आयरन लेडी -इंदिरा गाँधी 

आयरन लेडी -इंदिरा गाँधी 

बीसवीं सदी की विश्व की सबसे ज्यादा चर्चित महिला राजनीतिज्ञों में से एक थी श्रीमती इंदिरा गाँधी .जो स्वतंत्र भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनी .आइरन लेडी पर दिल से मुलायम .गरीबो की मसीहा .महान बनने के लिए हिम्मत चाहिए .मिशाल बनने के लिए भी हिम्मत चाहिए;हिम्मतों की परिभाषा थी इंदिरा गाँधी .पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने उन्हें ‘दुर्गा ‘का नाम दिया .अतिशयोक्ति ना होगी यह कहते हुए की इंदिरा गाँधी नाम लेते ही एक सशक्त महिला की छवि सामने आ जाती है .

इंदिरा गाँधी अनेक समस्याओं एवं चुनौतियों का संघर्ष करते ,अपना सारा जीवन देश के तरक्की में अर्पित किया .१९६६ में पहली बार भारत की प्रधान मंत्री बनी .

इंदिरा का जन्म १९ नवम्बर १९१७ को ,राजनितिक रूप से प्रभावशाली नेहरु परिवार में हुआ .गंगा किनारे इलाहाबाद में .जिसका नाम आज प्रयागराज परिवर्तित हो गया है .दादा मोतीलाल नेहरु एक भारतीय राष्ट्रवादी नेता थें,पिता जवाहरलाल नेहरु भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक प्रमुख व्यक्तित्व तथा स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थें ,माता कमला नेहरु घरेलू महिला थी .

इंदिरा को गाँधी उपनाम ,फिरोज से विवाह के उपरांत महात्मा गांधी के सुझाव पर मिला .फिरोज से शादी के लिए पूरा परिवार विरोध में था ,सिर्फ महात्मा गाँधी की रजामंदी अथवा जोर से इंदिरा फिरोज की अंतरजातीय विवाह हुआ .जो उस समय के लिए साहसिक निर्णय था .इंदिरा गाँधी को दो संताने थी राजीव गाँधी और संजय गाँधी .

इंदिरा की पढाई किसी एक स्थान या एक जगह नहीं हुई .वे सेल्फ स्टडी पर ज्यादा ध्यान दी .हालाँकि देश -विदेश के कई विद्यालय और महाविद्यालय में अध्यन किया.रविन्द्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित शान्ति निकेतन में भी अध्यन किया .रविन्द्रनाथ का ही दिया उपनाम है ; प्रियदर्शिनी. सेल्फ स्टडी में अपने पिता नेहरु जी से बहुत सवाल किया करती .कभी नेहरु जी तंग आ जाते पर यात्रा के दौरान पत्राचार से वार्तालाप होती .कई सवालों का जबाब देते .जिससे वे सीखती ही रहती .चूँकि उस समय स्कूल में बहुत भेद भाव रहता था .अत: इंदिरा को स्कूल का माहौल पसंद ना था .

बहुत चंचल थी पर उदंड नहीं .सबकी दुलारी थी पर अनुशाशन में उन्हें रखा जाता .पूरी संतुष्ट जिन्दगी थी .

बचपन से ही स्वतंत्रता आंदोलन का माहौल देख बड़ी हुई .उनके घर पर नेता आते रहते थें .भाषण चलता रहता था और पुलिस भी छानबिन करने अचानक आ जाती और उनके पिता के साथ अन्य नेता को भी जेल जाना पड़ता .यह सब देखते हिम्मत का सैलाब उनके जज्बे में था .पर नेहरु जी उन्हें हमेशा राजनीति से दूर रहने की कोशिश करते . पर जिस माहौल में पल -बड़ रही थी उससे बचना असम्भव था .रोम -रोम में देशप्रेम का जज्बा उफानें ले रही थी .उन्होंने महात्मा गाँधी से कहा ,’मुझे देश के लिए कुछ करना है .’तो गाँधी जी ने अनुमति दे दी ,तुम्हे जो करना है करो ,क्योंकि तुम कुछ कर सकती हो .तभी उन्होंने घर के नौकर -चाकर ,अगल -बगल के पड़ोसी बच्चें को लेकर ‘वानर सेना ‘ का गठन किया .सब को भाषण देती ,झंडे सिलती ,खादी के कपड़े बनाती , गरीबों की मदद करती ,कोई घायल हो जाता तो सेवा देती,उनकी वानर सेना जबरदस्त थी . बीमारों की सेवा करती

कहावत है ना पूत के पावं पालने में ही दिख जाते हैं .आयरन लेडी थी पर दिल से मुलायम .गरीबों के लिए समर्पित थी .

एक बार विदेशी वस्तुओं का होलिका दहन हुआ तो अपनी प्यारी गुड़िया जो उनकी विदेशी आंटी ने दिए उसे भी होलिका में समर्पित कर दिया .जब नेहरु जी आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने तो पिता के साथ देश-विदेश घूमना शुरू किया जिससे हर जगह की संस्कृति को देखती और पिता से जानकारी लेती .जिस वजह से उनका ज्ञान और राजनितिक जानकारी प्रबल होती गई .

