निर्मला

निर्मला मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित प्रसिद्ध हिन्दी उपन्यास निर्मला का प्रकाशन१९२७ में हुआ था । यह उपन्यास मुझे बहुत ही ज़्यादा पसंद है। निर्मला उपन्यास बेमेल विवाह एंव दहेज प्रथा पर आधारित है।यह बेहद मार्मिक कहानी जो दिल को छू जाती है।यह एक प्रकार से मनोवैज्ञानिक उपन्यास है। मानस पटल पर एक छाप छोड़ देती…

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महाभिनिष्क्रमण

महाभिनिष्क्रमण आखिर चले ही गए तुम हाँ बताया था तुमने जीवन का ध्येय विश्व का उद्धार बोध की पिपासा बहुत से कारण थे बस मैं ही नही थी पिछले जन्म से चाहा था तुम्हें सुमेध भद्रा बनकर वादा लिया था अगले जन्म का क्या खूब निभाया तेरह वर्षों की तपस्या का प्रसाद था ‘राहुल’ पर…

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शारदा

शारदा सारे काम निपटा कर मैं चाय का प्याला लेकर बैठी ही थी कि फोन की घंटी बजी।सरिता का फोन था..”सुमि,मैंने शारदा से तेरे घर के काम के लिए बात कर ली है..एक बार आकर मिल सकोगी?आकर एक बार आमने-सामने बात कर लेती तो…” “शारदा”–एक नाम,जो न जाने कौन सा तार छेड़ गया मन का…

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नंदा पांडेय की कविताएं 

नंदा पांडेय की कविताएं    1.तुम बन गए बुद्ध !   तुम जानते थे कि शिव ! बनना आसान नहीं है पर, तुम्हें बनना था शिव! पीना था विष !   अनन्त गुहाओं से घिरे चुप्पी के घने दौर में बात-बात पर स्याही उगलती तुम्हारी कलम जब लिखना चाहती थी मजहबी दस्तावेज ! तब तुम…

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साथी हाथ बढ़ाना !

साथी हाथ बढ़ाना ! श्रमिक हमारी सभ्यता-संस्कृति के निर्माता भी हैं और वाहक भी। हजारों सालों तक मनुवादी संस्कृति ने उन्हें वर्ण-व्यवस्था के सबसे निचले पायदान पर रखा। उन्हें शूद्र, दास और अछूत घोषित कर उनके श्रम को तिरस्कृत करने की कोशिश की गई। सामंती व्यवस्था ने गुलाम और बंधुआ बनाकर उनकी मेहनत का शोषण…

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माँ

मां गोद में जिसके जन्नत होती है वो मां होती है लुटाती है जो खज़ाना ममता व प्यार का वो मां होती है बहलाती, फुसलाती, दुलारती है तो, वो डांटती भी है डांटकर खुद आंसू बहाती और फिर रूठे को मनाती भी है बिन कहे बात दिल की हमारी वो जान जाती है समस्या हमारी…

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स्वाद

स्वाद आज कोई खास बात है क्या? कोई भी घर से नहीं जा रहा हैं। इतने बजे तक तो बहू अलका, बेटा अरविंद और पोता अरुण चले ही जाते हैं। अलका टीचर है, बेटा आई.टी कंपनी में मैनेजर और अरुण आठवीं क्लास में। तो क्या आज सब घर में रहेंगे ?यह लॉकडाउन क्या है? मतलब…

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दो मोर्चों पर स्त्री

दो मोर्चों पर स्त्री पुरूष मानसिकता वाले इस समाज में आसान नहीं स्त्री का खड़ा हो पाना स्वतंत्रता से ,बेबाक ,हँसना-मुस्कुराना । पढ़-लिख कर काबिलियत के बल -बूते बाहर पाया मुकाम, बनायी अपनी पहचान भाया तेरा कमाना, काम के लिए बाहर जाना पर नहीं रास आया , तेरा निर्णायक कुछ कह जाना दो-दो मोर्चों पर…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- रतन टाटा

रतन नवल टाटा “मैं सही निर्णय लेने में विश्वास नहीं करता। मैं निर्णय लेता हूं और फिर उन्हें सही करता हूँ।” – रतन टाटा भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण (2000) और पद्म विभूषण (2008) से सम्मानित रतन टाटा एक प्रसिद्ध भारतीय उद्योगपति हैं, जिन्होंने न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी ख्याति प्राप्त की…

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