जीना सिखाती ज़िन्दगी

जीना सिखाती ज़िन्दगी आज पहली बार अज़ीब सी मनःस्थिति है। लोग न जाने कैसे बड़ी बड़ी बातें कर लेते हैं किसी के बारे में भी मेरे साथ कभी भी कोई बुरा व्यवहार करता है तो मुझे बुरा लगता है। कोशिश रहती है कि मेरी तऱफ से कभी कोई आहत न हो।पर जब अति हो जाती…

Read More

शिक्षक दिवस

शिक्षक दिवस एक सतत प्रक्रिया है विद्यार्थी और शिक्षक होना। एक श्रेष्ठ शिक्षक कल एक जिज्ञासु विद्यार्थी था।जिज्ञासा सीखने की अदम्य इच्छा है और जन्म से ही इस प्रवृत्ति के साथ हम धरती पर आते हैं। शिशु के सीखने की सतत क्रिया उसकी जिज्ञासा का ही प्रतिफल है।इसमें दो मत नहीं कि परिवार ही होता…

Read More

कविता का साधक हो जाना

कविता का साधक हो जाना “जीवन का सुख-दुःख, यश-अपयश, सहज धीर होकर अपनाना, सबसे दुष्कर है जीवन में, कविता का साधक हो जाना..!! कौन भला झेले जीवन में, चिंताओं की अनहद ढ़ेरी, कौन भला चाहे आँखों में, सपनों के शव, पीर घनेरी, लेन देन के वणिक जगत में, कौन भला स्वीकार करेगा, जनमानस की तनिक…

Read More

गुरु महिमा

गुरु महिमा गुरु जन के उपकार बहुत है । गिनती हम नहीं कर पाते ।। पूरा जीवन कम लगता है । उनकी महिमा गाते गाते ।। कोरे कागज जैसे मन पर । गुरु ज्ञान की बात सजाते ।। सच्चा मानव कैसे बनते । पाठ हमें यह रोज पढ़ाते ।। शिखर सफलता के पाने की। राह…

Read More

दीदीःशक्ति पुँज शिक्षिका

दीदीःशक्ति पुँज शिक्षिका एक शिक्षक के रूप में दीदी. (डॉ वीणा श्रीवास्तव) जब मेरे जीवन में आयीं…उस वक़्त किशोरावस्था की उम्र थी मेरी, जीवन की सबसे नाजुक और महत्वपूर्ण अवस्था। इस उम्र में यदि अच्छे शिक्षक मिल जाए…सही मार्ग दर्शन मिल जाए तो जीवन संवर जाता है। कुछ ऐसा ही मेरे साथ हुआ। एक शिक्षक…

Read More

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भारतीय शिक्षा जगत को नई दिशा दी। उनका जन्मदिन देश ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाता है। वे निष्काम कर्मयोगी, करुण हृदयी, धैर्यवान, विवेकशील और विनम्र थे। उनका आादर्श जीवन भारतीयों के लिए ही नहीं, अपितु संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। डॉ. राधाकृष्णन…

Read More

अहिल्या का अभिशाप

अहिल्या का अभिशाप महाभारत का युद्ध अठारह दिनों तक ही चला था। लेकिन अशिक्षा की लड़ाई अभी लंबी चलेगी। पहाड़ों की हरी गोद में बसा हुआ ये आदिवासी गाँव अपने सबसे पास के शहरी कस्बे से 40 किमी दूर था। दो बसें आती हैं यहाँ। चार बजे के बाद कोई पब्लिक साधन नहीं है कहीं…

Read More

मानव को आलोकित करता शिक्षक

मानव को आलोकित करता शिक्षक पं.श्रीकृष्ण चन्द्र झा का जन्म जमींदार परिवार में हुआ था।१० वर्ष के ही थे तो उनके पिता का देहान्त हो गया ।अल्प आयु के कारण सारे रिश्तेदारों ने सम्पत्ति हड़प लिये थे, जमींदारी भी छीन ली थी सरकार ने। भाइयों की देखभाल भी उन्हें ही करनी पड़ी थी। भाइयों को…

Read More

जीना सिखाया

जीना सिखाया ज्ञान का दीपक कर उजागर शिक्षक आपने जीना सिखाया कभी डांट कर कभी प्यार से जीवनबोध का पाठ पढ़ाया। याद आती है कक्षा मे जब उत्सुक नजरों से घूरते थे सब अनायास व्याख्यान कौशल से तात्विक बातें हमें समझाया। कठिन पाठ को सरल बनाकर रोचक ढंग से प्रस्तुत करते सोचते थे हम, कैसे…

Read More