कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद

कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद मुंशी प्रेमचंद जी इस युग के महान कथा सम्राट हैं । मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित उनका जीवन परिचय करता है। आदर्शोनुमुख, यथार्थवाद , प्रेमचंद साहित्य की मुख्य विशेषता है । इनके जीवन का सफर बहुत कठिन था पर उनका आत्मबल ,उनका आत्मविश्वास ,इतना प्रबल था कि उन्होंने हर आंधी तूफान को…

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कासे कहूं अपने जिया की

कासे कहूं अपने जिया की   हल्की हल्की सावन की रिमझिम फुहारें पड़ रही थी, मौसम बहुत खुशगवार था । नीता का मन चाय पीने का हो रहा था पर अपने लिये चाय बनाने में आलस आ रहा था इसलिये बैठकर अखबार पढ़ने लगी, हालांकि अखबार में कुछ पढ़ने के लिये होता ही कहाँ है…

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तुम में ही खुद की तलाश है

तुम में ही खुद की तलाश है लोग कहते है तू मेरी परछाई है मैं कहती हूँ तू मुझमे है मैं तुझमे हूँ ये क्या एहसास है कि तुम में ही खुद की तलाश है ज़ब भी देखूँ तुम्हे मेरा अक्स नज़र आये आइना है मेरा तू ,तुझे देख ही श्रृंगार हो जाये ये क्या…

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मिटेगा कोरोना

मिटेगा कोरोना कैसी हाहाकार मची है कैसा कहर ये ढाया है। पूरी दुनियाँ त्रस्त हुई कोरोना ने दहलाया है। अपने अपने घर में रहना बाहर नहीं निकलना है। जंग शुरू महामारी से है देश से बाहर करना है। दुश्मन ये कमज़ोर नहीं है मानवता का घातक है। जात पांत से दूर ये वायरस इंसानों का…

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एक पाती पिता के नाम

एक पाती पिता के नाम देखा है आपने कभी? फल-भार से युक्त किसी विटप को, मीठे बीज-कोशों को अपने, जो भूमि पर बिखेरकर, खुश होता है बच्चों को चखता देख। उसके पल्लव बयार संग डोल, दर्शा रहे हों मानो उसी आमोद को। उसी पुष्पद की तरह विशाल, छायादार छवि पिता की , जिसकी छाँँव तले…

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गाड़ी के दो पहिए

गाड़ी के दो पहिए शोभा रसोई में से आवाज़ दे कर पीयू को बुला रही थी कि “बेटा, रसोई में आकर थोड़ी मेरी काम में मदद कर दे। थोड़ी सी बदाम काट कर दे दे।” पीयू रसोई में अपनी मस्ती में उछलते हुए पहुंची और बोली “क्या मां, आप क्या कर रही हो?” शोभा ने…

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खिडक़ी से धूप

खिडक़ी से धूप जीवन हार्टबीट की तरह है, जब तक उतार चढ़ाव न हो सार्थकता नही रहती। भावनाओं को आकार देना स्कूली जीवन से ही हो गया था। लिखने से ज्यादा पढ़ने के शौक ने जुगसलाई सेवा सदन पुस्तकालय से बाधें रखा । मेरी कविता यूं ही गुमनामी के अंधेरों मे गुम हो गई होती…

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पावन बेला

पावन बेला   अयोध्या नगरी में खुशियाँ ले रही हिलोरें मंगल बेला है आई आनंद छाया हर ओर जगमग जगमग दीपों से होगा उजाला हर घर हर मंदिर, हर द्वार तोरन, फूल मालाओं, रंगोली से सज उठेगा कोना कोना महक उठेंगी फूलों की मालाएं क्या गेंदा, गुलाब, मोगरा, रजनीगंधा धूप, कपूर, अगरबत्ती की महक से…

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वेलेनटाईन-डे और करफ़्यू

वेलेनटाईन-डे और करफ़्यू आज वेलेनटाईन-डे के अवसर पर भावनाओं में महकती है भीनी भीनी ख़ुशबू जिस्म-व-जान में दोड़ती है एक मदहोश लहर आत्मा के झरोखों से आने लगती है स्वर्ग की सुगन्धित पवन इस दिन की प्रतीक्षा थी पूरे वर्ष कि मिलन का अवसर मिल जाए किसी रेस्टुरां के काफ़ी टेबल पर खोल देते हम…

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