लॉकडाउन

लॉकडाउन कोरोना वैश्विक महामारी ने हम सब के जीवन को रोक सा दिया है । सब कुछ बंद है, आवागमन ,व्यापार , पर्यटन , उद्योग धन्धे , होटल रेस्टोरेंट , सिनेमा उद्योग , नौकरियां आदि । सब कुछ वर्क फ्रॉम होम हो गया है चाहे वह शिक्षा यो या सरकारी , प्राइवेट काम काज ।…

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पहली मुलाकात

पहली मुलाकात प्रेम आकर्षण है, एक एहसास और समर्पण है l दुनिया में आप हजारों लाखों लोगों से मिलते हैं परंतु किसी एक के आ जाने से आप की दुनिया ही बदल जाती है l यह एहसास मुझे भी हिला गया था l मैं बचपन से ही बहुत बिंदास बेपरवाह स्वभाव की थी, मेरे मस्त…

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प्राण का संबंध

प्राण का संबंध “सुनो तुम्हारी माँ का क्या नाम है?” स्कूल के प्रांगण में एक छात्रा को रोकते हुए प्रीति ने पूछा। लड़की हतप्रभ होकर प्रीति को देखने लगी। प्रीति मुस्कुराई। लड़की से कहा- “मैं समझ रही हूँ तुम्हारे दिल की बात। लोग अमूमन पिता का नाम पूछते हैं और मैंने तुमसे तुम्हारी माँ का…

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दसवें दिन ‘माँ दुर्गा’ क्यों नहीं ??

दसवें दिन ‘माँ दुर्गा’ क्यों नहीं ?? हर बार नवरात्र समाप्त होते ही दसवें दिन ‘श्रीराम’ एक नायक के रूप में उभरकर सामने आते हैं, और ‘रावण’ खलनायक के रूप में पेश किया जाता है। विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी देखा जाता है। मैंने शायद एक-दो बार ही रावण…

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Collect the Miracles

Collect the Miracles The night is crawling Up to my bed, And “King of Queens” Is all I’ve said. The lights of Manhattan Are on my screen, The jazz is cool, And the river clean. The palm tree’s swaying Behind my back, So all I’m saying Is: “There’s nothing I lack!” Wife and child, Home…

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मातु विनत वंदना हमारी

मातु विनत वंदना हमारी तुम्हे समर्पित ह्रुदयांतर से ,मातु विनत वंदना हमारी, अक्षर अक्षर बांध लिया है ,भाव- सुमन मुक्ताहारों से, स्वर वैभव के गीत रचाकर ,सरगम के स्नेहिल तारों से विश्वासों का दीप जलाये ,मातु सहज प्रार्थना हमारी . मातु विनत वंदना हमारी पाँव भटकतेजग-अरण्य में,मन बोझिल और पथ दुर्गम है, लक्ष्य शिखर को…

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शिक्षा और नयी नीति

शिक्षा और नयी नीति शिक्षा वह आधार है,जो किसी भी व्यक्ति या देश को आत्मनिर्भर बनाती है, जीवन में बेहतर संभावनाओं को प्राप्त करने के विभिन्न अवसरों के रास्तों का निर्माण करती है और उज्जवल भविष्य के विकास और उत्तरोत्तर वृद्धि के लिए दरवाजे खोलती है। वैसे तो शिक्षा के उपयोग कई हैं, परंतु, बदलते…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-भगत सिंह

शहीद भगत सिंह “गुलामी की तोड़ने जंजीर फैला रहे पंछी अब पंख हुकुमरान सजग हो जाओ बजा रहे विश्व भारती अब विजय शंख” -वंदना खुराना इन पंक्तियों से मैं चित्रण करती हूँ उस दौर का, जब हमारे वीर क्रांतिकारियों ने माँ भारती को अंग्रेजी शासनकालों से मुक्त कराया होगा। कुछ इसी तरह का विजय घोष…

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दस्तखत

दस्तखत   शाम के चार बज रहे थे। इस वक्त मेरे घर का बरामदा बच्चों से गुलजार रहता है। मैं बरामदें में आई तो देखी बच्चे उधम मचा रहे थे। दरी उन्होंने बिछा ली थी। मैं कुर्सी पर बैठ गयी और उन्हें शांत रहने के लिए कहा। रेखा की शरारतें जारी थीं। रेखा सबसे ज्यादा…

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