फागुन की बयार

फागुन की बयार छाया है बसंत चहुंओर बही है फागुन की बयार धरती ने ओढ़ी पीली चुनरिया हुलसे है जियरा हमार पूरी धरती है लाल-लाल चारों ओर उड़ा गुलाल नीले,पीले, लाल हो रहे सभी के गाल और द्वार चढा नशा भाँग का कर रहे हम आज हुड़दंग आज तो खूब सखि रे मनवा में छाया…

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अयोध्या

अयोध्या राम लल्ला को उनकी जन्मभूमि मिल गई और भारत को उसका सुकून। खुरच-खुरच के दर्दीली बन गई चमड़ी साफ, सुथरी और सुंदर हो गई। प्रजातंत्र है भई! देर लग सकती है पर काम हो जाता है। ज़मीन के नीचे छुपे तथ्यों को खींच कर ऊपर लाने की ज़रूरत थी। फ़ायदा ये हुआ कि अब…

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सरस्वती वंदना

सरस्वती वंदना माता सरस्वती ऐसा तू वर दे अंतर्तम सबका ज्योतिर्मय कर दे पाप इस धरा पर बहुत बढ़ गया है मनुज ही मनुज का रिपु बन गया है भटके हुए राही के पथ आलोकित कर दे अंतर्तम सबका ज्योतिर्मय कर दे चाहत है कइयों की पर पढ़ नही पाते निर्धनता राह में उनके रोड़ा…

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किश्ती और तूफ़ान

किश्ती और तूफ़ान हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | जैसे जैसे एक और गणतंत्र दिवस निकट आता जा रहा है, मेरी स्मृति के पटल पर…

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दुनिया की पहली नारीवादी कवयित्री: सप्पो

दुनिया की पहली नारीवादी कवयित्री: सप्पो वो झुकती रही दुनिया झुकाती रही उसने सहे हैं दर्द पर मुस्कुराती रही यही दस्तूर है तो परवाह न कर नाजुक फूल नही अब तू पाषाण बन कठोर रियायतें हैं ये दुनिया की सदा पार कर हौंसले से तू आगे तो बढ़ अब सरस्वती के संग संग दुर्गा का…

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उगादि : एक नई शुरुआत

उगादि : एक नई शुरुआत “उगादि’ या ‘युगादि’ कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं महाराष्ट्र का बहुत अनूठा त्यौहार है। महाराष्ट्र में इसे ‘गुड़ी पर्व के नाम से जाना जाता है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के सभी क्षेत्रों में मनाया जाने वाला यह त्यौहार चैत्र (चैत) माह के शुक्ल पक्ष के पहले दिन मनाया जाता…

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तुम आओगे या मैं जाऊं

तुम आओगे या मैं जाऊं तुम आओगे या मैं आ जाऊं कि, अब तो पतझड़ के बाद की नंगी शाखाओं पर नए पत्ते आ चुके हैं और प्रकृति भी अपने पुराने लिबास उतार कर नए आवरण में इठला रही है दिन लंबे और उदासी भरे हो गए हैं बहुत सारी उदासी इकट्ठी हो गई है…

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एक पिता का संघर्ष

एक पिता का संघर्ष “बड़े भाग्य से बेटियाँ मिलती है।” ये कहते हुए माखनलाल जी अपनी पत्नी कमला के करीब बैठ गए। कमला :- “वो तो ठीक है मुझे खुद पहली सन्तान बेटी चाहिए लेकिन सासू माँ और ससुर जी वो तो लड़की का जन्म लेना बुरा समझते हैं।” माखनलाल :- “अरे चिंता ना करो…

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कोरोना : क्राइसिस या कच्चा माल ??

कोरोना : क्राइसिस या कच्चा माल?? आज जब सम्पूर्ण संसार कोरोना वैश्विक महामारी से जूझ रहा है, वो भी बिना किसी अस्त्र/शस्त्र के, क्योंकि ना तो इसका निदान है और ना हीं उपचार। भारत जैसे लोकतंत्र के लिए यह क्राइसिस और भी भयावह हो जाती है! यह सर्वविदित है कि भारत की अपार जनसंख्या और…

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