Wars for Peace

Wars for Peace Boys are playing the game of war they have wooden swords and water guns or a game with extra lives they already know that blunks can kill a chicken at the shooting range they aim straight for the heart Boys are playing the game of war they have split the atom they…

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वे सड़कें बना रहे हैं..

वे सड़कें बना रहे हैं.. गर्म तपती भट्ठियों सी , तप्त सड़कों पर कोलतार की धार गिराते , मजदूरों के झुलस रहे हैं पाँव. पर तपती धरती पर, गिट्टियां बिछाते, मानो स्नेह का लेप लगा रहे हैं, वे सड़कें बना रहे हैं. गर्म जलाते टायरों का , फैलता है धुंआ ,आग उगलता, जला रहा है…

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अपने राम

अपने राम   इनके,उनके,किनके राम, सबके होते अपने राम। कबिरा के भी अपने राम, तुलसी के भी अपने राम।   तन में राम,मन में राम, सृष्टि के कण -कण में राम। क्षण में राम, तृण में राम, सब भक्तों के दिल में राम।   केवट के भी अपने राम, सबरी के भी अपने राम। सुग्रीव…

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हिन्दी मेरी हिन्दी………हिन्दी से हिंदी तक।।।।।।

हिन्दी मेरी हिन्दी………हिन्दी से हिंदी तक।।।।।। देश स्वतंत्र नहीं था तो लोगों के हृदय में राष्ट्र जागरण की भावनाएं हिलोर मारती थी लोग हिन्दी के प्रति समर्पित थे केवल वे परिवार ही जो या तो अंग्रेजों के पिट्ठू थे या अंग्रेजों के द्वारा कराई गई कमाई से मोटे हुए जा रहे थे अंग्रेज़ी पढ़ते थे…

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वेलेंटाइन डे

वेलेंटाइन डे सफर के दौरान मिले दो शख्स ट्रेन में बैठे उदय…ने सामने सीट पर बैठी लड़की से पूछा…”कहाँ जा रही हो?” गुस्से में लाल चेहरे से तमतमाती लड़की ने जवाब दिया,”पता नहीं “। “टिकेट कहाँ की कटाई हो?” “जहाँ ट्रेन रूकेगी, मेरी किस्मत मुझे जहाँ ले जाए”।लगता है बहुत परेशान हो…? उचित समझो तो…

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जाड़े में जनतंत्र

जाड़े में जनतंत्र   गठरी बांधे धूप की, जाड़े में जनतंत्र । शीतलहर में फूँकता,कुहरा जन में मंत्र।।   रैन निहारे बस्तियाँ, बंद घरों में योग। हाड़ कँपाती ठंड में, धूप कुतरते लोग।।   धुआँ रात रचता रहा,स्याही-स्याही रूप। शीत लहर में बैठकर,कुहरा बांचे धूप।।   शैल शिखर को चूम कर,लेकर हिम रैवार। मधुर मदिर…

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दिनकर जी की जयंती पर विशेष

दिनकर जी की जयंती पर विशेष हिंदी में दिनकर-काव्य की राष्ट्रीयता अथवा राष्ट्रीय चेतना पर विद्वानों और शोधकर्ताओं ने विविध कोणों से प्रकाश डाला है। लेकिन इस राष्ट्रीय चेतना की आधारभूमि उनकी युग चेतना का मूल्यांकन कभी भी गंभीर विवेचना का विषय नहीं बनाया गया।इस युग चेतना की व्याख्या, परिज्ञान और मूल्यांकन के बिना राष्ट्रीय…

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मेरी बेटियाँ:मेरी शान

मेरी बेटियाँ:मेरी शान लोग गलत थे जो कहते थे अक्सर, बेटों से चलता परिवार है, जो कहते थे मेरा बेटा मेरे घर की शान है, आज उनका घर खाली पड़ा श्मशान है, बेटियों से ही बढ़ती हर घर की शान है, बेटियाँ ही माता पिता का अभिमान हैं। खुद रहते हैं वो अब वृद्धाश्रम में…

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नारी अधिकारियों का मजबूत कंधा-एलिस पाॅल

नारी अधिकारियों का मजबूत कंधा-एलिस पाॅल एलिस स्ट्रोक्स पाॅल का जन्म 11 जनवरी 1885 को न्यूजर्सी के माऊंट लार्रेल टाउन में हुआ। इनके पिता विलियम मिल पाॅल एक सफल व्यवसाई थे तथा विंथ्रोब परिवार के वंशज थे।इनकी मांँ टेसी पेरी पॉल सोसाइटी ऑफ फ्रेंड्स के आंदोलन में सक्रिय सदस्य थीं। एलिस दो बहन एवं दो…

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खोए अर्थ

खोए अर्थ ओ व्याकुल मन! चल ढ़ूंढते है, कबाड़ी के कोने से, वो रद्दी की गठरी, चल उड़ाते हैं गठरी पर जमे , यादों की धूल, उधेड़ते हैं गांठो को, शायद इसी में हो,, दीमक की चखी पुरानी, मटमैली पन्नों वाली डायरी , ओ व्याकुल मन! चल ढ़ूढते हैं, कुछ लिखे , कुछ कोरे कागज,…

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