है…

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GOD IS LOVE

GOD IS LOVE Love is a metaphor of absolute surrender, Unspeakable closeness with every breath together. L, is for the laughter we share everyday, We hold on to each other in every way. 0, is for opulence that we treasure each other, Knowing our wealth will never wither. V, is for the values of our…

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सिद्धार्थ यशोधरा और बुद्ध

सिद्धार्थ यशोधरा और बुद्ध जाना तय था मेरा … पर जब उसे देखता तो , मन ठहर जाता था।। किस अवलम्बन पर छोड़कर जाता उसे, वो जो मुझ में अपना सारा संसार देखती थी, फिर उसका सहारा आ गया ..उसका ‘पुत्र’ जानता था अब उस में व्यस्त हो जाएगी, जीवित रह पाएगी मेरे बिना भी…

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दो अक्टूबर के कुछ अनछुए पहलू

दो अक्टूबर के कुछ अनछुए पहलू राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का नाम सिर्फ साबरमती आश्रम से ही नहीं जुड़ा है ।यह बात शायद काफी लोगों की जानकारी से अछूती हो सकती है। बात कुछ यूं निकली और जब मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में बुजुर्गों के बीच सिमट कर रह गई। बापू का लगाव और…

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गैंग्रीन

गैंग्रीन सौम्या और केशवी – कॉलेज की दो घनिष्ट सहेलियां विवाह के करीब बीस वर्षों पश्चात एक दूसरे से टकरायीं । गले मिलीं, बड़ी खुश हुईं , अलग अलग शहरों में रहने की वजह से इतने वर्षों में मिलना ही नहीं हुआ । आज इतने वर्षों बाद अचानक मॉल में टकरा गयीं..दोनों ही चालीस पार…

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