पीपल का पेड़

पीपल का पेड़ पीपल का पेड़, टीलेके उस पार खड़ा , वह पीपल का पेड़, जिसकी पत्तियां सुबह की रोशनी में, पारे सी झिलमिलाती हैं, नितांत अपना सा लगता है, जिसके सूखे, लरजते पत्तों में, नजाने कितनी यादें छिपी हैं, यह पेड़ हमारी आस्था व् विश्वास का प्रतीक ही नहीं, किसी बूढ़े, ज्ञानी, तपस्वी सा…

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इश्क रूमानियत से रूहानियत तक

  मेरा मेहबूब नज़ाकत वो कहाँ मिलती किसी को अब दोबारा जिनपर हम मर मिटे हैं उनपर हमारा दिल है हारा हर मंज़र में वो दिखते है उनसे ही सब नज़ारा उन बिन सांस भी आए ना हमें है यह गवारा नज़ाकत कहाँ मिलती किसी को अब दोबारा जिनकी हसरतों के बूते ख्वाब रातों में…

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खुसरो दरिया प्रेम का…

खुसरो दरिया प्रेम का… हर जानी-अनजानी, प्रेम कहानी, तुम जानो या मैं जानूँ की तर्ज पर एक निजी कहानी है। हर दार्शनिक, हर कवि, हर व्यक्ति ने इसे अपनी तरह से सुलझाने की कोशिश की है, समझना चाहा है। क्या है आखिर कई कई अहसासों से भरा यह सतरंगी प्रेम? महज एक आकर्षण जो ईर्षा,…

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उठो हमारा सलाम ले लो

उठो हमारा सलाम ले लो क्या ख़ूबसूरत इत्तेफ़ाक है कि वैलेंटाइन डे के दिन ही आज हिंदी सिनेमा की वीनस कही जाने वाली मधुबाला जी का भी जन्मदिन है। शोख़, चुलबुली अदाओं के साथ-साथ साथ संजीदा अभिनय में भी माहिर करोड़ों दिलों की धड़कन मधुबाला का दिलीप कुमार साहब के साथ असफल प्रेम और किशोर…

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दिव्या माथुर-सुपर अचीवर

दिव्या माथुर -सुपर अचीवर वातायन- यूके की संस्थापक, रॉयल सोसाइटी ऑफ़ आर्ट्स की फ़ेलो, लंदन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन-2000 की सांस्कृतिक अध्यक्ष, यूके हिन्दी समिति की उपाध्यक्ष और कथा-यूके की अध्यक्ष­ रह चुकी, दिव्या माथुर का नाम ‘इक्कीसवीं सदी की प्रेणात्मक महिलाएं’, ‘ऐशियंस हूज़ हू’ और विकिपीडिया की सूचियों में भी सम्मलित है।  25 वर्षों तक नेहरु केंद्र-लन्दन में वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी के रूप…

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अभी बहुत दूर जाना

अभी बहुत दूर जाना यह हम सभी जानते हैं कि पूरी दुनिया में 8 मार्च को अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के रुप में मनाया जाता है । जिसका मुख्य उद्देश्य होता है महिलाओं को खुद से परिचय करवाना , उनके दिल में खुद के प्रति सम्मान की भावना उत्पन्न करना एवं अपने अधिकारों के प्रति सचेत…

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विश्व स्वास्थ्य दिवस और हम

विश्व स्वास्थ्य दिवस और हम आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है।इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस के प्रभाव से जूझ रही है, ऐसे में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। आज ही के दिन साल 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना हुई थी।विश्व स्वास्थ्य संगठन, जिसे डब्ल्यूएचओ (WHO)के नाम से जाना जाता…

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वन मोर लॉकडाउन

वन मोर लॉकडाउन युद्ध और महामारी, अकाल और भुखमरी ने हमें कई बार ऐसे स्तर पर ला खड़ा किया है जहां आकर इसके आगे जीवन का मतलब ही परिवर्तित हो जाता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और ऐसे समय में उसकी सामाजिकता ही विमुख हो जाती है। उसके सारे क्रिया कलाप एक एक कर…

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बिन पानी सब सून

बिन पानी सब सून (जल संचय: एक परिचर्चा) “रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून’- पानी रोमांस भी है, रोमांच भी है। पानी के बिना जीवन की कोई कहानी संभव नही है। मंगल ग्रह पर जीवन ढूँढ़ने निकले वैज्ञानिक भी पानी की ही तलाश कर रहे हैं। पानी यानि जीवन की अमूल्य धरोहर और जीवन…

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कोविड -19 और गर्भवती स्त्री

कोविड -19 और गर्भवती स्त्री आज कोविड-19 ने पूरे विश्व को अपने चपेट में ले लिया है । विश्व में बढ़ते हुए संक्रमण को संभालने और इलाज करनें के लिए हर स्तर पर विस्तार से कार्य हो रहें हैं। इस वायरस के तीव्रता को मेडिकल सेवा और रिसर्च में लगें, हर क्षेत्र के चिकित्सकगण और…

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