एक और स्वप्न

एक और स्वप्न बाहर तेज गर्जना के साथ बारिश हो रही थी, रात गहराने लगी थी। मैं भी रसोई और अन्य सारे कार्यों से निपट कर बस बिस्तर पर पड़ ही जाना चाह रही थी कि अचानक फोन की घंटी बज उठी। उधर नयना दीदी थी, भर्राई हुई आवाज में उन्होंने कहा-“प्रोफ़ेसर साहब नहीं रहें।”मैं…

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…..जीवन दंश का क्या ?

…..जीवन दंश का क्या ? पढ़ती हूं ,सुनती हूं, फिर से नव पुष्प खिलेंगे, नव पल्लव फिर सज जाएंगे, पर जो टहनी सूख गई, असामयिक दावानल से, उन दरख़्तों का क्या? झुलसी वल्लरियों का क्या? जीवन की आस झलकाते परंतु अब, ठूंठ बन चुके स्याहवर्णी नवपादपों का क्या? कुछ घरों में चिरनिंद्रित मायें, रोटी जलती…

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बापू

बापू तुम्हारे वजूद से थी मेरे गुलिस्ताँ में रौनकें सारी, तुम्हारे बगैर इस दुनिया को मै वीरान लिखती हूँ …..बापू सभी रिश्तों पर खुब लिखा जाता हैं माँ पर दोस्ती पर ,आज मै अपने पापा के बाते  लिखूंगी, मै अपने पापा को बापू के सम्बोधन से पुकारती थी,जहाँ सब डैड कहते मै उन्हें बापू कहती…

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“कुछ कही, कुछ अनकही”

“कुछ कही, कुछ अनकही” जीवन में अनेक पहलू ऐसे आते हैं जो अंतस में खलबली तो मचाते हैं पर उसको बाहर लाना सरल नहीं होता और यही बात कई बार अंदर घुटन उत्पन्न करती है तो अनेकों बार हम उसी में खुशी ढूंढ लेते हैं। ज़िन्दगी के यही चढ़ते-उतरते पड़ाव हमारे जीवन की कहानी बन…

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गणिका

गणिका ‘चरित्रहीन हो, बेगैरत हो, हो निर्लज्ज और कुल्टा’ ऐसे कितने तीर चला कर कहते हो मुझको गणिका ! शफ्फाक वस्त्र में सजे हुये, पर अंदर से उतने मटमैले, रुतबे वाले ,रँगे सियार, इस समाज में हैं फैले ! भूल के अपनी मर्यादा औ’ भूल के पत्नी का वह प्यार , काम पिपासा के कामातुर,…

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खनक चूड़ियों की

खनक चूड़ियों की माँ, आज खो गयी हूँ तुम्हारी यादों में लेटी हूँ कुछ पल सुकून से तुम्हारी यादों को समेटे अपने अंतर्मन में। मुझे याद है जब मैं छोटी थी मुझे परियों की सी फ्रॉक पहना बालों में रिबन और आँखों में काजल लगा मुझे प्यार से निहारती थी, और इस डर से कि…

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हमारी हिन्दी

हमारी हिन्दी हिंदी हमारी भाषा हैं। हिंद की परिभाषा हैं। हिन्दी हमारी संस्कृति हैं। संस्कार का सुविचार हैं पहले तो थी दबी-दबी सी। अब सिर ताने खड़ी हैं। सहमी सी हिंदी मेरी। आज सरपट दौड़ रही हैं। राह अपनी खुद बनाती, समृद्ध हो रही भाषा हैं। जुड़ रही है हिन्दी हमारी नई टेक्नोलॉजी से। क्षेत्रों…

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ढ़ाई आखर प्रेम

ढ़ाई आखर प्रेम प्रेम शाश्वत है।इसे परिभाषित करना कठिन है।प्रेम ही जीवन का आधार है।मानव जीवन का अन्तहीन सफ़र है।मानवीय मूल्यों का निकष है प्रेम।प्रेम ही रसों का उद्गमस्थल है। बिना प्रेम दुनिया में जीना असंभव है। प्रेम स्त्री पुरुष में ही नहीं सीमित है।यह कभी कहीं किसी से हो सकता है। यहाँ पति पत्नी…

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महिलाओं में क्यों होती है आयरन डेफिशिएंसी

महिलाओं में क्यों होती है आयरन डेफिशिएंसी 1. पीरियड्स के दौरान ब्लड लॉस पीरियड्स में सामान्य तौर पर आपका 80 मिलीलीटर खून निकलता है।अच्छी डाइट से इस लॉस को रिकवर किया जा सकता है। लेकिन अगर आपको ज्यादा ब्लीडिंग होती है, पीरियड्स 5 से 7 दिन के होते हैं या डाइट में आयरन युक्त भोजन…

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बड़े शहर का छोटा सा गांव

बड़े शहर का छोटा सा गांव नई दिल्ली में छोटा सा गांव क़ुतुब मीनार से मात्र कुछ मिनट की दूरी पर। कीकर के पेड़ मीलों तक, साथ में चारों ओर हरियाली।सड़के भी २० बरस पहले निकली ,चारो ओर से घनी हरियाली में फैला हुआ।जहां आबादी संभ्रांत परिवार जाटों की ,अपने में मस्त होकर जीने वालों…

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