बदला सावन

बदला सावन इस बार सावन, कुछ बदला-बदला है। ना उमंग है,ना तरंग है। लागे सब देखो वेरंग है। चारों ओर हाहाकार मचा है। मुँह खोल बिकराल खड़ा है इस बार सावन, कुछ बदला बदला है। बगियाँ फूलों से भरी, पर सूनी-सूनी हैं। ताल-तलैया तृप्त हुऐ, पर प्यासी-प्यासी हैं। इस बार सावन, कुछ बदला-बदला हैं। काले-काले…

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किश्ती और तूफ़ान

किश्ती और तूफ़ान हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | जैसे जैसे एक और गणतंत्र दिवस निकट आता जा रहा है, मेरी स्मृति के पटल पर…

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हमारी गुल्लकें

हमारी गुल्लकें ज़िन्दगी क्या है, चंद गुल्लकें जिन्हें हम लमहों, मुलाक़ातों, यादों और अहसासों के सिक्कों से भरते रहते हैं। ये भरती जाती हैं बचपन से लेकर हमारे आखिरी दिनों तक। इन गुल्लकों के कुछ सिक्के तो इतने भारी और असह्य होते हैं कि उनसे छुटकारा पाने को मन करता है और कुछ ऐसे होते…

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सुनो दिसम्बर

सुनो दिसम्बर सुनो दिसंबर, यह जो वक्त की गाड़ी तुम खींचकर यहाँ तक लाए हो बहुत भारी थी मजदूरों पर, मजबूरों पर कमजोरों पर, मजबूतों पर कितनों की कमर टूटी कितनों की संगत छूटी बेबस रहा हर एक लम्हा जीवन भी रहा कुछ थमा-थमा परेशान रहे हम सभी कैद रही हर चलती साँस पर इंतजार…

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तेरे जैसा दोस्त कहाँ

जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी! सिर्फ हमारे प्यार में ही नहीं बल्कि दुनिया के हर रिश्ते में शामिल होना चाहिए दोस्ती का एक अहम भाव क्योंकि सुना है दोस्त तब भी जान लुटा सकते हैं जब दोस्त की जान पर बन आए फिर चाहे वो सही हो या गलत, दोस्त अपनाते हैं…

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मैं जन्म से एक ब्रिटिश हूँ और मैं माफ़ी मांगता हूँ”

“मैं जन्म से एक ब्रिटिश हूँ और मैं माफ़ी मांगता हूँ” आज भी ‘नासूर बन दुखता है’ फिरंगियों को जलियांवाला बाग हत्याकांड !! “आकलैंड रायटर्स फेस्टिवल 2019 के उद्घाटन के दौरान कुछ चुनिन्दा लेखकों को 7 मिनट के भीतर एक ‘सच्ची कहानी’ सुनने के लिए आमंत्रित किया गया था। जिसमे एक आमंत्रित लेखक एवं कांग्रेस…

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नवसृजन

नवसृजन “प्रकृति जैसे बदला ले रही है” टेलीविजन पे उद्घोषिका बारबार यह वाक्य बोले जा रही थी। यह सुनकर नियति सोच में पड़ गई “क्या माँ अपने संतानों से बदला लेती है?” परंतु परिस्थिति ऐसी तो ज़रूर है कि माँ अपने संतानों को मिल रहे कुकर्मों के फल को सकपकाकर, मूकदर्शक बन देख रही है।…

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शहादत

शहादत शहादत जो हुआ सो हुआ अब तू संभाल ले खुद को दूर चलना है, रास्ता अभी बाकी आशाओं की तरह | आसान नहीं है रास्ता यहाँ जंगल भी है फूलों भरी बगिया भी, खूंखार शेर भी है मासूम तितली भी | फिर भी चलना है लक्ष्य के लिए और दिल में प्रेम लिए.. |…

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माँ ब्रह्मांड है

मां इस शब्द में पूरा ब्रह्मांड समाया हुआ है। मां शब्द अतुलनीय है मां की कोई भी तुलना नहीं हो सकती मां अपने आप में परिपूर्ण है। कोई भी बच्चा अपनी मां के बिना इस धरती पर कोई भी शिक्षा पूरी नहीं कर सकता। अपने संतान की पहली शिक्षक है मां। मां निस्वार्थ है मां…

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मानवता और सामाजिक बदलाव

मानवता और सामाजिक बदलाव..! कोरोना एक वैश्विक महामारी ही नहीं है बल्कि समस्त विश्व के समक्ष एक चुनौती है।यह केवल मानव जीवन को ही नहीं बल्कि मानव सभ्यता द्वारा निर्मित प्रत्येक क्षेत्र पर घातक प्रहार कर रहा है।कोरोना से बचाव के लिए न कोई दवाई हैं और ना ही कोई वैक्सीन।इससे बचाव का एकमात्र उपाय…

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