तीसरी दुनिया की इन्सान

तीसरी दुनिया की इन्सान जी.. सुनो .. मैं एक अलग दुनिया की इन्सान हूं. जो बिन नींव के महल बनाती हूं.. और ताउम्र उनके टिक जाने ……..का इंतजार भी करती हूं. समुन्दर से आकाश में तारों की इस बाढ़ में.. देखो.. इक दिया .लिये….. खडी़ हूं मैं.. दुखों की इस बगिया का .. अश्रु सिचंन…

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होली में

होली में जाहिर हम जज़्बात करेंगे होली में तुमसे खुल कर बात करेंगे होली में ।। तुम उसको आंखों आंखों में पढ लेना हम जो इजहारात करेंगे होली में ।। खोल के दिल के दरवाजों को तुम रखना पेश तुम्हे सौगात करेंगे होली में ।। खुशबू से भर देंगे तेरे दामन को फूलों की बरसात…

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आज बिरज में, होरी रे रसिया

आज बिरज में, होरी रे रसिया होटल के कमरे की बालकनी से समुद्र की मचलती लहरों में खोई बैठी थी कात्यायनी। शुभेन्दु ने आकर कहा ‘हम कल नहीं जा सकते गोवा से।’ लेकिन क्यों… हमारी टिकट तो कन्फर्म है। पूछा कात्यायनी ने। वो … राजभवन से यह आमंत्रण आया है। होली मिलन समारोह में आपका…

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होली- जनकल्याण का प्रकृति पर्व

होली- जनकल्याण का प्रकृति पर्व प्रकृति पर्व होली रंग राग उमंग उत्साह और सामाजिक समरसता का सुंदर संयोजन है,,, जीवन का ऐसा सुखद संदेश है,,जिस में बसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति के रुप में विलक्षण बदलाव आता हैं,धरती अपना आपादमस्तक श्रृंगार करती हैं,,नीले आसमान में बिखरी बाल अरुण की लालिमा ,,वृक्षों की हरीतिंमा,फूलों…

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स्त्री विमर्श के बहाने

स्त्री विमर्श के बहाने स्त्री विमर्श, महिला सशक्तिकरण और वीमेंस लिब यह सब कुछ ऐसे शब्द हैं जिनकी चर्चा आजकल जोरों पर है या दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि आधुनिक समय में सबसे ज्यादा ट्रेंड करने वाले शब्द हैं, जो कि बहुत आवश्यक भी है। महिलाओं पर पुरूषों के राज करने की…

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होली के रंग

होली के रंग चहुँ ओर फैला उल्लास फाल्गुन का ये सुंदर मधुमास होली आयी होली आयी ढोलक-मृदंग सब रस लाई खिले पलाश हैं लाल कोयलिया की कुहू कुहू गान अधरों ने छेड़ी जो तान… मौसम हुआ गुलनार सुखद लगे है बयार रास विलास को लाये होली घन बरसत रंग फुहार उन्मुक्त प्रेम भरे दिलों में…

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पलाश

पलाश ’’माँ…….माँ ………. हमारे खेत की मुँडेर पर जो पेड़ लगे हैं उन पर कितने सुन्दर फूल आऐं हैं, देखा तुमने?” “वह तो हर साल आते हैं……. इन्हीं दिनों, होली के समय……… टेसू कहते हैं उसे….” “माँ….उन फूलों का रंग कितना सुन्दर है, गहरा पीला…नारंगी…….. कहीं कहीं काले धब्बे हैं पर माँ ऐसा लग रहा…

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नारी !

नारी ! प्रेम और ममता की मूर्ति त्याग और बलिदान का एहसास निज आंचल में समेटे सारी धरती सारा आकाश! जिसकी आंखों में है करुणा सहनशक्ति है जिसकी परिभाषा, निराशा के तम की जो दूर करे नारी ही है वो आशा!! नारी! पहचान है कोमल भावनाओं की तो कभी कठोरता की गर ये जननी है…

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भई अपनी तो बस अब हो ली !!

भई अपनी तो बस अब हो ली !! धूल उड़ाना रंग लगाना धमाचौकड़ी खूब मचाना , रंगो से भरी पिचकारी से अपनों गैरों को रंग जाना, अब कहां वो बेफिक्री के रंग कहां अब दिल के हमजोली, अब कहां वो बचपन की होली वो मस्तीखोरी वो हंसी -ठिठोली!! मां के हाथ के वो दही बड़े…

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