शक्तिशाली रानी हत्शेपसुत

शक्तिशाली रानी हत्शेपसुत वस्तुतः विश्व इतिहास में मिस्र की रानी हत्शेपसुत, ईसा पूर्व काल की एकमात्र शासिका हैं जिसके बारे में जानने के लिए हमारे पास पर्याप्त स्त्रोत मौजूद हैं। पुरातात्विक साक्ष्य के द्वारा उनके बारे में बहुत कुछ जानकारियां मिलती है। हत्शेपसुत मिस्र की 18वें साम्राज्य की पांचवी फराओ थी, जिसने 1478 B.C. से…

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कोरोना की मार झेलता बचपन

कोरोना की मार झेलता बचपन कोरोना ने पूरी दुनिया को फिर से सहमा दिया है। पिछले साल के कहर को अभी हम भूले नहीं थे। फिर भी इस उम्मीद से बंधे थे कि कुछ दिनों की बात है, फिर सब कुछ सामान्य हो जाएगा। लेकिन अब कोरोना वायरस की दूसरी खतरनाक लहर इस उम्मीद को…

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पर्यावरण और त्योहार

“पर्यावरण और त्योहार “ डरे सहमे से पेड़-पौधे जा पहुंचे मानव के पास दीपावली करीब आ गई तो उनकी थीं शिकायतें खास.. पत्ते, शाखाएं, फूल और कलियाँ सबके सब कुछ घबराए थे नन्ही घास,बेलें, लताएँ, फल मुँह बनाए और गुस्साए थे-.. “हर तरफ दीवाली की खुशियाँ हैं पर हम सब सहमे से खड़े हैं अजीब…

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गुलाब

गुलाब तुम्हें तो पता भी नहीं होगा कि मेरे जीवन का पहला गुलाब जो तुमने दिया था अपने पहले प्रेमपत्र में लपेटकर मुझे उसे अबतक संभाल रखा है मैंने प्रेमपत्र के अक्षर धुंधला गए हैं कागज़ में जगह-जगह उभर आए हैं भूरे, चितकबरे धब्बे और लाल गुलाब की पंखुड़ियां सूखकर काली पड़ गई हैं मैं…

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रिश्ता

रिश्ता एक तेज हवा के झोंके की तरह उनके जीवन में आई थी अनुष्का | एकदम अल्लढ मदमस्त नवयौवना | चार्वाक दर्शन को जीवन का आधार मनाने वाली | सीधे-साधे उत्कर्ष के जीवन में एक तूफान बनकर कुछ तीनों के लिए आई और उसके सम्पूर्ण जीवन को है बदलकर रख दिया | उत्कर्ष उठो! कितना…

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हमारी सांस्कृतिक ‌भूमि अयोध्या नगरी 

हमारी सांस्कृतिक ‌भूमि अयोध्या नगरी  परमपुज्य‌ अनंतश्री‌ विभूषित योगी सम्राट श्री श्री‌ १०००८. श्री‌ देवरहा बाबा ‌जी महाराज ‌ने वर्षों ‌पूर्व प्रयाग‌राज‌‌ के कुंभ के‌ मेले‌ मे‌ संतो‌ ,राजनितिज्ञों और‌ आम‌ जनता की जिज्ञासा एवं प्रार्थना को स्वीकार करते हुए ये सांत्वना ‌दी थी कि‌,,,”अयोध्या ‌मे‌ं राम‌जन्मभूमि पर‌‌ मंदिर का‌ निर्माण अवश्य ‌होगा‌। जन जन…

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श्रद्धांजलि

योग्यता का सम्मान अमीर गरीब शिक्षित अशिक्षित योग्य अयोग्य रोजगार बेरोजगार कर्मण्य अकर्मण्य शोषक शोषित शासक शासित स्वामी सेवक दो ही रूप विद्यमान हैं इस संसार में सदियों से इसी चक्र में समाज का हुआ विकास भी और कालक्रमानुसार विभक्त हो गया समाज कई टुकड़ों में उन्नत होते गई अज्ञानता से आत्याचार शोषण कुप्रथा संकीर्ण…

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प्रेम की पूरकता

प्रेम की पूरकता तुम कोई गीत लिखो तुम कोई गीत लिखो, और मै गाऊं, गीत माटी के, गीत फसलों के, गीत सुबह-शाम ,गोधूली-विहान के. तुम कोई सूरज गढ़ों, और मै .. किरणों का परचम सजाऊं, मन की मञ्जूषा में यादों के साये हैं, भूले बिसरे नगमे बादल बन छाये हैं, जीवन के आँगन में तुम,…

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हम तुम

हम तुम हम तुम जब मिले थे कितने अंजान एक दूसरे से बिल्कुल दो अजनबी से धीरे धीरे हुई जान पहचान कभी नोंक झोंक कभी तीखी तकरार कभी गुस्सा कभी सुलह यूँ कब फिर बन गए दोस्त और रंग गये एक दूजे के प्यार में खबर भी न हुई यूँ वक्त लेता रहा इम्तिहान कई…

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