मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद मुंशी प्रेमचंद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं उनका कथा संसार इतना समृद्ध है कि यदि कोई साहित्य सरिता मे डूबना चाहे तो उसका रोम रोम अमृत मय हो जाए।गोदान गबन सेवा सदन निर्मला जैसी ऐसी कई कालजयी कृतियाँ मुंशी प्रेमचंद ने भारतीय साहित्य को दिए हैं जिसके लिए हिन्दुस्तानी साहित्य उनका ऋणि…

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बड़े घर की बेटी

बड़े घर की बेटी भारतीय समाज में भारतीय संस्कारों को सही स्वरूप में जन मानस के समक्ष लाने में मुंशी प्रेमचंद के अवदान को हम “मील का पत्थर” मानते हैं । उनका साहित्य उस आम समाज की कहानी कहता है जो रहता तो हर काल में है परन्तु उसे कलम बद्ध करना अपनी जिम्मेदारी समझी…

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महिला सशक्त भी है और सक्षम भी

महिला सशक्त भी है और सक्षम भी महिला सशक्तिकरण और सक्षमीकरण की नारेबाजियों का दौर है। जो मन में अनेक विचारों को जन्म देता है। मैं स्वयं एक स्त्री हूँ,.. स्त्री वर्ग के लिए आगे आकर कार्य करती हूँ, सृजन के क्षेत्र में स्त्री विमर्श से बचती हूँ क्योंकि मैं स्त्री पुरुष के विमर्श की…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- राव तुलाराम

अमर स्वाधीनता सेनानी राजा राव तुलाराम सिंह भारत का इतिहास वीरों की गाथाओं से भरा पड़ा है। इतिहास में यूँ तो बहुत से स्वतंत्रता सेनानी हुए हैं जिन्होंने स्वाधीनता संग्राम में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। उनमें कुछ सेनानियों ने अपनी वीरता संकल्प और दृढ़ निश्चय के बल पर अंग्रेजों को लोहे के चने चबाये और…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- किरण बेदी

किरण बेदी : एक व्यापक व्यक्तित्व किरण बेदी का जन्म भारत को स्वतंत्रता मिलने के कुछ ही समय बाद 9 जून, 1949 को अमृतसर पंजाब में हुआ था। यह वह समय था जब देश अपनी स्वतंत्रता के अभी शैशव काल में ही था। देश में सामाजिक और राजनैतिक हालात अभी स्थिरता पाने को अग्रसर थे।…

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…..जीवन दंश का क्या ?

…..जीवन दंश का क्या ? पढ़ती हूं ,सुनती हूं, फिर से नव पुष्प खिलेंगे, नव पल्लव फिर सज जाएंगे, पर जो टहनी सूख गई, असामयिक दावानल से, उन दरख़्तों का क्या? झुलसी वल्लरियों का क्या? जीवन की आस झलकाते परंतु अब, ठूंठ बन चुके स्याहवर्णी नवपादपों का क्या? कुछ घरों में चिरनिंद्रित मायें, रोटी जलती…

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CHRISTMAS EVE

CHRISTMAS EVE This cold winter day offers A gift – shooting and twinkling like the first star. Joy –childish but so justified on that day, Hope – as green as a mistletoe, Faith which can move mountains, But often so tiny and fragile. And Love-always the biggest, Although you can find it in a crib….

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हाजी मियां

हाजी मियां   उनका नाम हाजी मियां था, पर उन्होंने कभी हज नहीं किया था । गरीबी की मिट्टी में पले उनके परिवार की एक ही तीर्थयात्रा थी ,रोटी का इंतजाम। शायद इसी स्थिति को भांप कर , उनकी दादी ने उनका नाम ‘हाजी’ रख दिया था , ताकि नाम सुनकर ही घर में काबा…

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फागुन की बयार

फागुन की बयार छाया है बसंत चहुंओर बही है फागुन की बयार धरती ने ओढ़ी पीली चुनरिया हुलसे है जियरा हमार पूरी धरती है लाल-लाल चारों ओर उड़ा गुलाल नीले,पीले, लाल हो रहे सभी के गाल और द्वार चढा नशा भाँग का कर रहे हम आज हुड़दंग आज तो खूब सखि रे मनवा में छाया…

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बदबूदार कमरे

बदबूदार कमरे —————— स्वतंत्रता का उत्सव क्या खाक मनायें हम, अनगिनत घावों से रिस रहा जब इस धरा का तन मन। नन्हीं कलियों के कुचले जाने के खबरों का है बाजार गरम, और फिर भी कहते रहतें हैं बहुत महान है अपना वतन। इधर सड़कें सजीं, मैदान सजें और तिरंगो से सजता रहा गगन, उधर…

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