‘आनंदी’ : मेरी प्रिय चरित्र

‘आनंदी’ : मेरी प्रिय चरित्र ‘कथा सम्राट’ मुंशी प्रेमचंद जयंती के अवसर पर, ‘गृहस्वामिनी’ पत्रिका के तत्वावधान में आयोजित आलेख एवं कथा प्रतियोगिता के अंतर्गत आलेख का विषय, “आपको प्रेमचंद की कौन सी कहानी सबसे अधिक पसंद है और क्यों?” पढते ही उम्र के इस पड़ाव पर भी मेरे जेहन में जो नाम आया वह…

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भारतीय मुक्ति-संग्राम में प्रेमचंद साहित्य का योगदान !!

भारतीय मुक्ति-संग्राम में प्रेमचंद साहित्य का योगदान !! किसी काल-विशेष के साहित्य में उस युग की विशेषताएँ प्रतिबिंबित होती रहती है। उसमें मूल मानवीय प्रवृत्ति और जातीय सांस्कृतिक स्थितियों एवं सामाजिक-राजनीतिक संघर्षों के चित्र भी देखे जा सकते हैं। यदि साहित्य समाज का दर्पण है तो इसमें देश तथा समाज की राजनीतिक स्थिति का विवरण,…

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नन्हा फरिश्ता

नन्हा फरिश्ता राम-लक्ष्मण जैसे दो भाईयों के बीच जमीन- जायदाद को लेकर लड़ाई हुई थी और बंटवारा हुआ था। बड़ा भाई सुखदेव यूँ तो बहुत समझदार था और अपने छोटे भाई ज्ञानदेव को प्यार भी करता था परंतु जबसे दुलारी पत्नी बनकर उसके घर आई थी,एक-दो सालों में हालात कुछ ऐसे होने लगे थे और…

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मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद मुझे नहीं लगता जिनकी रुचि साहित्य में होगी वो इस नाम से वाकिफ नहीं होंगे !! मुंशी प्रेमचंद मेरे प्रिय कथाकारों में से एक हैं सच कहूं तो उनकी कहानी “पूस की रात”और “ईदगाह”जब विद्यालय जीवन में पढ़ा था तभी से उनकी मुरीद हो गई!! कहना ग़लत नहीं होगा कि अगर लिखने- पढ़ने…

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छाप ‘मंत्र’ की

छाप ‘मंत्र’ की सर्वाधिक लोकप्रिय साहित्यकार प्रेमचंद की बहुत सी कहानियों ने मुझे पुनः-पुनः पढ़ने के लिए विवश किया| उनकी कहानियों के कथानक और चरित्र हमारे आस-पास की घटनाओं और चरित्रों से इस कदर मिलते-जुलते है कि हमारे भावों और संवेदनाओं को छूते हैं| साथ ही उनका लेखन आज भी प्रासंगिक हैं| प्रेमचंद की कहानियों…

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छमहु नाथ अवगुण मोरे

छमहु नाथ अवगुण मोरे हर कहानी को कोई सुनने वाला होना चाहिए। मैं यह कहानी इसीलिए लिख रही हूँ क्योंकि मैं जबसे पूर्णिमा से मिली, मैं उसके जज्बे की कायल हो गई। उसकी कहानी में शक्ति है, संदेश है और एक सीख भी। नैतिकता के प्रश्न को मैंने छुआ ही नहीं। पूर्णिमा मुझे एक दुकान…

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धनेसर की व्यथा

धनेसर की व्यथा आज धनेसर बहुत परेशान है। उसने अपनी बेटी की शादी तय कर दी है पर आज बेटी के भावी ससुराल से शादी में 5000/- की मांग का सन्देशा आया है, वरना शादी नही होगी। वह बार-बार अपनी प्यारी बेटी का मुँह देखता और मन ही मन अकुला रहा है। उसके पास इतने…

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‘आज का होरी’ कौन लिखेगा ?

‘आज का होरी’ कौन लिखेगा ? किसान की फसल जब तबाह हो जाती है तब सियासत की फसल लहलहा उठती है। ‘भारत एक कृषि-प्रधान देश है’ जब यह पंक्ति हमारे नीति-निर्माता, योजनाकार जब मौके-मौके पर कहते हैं तो उनके मुँह से यह सुनकर न तो हँसी आती है और न ही गुस्सा, बल्कि यह सोचना…

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चीखती खामोशियाँ

चीखती खामोशियाँ उतारो ” साली”के सारे कपड़े और पूरी तरह निर्वस्त्र करके पेड़ पर बांध कर कोड़े से मारो , पंच परमेश्वर में से एक ने ये राय दी , ….तभी दूसरे ने कहा नही इसके मुँह काला करके पूरे गाँव मे घुमाया जाय , इसी तरह जिसके जो मन मे आया फैसला सुना रहे…

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बदलाव

बदलाव दीदी अस्पताल से घर आ गई हैं …चार कंधों पर सवार ..घर की दहलीज से कमरे तक का सफर भारी हो रहा है ,…कमरे का सन्नाटा अचानक महिलाओं .बच्चों के रुदन से गूंज उठा ,–आज घर की मालकिन .लक्ष्मी –चली गई ..पर अपने पीछे यादों का एक लम्बा काफिला छोड़ कर …घर -आंगन में…

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