तीज के बहाने

तीज के बहाने तीज के बहाने स्त्रियां महीनों पहले से देखने लगती हैं पंचांग करनी होती हैं उसे कई तैयारियां नयी साड़ी, सिंदूर की डिब्बी, बिंदी, चुड़ियां और भी कई सुहाग की निशानियां तीज के बहाने बनाती है परम्परागत पकवान गुजिया ठेकुआ में मिलाती हैं अपने संस्कारों की मिठास फल फूल और पूजा सामग्री से…

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रहस्यमयी रानी-मिस्र की क्लियोपेट्रा Vll

रहस्यमयी रानी-मिस्र की क्लियोपेट्रा Vll क्लियोपेट्रा मिस्र की सबसे सफल व खूबसूरत रानी थी। उसने अपनी सुंदरता , चतुराई , षड्यंत्रकारिता, कामुकता व बुद्धिमत्ता के बल पर कई वर्षों तक सफलतापूर्वक राज किया। आज भी इस रहस्यमयी शख्सियत के ऊपर शोध जारी है। यह सिलसिला थमा नहीं है। साथ ही, यह कहना भी न्याय संगत…

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श्रीकृष्ण सरल : शहीदों का चारण

श्रीकृष्ण सरल : शहीदों का चारण श्रीकृष्ण सरल के नाम से बहुत से पाठक भले ही परिचित न हों, लेकिन स्वाधीनता संग्राम और क्रांतिकारियों में रुचि रखने वाला हर व्यक्ति उनके नाम से भली-भांति परिचित है। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, भगतसिंह, चन्द्रशेखर आज़ाद, अशफाक़ उल्ला खाँ, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों और शहीदों के अतिरिक्त…

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भ्रमजाल

भ्रमजाल  हेलो !….सुरीली ?? हां!.. “कौन बोल रहा है?” “आवाज भी नहीं पहचानती हो क्या ?”- कुछ ऊंची आवाज में मानसी बोली। सुरीली सकपकाई और बोली-” यह नंबर सेव नहीं था, मैडम!” “जानती हूं ,मेरा फोन तो तुम उठा नहीं रही हो इसीलिए दूसरे नंबर से कॉल किया। खैर, छोड़ो यह सब , काम पर…

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रावण नश्वर नहीं रहा

रावण नश्वर नहीं रहा हाँ,नहीं है नश्वर रावण नहीं वह,मात्र प्रतीक है पुतलों में जिन्हें हम जलाते हैं। रावण! यत्र-तत्र-सर्वत्र है हममें और तुममें भी सब में मौजूद है पूरे ठाठ से ठहाके लगाते हुए अठ्ठास करते हुए हैरान मत होना सिर्फ मनुष्यों में है। हाँ ,रावण मनुष्यों में ही है चुकी, पशु तो पाश्विकता…

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एक होली ऐसी भी

एक होली ऐसी भी हो उठता है आसमान लाल पीले गुलाबी रंगों से सराबोर जब फागुनी बयार और शुष्क पत्तों का शोर हृदय को देता है झकझोर जब फगुआ के गीतों के बीच अश्रुओं की अविरल धारा नयनों को देती है सींच जो मां की आंखों का तारा था एक पत्नी का अभिमान सारा था…

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वे

वे   दो विपरीत  बहते छोरों को अचानक गठबंधन में बाँध दिया गया ऐसे, जैसे कोई हादसा अचानक हो जाए न प्यार था न परिचय बस दो अजनबी… न वो सूरज था न वो किरन न वो दिया था न वो बाती। न वो चाँद था और न वो चाँदनी एकदम विपरीत थे वे दोनों……

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श्रद्धांजलि

महान लोक-शिक्षक ……स्वामी विवेकानंद !! नव भारत का उदय होने दो। उसका उदय हल चलानेवाले किसानों की कुटिया से, मछुए, मोचियों और मेहतरों की झोपड़ियों से हो, बनिये की दुकान से, रोटी बेचने वाले की भट्ठी के पास से प्रकट हो। कारखानों, हाटों और बाजारों से वह निकले। वह नव भारत अमराइयों और जंगलों से,…

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मार्गरेट मीड

मार्गरेट मीड सर्वविदित है कि मानव से अधिक अस्थिर मति, विविध क्रिया कलापों में व्यस्तता एवं परिवर्तित मानसिकता जैसा अन्य कोई जीव पृथ्वी पर नहीं।समय समय पर मानवशास्त्रियों ने अनेक अध्ययन और सर्वेक्षण भी किये थे,जिनके भिन्न परिणाम सामने आये थे। मार्गरेट मीड एक ऐसी मानवशास्त्री, जिन के महान व्यक्तित्व ने उन का कद इतना…

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पेड़ वाले बाबा

पेड़ वाले बाबा “मिस्टर विपिन चौरे” – रिटायर्ड आई एफएस अधिकारी।अपना नाम सुनकर विपिन अपनी जगह से उठा और सघे हुए कदमों से स्टेज की ओर बढ़ गया। प्रोटोकॉल के अन्तर्गत की गई रिहर्सल के अनुसार माननीय राष्ट्रपति को सबसे पहले उसने सादर नमस्कार करके हाथ मिलाया।राष्ट्र‌पति ने पुरस्कार प्रमाण पत्र और पद्मश्री पुरुस्कार उसे…

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