एक खामोश घर की आवाज़

एक खामोश घर की आवाज़   घर को खड़ा करने के लिए जितनी ज़रूरत ईंट-पत्थर की होती है, उतनी ही ज़रूरत होती है चुप्पियों की। चुप्पियाँ अक्सर वह आवाज़ होती हैं, जो किसी भी तूफ़ान से अधिक गूंजती हैं। सावित्री ऐसी ही एक चुप्पी थी , गहराई से भरी, स्थिर और सहनशील।   “चुप्पी एक…

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बीमारी

बीमारी सुप्रसिद्ध वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया जी द्वारा लिखी कहानी ‘बीमारी’ रिश्तों के खोखलेपन को दर्शाती एक ऐसी रचना है जो सीधे सीधे पाठक के दिल को छूती है । ये कहानी है एक बीमार बहन की जो अपने भाई भाभी को रोग के कठिन समय में अपने पास बुलाती है एक बीमार बहन की…

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काश यूँ भी कभी

काश….. यूँ भी कभी सोचती हूँ काश मैं भी सांता बन पाती । हर जीवन में प्रेम अमृत की गंगा मैं बहाती । रोतें बच्चों के आँखों से सारे आसूँ छीन लाती उनके कोमल अधरों पर गीत बन गुनगुनाती।। जीनव धूप में थके किसान पिता की चिंता मैं मिटाती धरती माँ की आँखों से दर्द…

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बदला हुआ आदमी

बदला हुआ आदमी गाड़ी स्कूल के मैदान में आकर रुक गई। गेट पर मौजूद लोगों ने अन्दर जाकर मुख्य अतिथि के आगमन की सूचना दी। यह सुनकर आयोजकों में खुशी की लहर दौड़ गई। स्कूल के प्रधानाचार्य गाँव के कुछ गणमान्य नागरिकों के साथ गेट पर आए। सबने माल्यार्पण कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया…

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इस बार यूँ होली

इस बार यूँ होली कुछ सतरंगी सी चाहत यूँ आज मचल रही है जैसे इस फागुन होली अनकही भी कह रही है मेरी हसरतों को यूँ निखार देना तुम ले सूरज की धूप सूनहरी मेरी गालों पे लगा देना तुम सजा देना माँग मेरी पलाश के सूर्ख लाली से जो चूनर ओढ़ लूँ मैं धानी…

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कवि,कविता और कोरोना

कवि, कविता और कोरोना सच ही कहा गया है कि ‘जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुचे कवि’ । आज कोरोना नामक महामारी वैश्विक स्तर पर फैल चुकी है । अमेरिका जैसी दुनिया की बड़ी-बड़ी महाशक्तियों ने इसके सामने घुटने टेक दिये हैं । ऐसी संकट की घड़ी में हमारे देश के हिन्दी, संस्कृत, उर्दू कलमकारों…

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सिमोन द बोउवार

  सिमोन द बोउवार 20वीं सदी की महान् दार्शनिकों में से एक, स्त्रीवादी विमर्शों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सिमोन द बोउवार । वैश्विक नारीवादी आंदोलन की एक महत्वपूर्ण किरदार हैं। सिमोन द बोउआर इनका जन्म जनवरी 1908 में एक अमीर घराने में,फ़्रांस के पेरिस में हुआ था। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद उनके घर…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- सुभद्रा कुमारी चौहान

अग्रणी महानायिका “हिंदी साहित्य हमेशा समाज से सम्बद्ध रहा है। साहित्य मात्र मनोरंजन का माध्यम नहीं वरन सामाजिक समस्याओं और विसंगतियों का आईना भी है।” आधुनिक हिंदी साहित्य के क्षेत्र में शुरुआत से ही देश की स्वतंत्रता की आवश्यकता और गुलामी की विवशता पर लेखकों ने खुल कर कलम चलाया था।भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से लेकर आज…

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राष्ट्रकवि डॉ रामधारी सिंह दिनकर

राष्ट्रकवि डॉ रामधारी सिंह दिनकर हिन्दी साहित्य और राष्ट्र के गौरव “राष्ट्र कवि डॉ रामधारी सिंह दिनकर जी”की जयंती के अवसर पर उन्हें ‌अपने अविस्मरणीय पल के श्रद्धासुमन अर्पित कर रही ‌हूँ। उन्हें शत-शत नमन।ऐसी‌ महान‌ व्यक्ति का एक संस्मरण मेरे विद्यार्थी जीवन ‌का है। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी दिनकर जी का साक्षात्कार, अपनापन और…

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तेरे जैसा दोस्त कहाँ

जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी! सिर्फ हमारे प्यार में ही नहीं बल्कि दुनिया के हर रिश्ते में शामिल होना चाहिए दोस्ती का एक अहम भाव क्योंकि सुना है दोस्त तब भी जान लुटा सकते हैं जब दोस्त की जान पर बन आए फिर चाहे वो सही हो या गलत, दोस्त अपनाते हैं…

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