भारतीय वैज्ञानिक 

भारतीय वैज्ञानिक      मैं ऋषि कणाद का अनादि कण, हूँ सूक्ष्म किन्तु न मेरा कोई अंत,   मैं देता ज्ञानी आर्यभट्ट सा जगत को शून्य का तत्व, सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण क्यों होता है सुलझाता मेरा तत्त्व,   मैं रसायनशास्त्री नागार्जुन का रसरत्नाकर, अलग-अलग धातु से स्वर्ण बनाऊ ऐसा मैं जादूगर,   मैं योगाचार्य ऋषि पतंजलि…

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संकल्प

संकल्प दीपू ज्यादातर विद्यालय में देरी से ही पहुँचता थ। देर से आने वाले बच्चों की अलग लाइन बनवाई जाती है तथा उनका नाम भी उनकी कक्षा के अनुसार लिखा जाता है ताकि उनके कक्षाध्यापक उन्हें जान सकें और समझा सकें ।उस रजिस्टर में नवीं कक्षा में पढ़ने वाले दीपू का नाम एकाध दिन छोड़कर…

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गाँधी का शिक्षा दर्शन : कितना प्रासंगिक

गाँधी का शिक्षा दर्शन : कितना प्रासंगिक महात्मा गाँधी के विराट् व्यक्तित्व का प्रभाव भारतीय मानस पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्श जीवन से कम नहीं है. अल्बर्ट आइंस्टीन ने सही कहा था कि आने वाली सदियां विश्वास नहीं करेंगी कि गांधी जैसा हाड़ मांस का कोई पुतला इस धरती पर चला होगा।राष्ट्र पिता मोहन…

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लाकडाउन में आभार

लाकडाउन में आभार “बिट्टू,जल्दी नहा कर आओ। रामायण शुरू होने में 20 मिनट रह गए हैं,” नानी की आवाज़ आई। “क्या मम्मी, टीवी का ही तो शो है। कोई मंदिर थोड़े ही ना जा रहे हैं कि नानी रोज सुबह-सुबह नैहलवा देती हैं,”बिट्टू ठुनक रहा था। “हां बेटा,नानी का मानना है कि भगवान राम के…

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कैसे कहूँ!

कैसे कहूँ! कैसे कहूँ कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ? कैसे कहूं! हर वक़्त पास आने का – तुम्हारा, मैं इंतेजार करता हूँ। बिना कुछ कहे ही तुम कितना कुछ कह जाती हो? फिर भी तुम्हारे मुस्कुराने का, मैं इंतेजार करता हूँ। कैसे कहूँ कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ? कैसे कहूं! तुम्हारे…

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हम्पी – जहाँ हर पाषाण कुछ कहता है

हम्पी – जहाँ हर पाषाण कुछ कहता है आप सब ने इस वर्ष के गणतंत्र दिवस पर विभिन्न राज्यों की झाकियां टी वी पर अवश्य ही देखी होंगी | कर्नाटक राज्य की झांकी, विजयनगर – हम्पी पर बड़ी ही सुंदरता से बनाई गयी थी | उसे देख कर मेरे लिए, व्यक्तिगत रूप से, तो जैसे…

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नई शिक्षा नीति और प्राथमिक शिक्षा

  नई शिक्षा नीति और प्राथमिक शिक्षा भारतीय शिक्षा का इतिहास अगर देखा जाए तो यह तब से है जब से भारतीय सभ्यता का इतिहास है । सभ्यता के साथ साथ निरंतर भारत में शिक्षा की अविरल धारा प्रवाहित होती ही रही है । आज से पूर्व भारतीय समाज में शिक्षा की रूपरेखा जो थी…

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अबला से आत्मनिर्भरता की राह

अबला से आत्मनिर्भरता की राह ये कहानी है शशिकला जी की जो हर लड़की की तरह एक खुशहाल और जिम्मेदार लड़की थी। छोटे छोटे सपनों ने आँखों में जगह बनानी शुरू ही की थी कि १७ वर्ष के उम्र में विवाह के बंधन में बांध दिया गया। अपनी सारी जिम्मेदारिओं को भली भांति निभाते हुए…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-सरोजिनी नायडू

विरासत: श्रीमती सरोजिनी नायडू भारतवर्ष के अमृतमहोत्सव पर यह कहना कदाचित अतिशयोक्ति नहीं होगा कि हर वर्तमान की नींव इतिहास में ही रखी जाती है, विशेषकर कला, संस्कृति, विज्ञान की। कृषि के क्षेत्र से लेकर औद्योगिकीकरण, तकनीकीकरण से डिजिटाइजेशन, मानवाधिकार के क्षेत्र में स्त्री पुरुष को सामाजिक, मानसिक एवं व्यवसायिक क्षेत्र में समान अधिकार का…

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प्रेम कहानी

प्रेम कहानी प्रेम कहानी अपनी साजन कैसे तुम्हें बताऊँ रे। तू बैठे हो पास जो मेरे, मैं कुछ कह ना पाऊँ रे। नयना जो बतिआये साजन, अधरों से लग जाऊँ रे। मैं देखूँ जो दर्पण में तो, जाने क्यों शरमाऊँ रे। रहूँ अकेले में जो साजन, खुद से क्यों बतियाउँ रे। पता नहीं क्यों हुई…

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