मैं नारी हूँ
मैं नारी हूँ मैं नारी हूँ, हाँ मैं नारी हूँ ईश्वर की आभारी हूँ । स्वेच्छा से मैं कभी भी कहीं भी आ जा सकती हूँ पर ससुराल प्राथमिकता है मेरी अत: कभी कभी जरूरत के वक्त मैं मैके को भी हारी हूँ …. हाँ मैं नारी हूँ । छोटे से रसोई घर की मैं…
मैं नारी हूँ मैं नारी हूँ, हाँ मैं नारी हूँ ईश्वर की आभारी हूँ । स्वेच्छा से मैं कभी भी कहीं भी आ जा सकती हूँ पर ससुराल प्राथमिकता है मेरी अत: कभी कभी जरूरत के वक्त मैं मैके को भी हारी हूँ …. हाँ मैं नारी हूँ । छोटे से रसोई घर की मैं…
कोरोना की मार और 15 अगस्त 15 अगस्त … स्वतंत्रता-दिवस …खुशी और आनंद का दिवस…अंग्रेज़ी हुकूमत से भारत की आज़ादी का, बंधन-मुक्त होने का दिवस…… मुझे याद आते हैं, मेरे बचपन के दिन.. जब मैं स्कूल में थी और 15 अगस्त का दिन आता था… वह साठ का दशक था.. आज़ादी मिले चन्द साल ही…
भारत रत्न वी.वी. गिरी वी.वी. गिरी का पूरा नाम वराहगिरी वेंकट गिरी था। यह भारत के राजनेता थे और देश के तीसरे उपराष्ट्रपति पद पर तैनात रहे। भारत के चौथे राष्ट्रपति का पदभार भी इन्होंने संभाला था। हम सर्वप्रथम वी.वी. गिरी जी के जन्म और बचपन की बात करते हैं, गिरी जी का जन्म ब्रह्मपुर…
Puteri Bungsu’s poem HALLWAY OF TIME It was a secret When the veil hid Sometimes reminds of silence Tomorrow is full unsure Hallway It wandered Counting every trace Weaving so many excuses Time Pushed me for waiting One by one traced of past Put together in a series of stories On the…
आपदा में अवसर मुद्दे की राजनीति अच्छी लगती है| हर मुद्दे पर राजनीति अच्छी नहीं लगती| इधर एक भयंकर रवायत चल पड़ी है| अति सम्वेदनशील विषयों को अखाड़े में खींच लाना और उसी पर कुकुरकाट मचाना| कोरोना को अन्य देश के नागरिक भयंकर आपदा के रूप में देख रहे हैं| आम आदमी से लेकर सरकार…
गुरू की महिमा गुरू हैं ज्ञान के सागर गुरू हैं ध्यान के गागर गुरू में लीन हों मन से तो निखरे सद्बुद्धि का आखर गुरू हैं सरस्वती उपासक गुरू हैं देश के सुधारक गुरू से दीक्षा लें सच्ची तो बनते तम के ये उद्धारक गुरू हैं युग के प्रणेता गुरू हैं कर्म के अभिनेता गुरू…
कोरोना की मार झेलता बचपन कोरोना ने पूरी दुनिया को फिर से सहमा दिया है। पिछले साल के कहर को अभी हम भूले नहीं थे। फिर भी इस उम्मीद से बंधे थे कि कुछ दिनों की बात है, फिर सब कुछ सामान्य हो जाएगा। लेकिन अब कोरोना वायरस की दूसरी खतरनाक लहर इस उम्मीद को…
बबूल वन से होकर यात्रा (विद्यालय के दिनों की आत्मकथा ) मैंने नवीं कक्षा में प्रवेश लिया था। यह वर्ष 1964 रहा होगा। उसी वर्ष 26 जनवरी के दिन मेरे प्रखंड वजीरगंज में निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गयी थी। अपने विद्यालय से भाग लेने के लिए मेरा भी चुनाव हुआ था। मेरे गाँव से वजीरगंज…
Obliterating Time The earth shall I draw again… and time shall I intoxicate… Thus shall I obliterate the minutes of your absence Of sterile seasons, of gloomy days, Of faceless months! I shall obliterate the moments when my tears Swell up! LIVES without you Shall I build anew! Nights devoid of your form Shall I…