पर्यावरण दिवस
पर्यावरण दिवस सूखी नदियाँ,सूखी धरती सिसक उठी करती चित्कार, मैली कितनी अब होऊँगी अब सब मिलो, करो विचार। बहा दिया तुम नाली कीचड़ नदी पवित्र इस गंगा में अपने जन से रक्तपात कर रक्त बहाया दंगा में। जंगल काटे,काटे पौधे काट दिए तुम पर्वत को, अपने सुख में मानव तूँ ने बढ़ा दिया है नफरत…
दिव्या माथुर-सुपर अचीवर
दिव्या माथुर -सुपर अचीवर वातायन- यूके की संस्थापक, रॉयल सोसाइटी ऑफ़ आर्ट्स की फ़ेलो, लंदन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन-2000 की सांस्कृतिक अध्यक्ष, यूके हिन्दी समिति की उपाध्यक्ष और कथा-यूके की अध्यक्ष रह चुकी, दिव्या माथुर का नाम ‘इक्कीसवीं सदी की प्रेणात्मक महिलाएं’, ‘ऐशियंस हूज़ हू’ और विकिपीडिया की सूचियों में भी सम्मलित है। 25 वर्षों तक नेहरु केंद्र-लन्दन में वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी के रूप…
राम तुम्हारा चरित स्वयम् ही काव्य है
राम तुम्हारा चरित स्वयम् ही काव्य है अयोध्या की यात्रा एक चिर प्रतीक्षित अविस्मरणीय यात्रा थी, वर्षों की कामना पूर्ण हो रही थी और अपनी कल्पना के साकार हो पाने की अनुभूति हो रही थी,,, इतिहास के पन्नों पर बिखरी अयोध्या नगरी की अनगिनत कहानियाँ, उनके सच, और उस यथार्थ का मुखर मौन और उनके…
शब्द सुमन : राष्ट्रकवि के चरणों में
शब्द सुमन : राष्ट्रकवि के चरणों में “मुझे क्या गर्व हो ,अपनी विभा का, चिता का धूलिकण हूँ, क्षार हूँ मैं। पता मेरा तुझे मिट्टी कहेगी, समा जिसमें चुका सौ बार हूँ मैं।” कौन है ऐसा स्वपरिचय देता हुआ? अरे वह तो ,सरस्वती का वरद पुत्र, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ नाम जिसका हुआ। ‘राम’ को धारण…
चुनौतियाँ हमसे बड़ी नहीं
चुनौतियाँ हमसे बड़ी नहीं मैं पुष्पांजलि मिश्रा जीवन के चार दशक पार करने के बाद जब अपने जीवन के बारे में सोचती हूँ तो इसे ईश्वर की कृपा मानती हूँ और भविष्य के लिए आशावादी हूँ ।ईश कृपा, माता-पिता व गुरु जनों का आशीष, अपनों के प्यार से सजे, नकारात्मकता और निराशा से दूर अपने…
अनु बाफना की कविताएं
अनु बाफना की कविताएं 1.मशाल सी कलम प्रखर हो सूर्य किरणों-सा,तपिश से लोह भी पिघले । करे जो सत्य-आराधन,खरा सोना सदा उगले । दिखे जब राष्ट्र खतरे में, कि तीरों की करे वर्षा । बहे जब लेखनी ऐसी,सितारा देश का उजले । रचा साहित्य ऐसा था,लगे वनराज की गर्जन। जगाये ओज तन-मन में, उफन…
मेरे पापा सुपरमैन
मेरे पापा सुपरमैन फादर्स डे पर पापा, चलो मैं एक कविता सुनाती हूं। क्या हो आप हमारे लिए यह दुनिया को बदलाती हूं। हमारे पापा सुपरमैन हर विपदा से लड़ जाते हैं। हो जाए हम वीक तो स्ट्रांग उन्हें हम पाते हैं। घर समाज और रिश्तेदारी बखूबी निभाते हैं। वो हमारे पापा जी, जो माथुर…
STRUGGLE OF ARUNA SHANBAG
STRUGGLE OF ARUNA SHANBAG Today is the DEATH ANNIVERSARY of ARUNA SHANBAG.Does this name ring a bell? I don’t think most people from this generation have heard the name, but actually, with the demise of ARUNA SHANBAG on this day in 2015..,well & truly, an era had elapsed. Whenever there is talk of EUTHANASIA, her…
Heart of the poet
Heart of the poet You know, there isn’t the place of sorrow in my heart, No place for the darkness of dense forest. No place for today’s and tomorrow’s grieve, No place for light of my self-burning candle. My heart breaks to hundred parts, My heart breaks to hundred parts. Love sound doesn’t come to…