आगे विरासत की रुतबा और ज्ञान से अपने पिता के भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में ,कार्यकाल के दौरान एक निजी सहायक के रूप में उनकी सेवा में रही .यही से उनकी राजनीतिक यात्रा आरम्भ हो गई .और यह सफर उनकी हत्या तक अनवरत चलती रही .

फिर नेहरु जी के मृत्यु बाद १९६४ में उनकी नियुक्ति एक राज्य सभा सदस्य के रूप में हुई .फिर आगे लालबहादुर शास्त्री के मंत्री मंडल में सुचना और प्रसारण मंत्री बनी .तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर के आकस्मिक निधन के बाद तत्कालीन कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष कामराज ,इंदिरा गाँधी को प्रधानमंत्री बनाने में निर्णायक रहें .उसी समय इंदिरा जी चुनाव जीतने के साथ -साथ जनप्रियता के माध्यम से विरोधियों के ऊपर हावी होने का रूप दर्शाया .हालाँकि पहले बचपना ,फिर राजनीति में आना .एक पत्नी और एक माँ और एक राजनीति नेता ,इतने सारे काम इन्होंने सम्भाला .पर अंतर में थोडा अंहकार ,जो छुपा था ,धीरे -धीरे व्याप्त होने लगा .

हालाँकि प्रधानमंत्री बनने के बाद इंदिरा जी के सामने कई चुनौतियां और संकट थे .उसी साल देश में भयंकर अकाल पड़ा .राज्यों में दंगे होने लगे . पंजाब में भाषाई आन्दोलन होने लगे .देश में कई जगह उनके पोस्टर लगा उन्हें अशुभ जताने लगे .पुरुष समाज शायद एक महिला को प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार ना करना चाह रहा हो …..

पर इंदिरा ने अपने विरासत के अनुभव अथवा बचपन के संस्कारों को देश के विकास से जोड़कर ,अपनी अद्भुत तत्क्षण निर्णायक क्षमता से देश -दुनियां को हैरत में डाल दिया .जैसे – जुलाई १९६९ को बैंकों के राष्ट्रीयकरण का अध्यादेश आया .बैंकों पर सरकार के अधिकार हो जाने से बैंकों द्वारा दिए जानेवाले ऋणों को सट्टेबाजी और दूसरे अनुत्पादक कार्यो में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा .चूँकि भारत सामाजिक न्याय के सिद्धांत के अनुरूप लोकतांत्रिक राजनितिक व्यवस्था कायम रखते हुए ,तेजी से आर्थिक विकास करना चाहता था. राष्ट्रीयकृत बैंकों का एक निश्चित उद्देश्य यह था कि नये और प्रगतिशील उधमकर्ताओं को अधिक से अधिक प्रोत्साहन देना जिसमें सभी का सामान प्रभुत्व था .

१९७१ में पाकिस्तान का दो टुकड़ा कर एक नए देश बांग्ला देश का प्रदुभार्व .यह इंदिराजी की अदम्य साहस का परिणाम था .पूर्वी पाकिस्तान में स्वतंत्रता के युद्ध के समर्थन में पाकिस्तान के साथ युद्ध चली ,जिसके परिणामस्वरूप भारतीय जीत और बांग्ला देश का निर्माण हुआ .साथ ही भारत का प्रभाव उस बिंदु तक बढ़ गया ,जहाँ वह दक्षिण की एकमात्र क्षेत्रीय शक्ति बन गई .

१९८४ में ऑपरेशन मेघदूत में सियाचिन पर भारत का कब्ज़ा .यह अपनी तरह पहला सैन्य आक्रमण था .इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान को हतप्रभ कर दिया था .

१९७४ में परमाणु परीक्षण करके भारत ने दुनिया को हैरत में डाल दिया .यह एक शांतिपूर्ण परीक्षण था ,जिसने भारत को उन देशों से जोड़ दिया जो परमाणु परीक्षण किया .

ये सब महत्वपूर्ण निर्णय था महिला सशक्तिकरण की दुर्गा का .और भी अनेकों उदाहरण है .

१९७१ में सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न ‘मिला . यह भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थी ,जिन्हें यह सबसे बड़ा सम्मान मिला .अन्य और भी कितने पुरस्कार उन्हें मिलते रहें .लगातार तीन बार भारत गणराज्य की प्रधानमंत्री रही ,पद की लोलुपता कहे या निरंकुशता ’२५ जून १९७५ से मार्च १९७७ तक का २१ महीने का आपातकाल घोषित करना उनके जीवन का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय था .

तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूदीन अली अहमद ने ,तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के कहने पर भारतीय संविधान की अनुच्छेद ३५२के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी .जो की स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक काल था .चुनाव स्थगित कर दिए गए , नागरिकों के अधिकार को समाप्त करने की कोशिश की गई .इंदिरा जी के विरोधियों को कैद कर लिया गया .प्रेस पर पाबन्दियां लगा दी गई .इंदिरा जी के बेटे संजय गाँधी के आदेश पर पुरुष नसबंदी का अभियान चलाया गया .जो की जले पर नमक -मिर्च का काम किया .जयप्रकाश नारायण ने इसे ‘भारतीय इतिहास की सबसे काली अवधि कहा ‘

जो संगठन सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन करना चाहे उस पर पुलिस टूट पड़ी .अनगिनत स्वयंसेवकों ने मौलिक अधिकारों के हनन के खिलाफ सत्याग्रह में भाग लिया .सरकार के विरोधी नेताओं को सलाखों के पीछे भेज दिया जाता था .जयप्रकाश नारायण को भी जेल भेज दिया गया .जहाँ वो बीमार रहने लगे .

दरअसल १२ जून १९७५ के फैसले में इलाहबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इंदिरा जी ने लोकसभा चुनाव में गलत तरीके अपनायें थें .दोषी करार हो जाने पर चुनाव रद्द कर दिया गया , हालाँकि इंदिरा जी के के करीबी आर के धवन के अनुसार ,जून १९७५ में अदालत के फैसले सुनने के बाद इंदिरा जी की पहली प्रतिक्रिया त्यागपत्र देने की थी .पर इंदिरा जी कांग्रेस के आंतरिक कलह ,विपक्षी नेताओं के पुलिस और सेना के आदेश ना मानने की अपील इंदिरा जी को बर्दास्त नहीं हुआ .जयप्रकाश नारायण ने जनता से लेकर सेना तक को इंदिरा सरकार का प्रतिकार करने का आह्वान किया .लगातार चुनौतियों से घिरी रही इंदिरा जी को आपातकाल ही सही फैसला लगा .

इस तरह इंदिरा गाँधी के निजी जीवन और राजनीतिक जीवन में अनेक उतार -चढ़ाव आये .उनके छोटे पुत्र संजय गाँधी हवाई जहाज दुर्घटना में प्राण गवाएं .इंदिरा गाँधी की हत्या भी ३१ अक्टूबर १९८४ को नई दिल्ली के सफदरगंज रोड ,उनके आवास पर सुबह साढ़े ९ बजे के लगभग हुई .

ऑपरेशन ब्लू स्टार एक भारतीय सैन्य अभियान था जो १ जून से ८ जून१९८४ तक किया गया .यह आदेश पंजाब के अमृतसर में हरमंदिर साहिब परिसर की इमारतों से सिख उग्रवादी नेता जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके सशस्त्र अनुयायियों को हटाने के लिए इंदिरा गाँधी ने दिया था . जिसके कारण सिख धर्म के प्रमुख तख्त ,अकाल तख्त को भी नुकसान पहुंचा .जिसकी आलोचना दुनिया भर के सिखों ने की .इस आक्रोश का हर्ज़ाना इंदिरा जी के अंगरक्षकों बेंअंत सिंह और जसवंत सिंह ने इंदिरा गाँधी को गोली मरकर किया. ऑपरेशन ब्लूस्टार के बाद उनके जीवन पर खतरा बढ़ गई थी .उनके अंगरक्षकों से सीखों की टुकड़ी हटा दी गई थी ,पर उन्होंने राजनितिक विरोधियों को चुप करने हेतु ,अपने अंगरक्षकों में सीखों की बहाली का आदेश दिया .

इंदिरा जी का आखिरी भाषण ३० अक्टूबर को ओड़िशा के भुनेश्वर की रैली में था .अपने तय भाषण में कहा ‘मै आज यहाँ हूँ .कल शायद यहां ना रहूँ .मेरा लम्बा जीवन रहा और मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने लोगों के सेवा में बिताया .मै अपनी आखिरी साँस तक ऐसा करती रहूंगी और मरूंगी तो मेरे खून का कतरा -कतरा भारत को मजबूत करने में लगेगा .’

इंदिरा प्रियदर्शनी ,दुर्गा ,आयरन लेडी ताउम्र देश की सेवा करते आज भी शक्ति स्थल में विशाल चट्टान के रूप में खड़ी हैं .

रागिनी प्रसाद 

लेखिका परिचय

लेखिका मुंबई भारत में निवास करती हैं।”अन्तरमन के स्वर ” शीर्षक से इनकी पहली एकल काव्य संग्रह प्रकाशित हुई है। जिसका लोकार्पण 4/9/2022 में, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा जी के द्वारा एवं श्री मद जगत गुरु शंकराचार्य अनन्त श्री अमृता नन्द देव तीर्थ जी के सान्निध्य में हिन्दी कश्मीरी संगम की अध्यक्षता में हुई और मुझे “शारदा शताब्दी सम्मान” प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। वैसे अन्य साहित्य सम्मान भी मिलते रहे तथा पत्र पत्रिकाओं एंव समाचार पत्रों एंव सामूहिक काव्य संग्रह मेरे प्रकाशित होती रही। महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जी की अध्यक्षता में , “साहित्य गौरव” पुरस्कार हिन्दी कश्मीरी संगम की ओर से मिला 2021 में।

 

 

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