यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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“राष्ट्रपिता”

“राष्ट्रपिता” किसने जाना था कि सत्य के प्रतीक बन जाओगे अहिंसा के मसीहा भारत की तकदीर बना जाओगे ! किसने समझा था तुम्हे एक दुबली सी काया देगा भारत को आजादी का स्वरुप ! आज नत हम भारतवासी तुम्हारी अद्भुत सीख को याद करे बापू समय के इस चक्र में संसार को समझना होगा संकल्प…

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माँ है तो संसार है

माँ है तो संसार है माँ है तो संसार है बिन उसके न प्यार है। माँ की ममता तो ईश्वर का दिया उपहार है।। स्नेह अपार प्यार क्या न दिया माँ ने हमे। माँ की ममता में ही तो जीवन का सार है।। दूर होकर भी जो सदा दिल मे बसती है । एक जरा…

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सिर्फ पूजा नहीं स्वच्छता भी जरूरी

सिर्फ पूजा नहीं स्वच्छता भी जरूरी आज गुरु पूर्णिमा है। गुरु यानी आध्यात्मिक गुरु, फिजिक्स या अलजबरा सिखाने वाला गुरु नहीं। भारतीय अध्यात्म में दर्शन का बहुत महत्व है। दर्शन का अर्थ है दिव्यत्व की एक झलक पाना। कहते हैं गुरु या मंदिर की मूर्ति का एक दर्शन भी शिष्य को पवित्र कर देता है।…

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पगली

पगली धूप पड़ती थी तो पड़ती ही रहती थी जैसे उसको पड़ने का मशगला हो आया हो ,उसकी तपिश के विरोध में यहां-वहां से छायाएं निकल आती थी, मग़र उसे कभी छांव में नही देखा था, वो तपती धूप में भी उसी नल वाले चबूतरे के पास बैठी रहती थी, जिसके एक तरफ बहते पानी…

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नेचर  का उपहार 

नेचर  का उपहार  आज के इस आर्टिकल में हम आपको इन नेचुरल चीजों को इस्तेमाल करने के तरीकों के बारे में बताएंगे, जिन्हें आप घर पर बड़ी ही आसानी से बना सकती हैं- मुलतानी मिट्टी से बनाए फेस पैक मुलतानी मिट्टी में एक चम्मच गुलाब जल मिलाए और चेहरे पर लगाकर 10 मिनट तक सूखने…

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भारतीय गणतंत्र का मूल्यांकन

भारतीय गणतंत्र का मूल्यांकन कोविड से उपजी समस्याओं और दुश्चिंताओं के बीच देश गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी में है।धर्मनिरपेक्ष ,समाजवादी और लोकतान्त्रिक गणराज्य भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसी उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रपति द्वारा दिल्ली के राजपथ पर राष्ट्र-ध्वजारोहण किया जाता है।सभी भारतीय नागरिकों द्वारा यह दिवस…

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माँ

माँ तुम देतीं देतीं और बस देती ही रहीं ममता दी, प्यार दिया, संरक्षण और अधिकार भी, पीड़ा सहकर मुस्कुराने की कला, लांछनों, आक्रोशों को पी जाने की अदा, माँ कहाँ से लाई इतना बड़ा दिल कि हमारी माफ़ न कर सकने वाली भूलों पर भी, कभी न दी सजा. चोट हमें लगती थी, भर…

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