मैं गुलाब नही/जीवन गुलाब

मैं गुलाब नही मैं गुलाब नही मैं गुलाब नही बन सकती, अपने रोम रोम बिखेर नही सकती। मैं गुलाब नही————-। पंखुड़ियों के निकलने से फिर मेरा वजूद ही क्या? खुद को मिटा दुसरों को खुशबू नही दे सकती, मैं गुलाब नही बन सकती। सरिता सिंह   जीवन गुलाब गुलाब और मानव में है कुछ समानता…

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कोरोना

कोरोना कोरोना को रोक दो , सुनो सभी तुम आज । इसे महामारी कहें , या करना कुछ काज ।। सभी साफ रहना सदा , भीड़ भाड़ से दूर । साफ सफाई हाथ की , रहे वायरस दूर ।। सादा जीवन हो सदा , रखना उच्च विचार । शाकाहारी हो सुनो , सुंदर हो आचार…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- एम. एस. स्वामीनाथन

भारत के अन्नदाता- एम. एस. स्वामीनाथन खेतों में बालियान खड़ी थीं पर उसमें दाने कम थे भूखा था देश सारा और पड़े बेवस से हम थे दुखी हुआ स्वामीनाथन तब खोज कुछ ऐसी कर डाली हरित क्रांति आयी देश में मुस्कुरायी गेंहूं की बाली। गोदाम भरे अनाजों से जेबों में हरियाली छाई धरती उम्मीद से…

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राम तुम्हारा चरित स्वयम् ही काव्य है

राम तुम्हारा चरित स्वयम् ही काव्य है अयोध्या की यात्रा एक चिर प्रतीक्षित अविस्मरणीय यात्रा थी, वर्षों की कामना पूर्ण हो रही थी और अपनी कल्पना के साकार हो पाने की अनुभूति हो रही थी,,, इतिहास के पन्नों पर बिखरी अयोध्या नगरी की अनगिनत कहानियाँ, उनके सच, और उस यथार्थ का मुखर मौन और उनके…

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अनाथालय

अनाथालय   ये क्या है! मीटिंग में भी कोई – कोई आता है। लेटर में तो लिखा रहता है कि सबको अटेंड करना अनिवार्य है। लिखने – पढ़ने का कोई अर्थ नहीं है। बारह स्कूल से ग्यारह मुंडी। कम से कम पैंतीस – चालीस जन होंगे। हर बार यही होता है। अभी पाण्डेय जी कहेंगे…

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‘आज का होरी’ कौन लिखेगा ?

‘आज का होरी’ कौन लिखेगा ? किसान की फसल जब तबाह हो जाती है तब सियासत की फसल लहलहा उठती है। ‘भारत एक कृषि-प्रधान देश है’ जब यह पंक्ति हमारे नीति-निर्माता, योजनाकार जब मौके-मौके पर कहते हैं तो उनके मुँह से यह सुनकर न तो हँसी आती है और न ही गुस्सा, बल्कि यह सोचना…

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अच्छा लगता है

अच्छा लगता है सुनो न , बहुत दिन से कुछ कहना है तुमसे! पर उस बात का ज़ायका मुँह में घुलता है कुछ इस तरह, वो बात कह ही नहीं पाती । सुनो तो….. तुम अच्छे लगते हो अब ये मत पूछना क्यों : इन फैक्ट मेरी बात पूरी होने दो पहले फिर कुछ भी…

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कमली

कमली “कमली….अरे कमलिया! कहाँ मर गयी रे? तुझे कहा था इन बकरियों को बाड़े में बांधने… सारी साग चबा गयीं…ये लड़की तो मेरे जी का जंजाल ही बन गयी है”. कमली की चाची भुनभुनाती हुई बकरियों को हाँकने में लग गयी. उधर चाची की घुड़की औऱ बड़बड़ाहट सुनकर कमली भागती हुई आई. उसे पता था…

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