पहली कविता

पहली कविता बचपन के भावाें को सहेज अपने नन्हें हाथाें से लिखी मैने तितलियाें पर एक कविता । खुशी से थिरकती ,उछलती पहुॅंची पिता के पास कहा- पिता देखाे मैंने की है रचना लिखी है मैने कविता , पिता ने हॅंसकर माथा चूम लिया कहा,मेरी लाड़ली है यह मेरी प्यारी सुन्दर कविता । यह सुन…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- सुभाषचंद्र बोस

स्वतंत्रता संग्राम के अविस्मरणीय योद्धा :नेताजी सुभाष चंद्र बोस जब हम आजादी की लड़ाई के माध्यम से स्वतंत्र भारत का सपना देख रहे थे, उस समय हमारे बीच एक ऐसा शख्स था , जो स्वयं में पूर्णतः आश्वस्त था कि आजादी तो हमें मिलेगी। उसके लिए हर्जाना भी भुगतना पड़ेगा । लेकिन आजादी को मिलने…

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एक सशक्त कथा ‘पंच परमेश्वर ‘ : आज भी सामयिक

एक सशक्त कथा ‘पंच परमेश्वर ‘ : आज भी सामयिक ” हमारी सभ्यता, साहित्य पर आधारित है और आज हम जो कुछ भी हैं, अपने साहित्य के बदौलत ही हैं।”- यह उद्गार है महान साहित्यकार प्रेमचंद का, जो उनकी रचनात्मक सजगता और संवेदनशील साहित्यिक प्रेम को दर्शाता है। प्रेमचंद हिंदी साहित्य का एक ऐसा नाम…

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मजदूर

मजदूर जिसके सर पर छत है खुले आकाश का,होता रहता वज्रपात, फिर भी वह आत्मविश्वास से लबरेज है , वह है मजदूर। कंधों पर सपनों का बोझ ढो रहा, चला जा रहा मंजिल है दूर, अपने पसीने से भूमि सींचता,है श्रम से थक कर है वह चूर। अपने हथौड़े से करता एक-एक प्रहार,रखता जाता एक-…

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कुछ कही कुछ अनकही 

कुछ कही कुछ अनकही    एक थी केतकी ,पहाड़ों की खुशनुमा वादियों में अपने रूप रंग की खुशबू बिखेरती,हिरनी सी कुलांचें भरती, इस बुग्याल से उस बुग्याल तक दौड़ती चली जाती थी बस अपने आप में खोई हुई,अपने आप में मगन।दीन दुनिया से कोई वास्ता न था बस अपनी ही धुन में किसी भी टीले…

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वतन से दूर

वतन से दूर वतन से दूर हूँ लेकिन अभी धड़कन वहीं बसती… वो जो तस्वीर है मन में निगाहों से नहीं हटती… बसी है अब भी साँसों में वो सौंधी गंध धरती की मैं जन्मूँ सिर्फ भारत में दुआ रब से यही करती… बड़े ही वीर थे वो जन जिन्होंने झूल फाँसी पर दिला दी…

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ममता कालिया से सन्दीप तोमर की साहित्यिक चर्चा

ममता कालिया से सन्दीप तोमर की साहित्यिक चर्चा ममता कालिया हिंदी साहित्य की प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। वे कहानी, नाटक, उपन्यास, निबंध, कविता जैसी अनेक साहित्यिक विधाओं में बराबर दखल रखती हैं। हिन्दी कहानी के परिदृश्य पर उनकी उपस्थिति सातवें दशक से निरन्तर बनी हुई है। लगभग आधी सदी के काल खण्ड में उन्होंने 200…

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Holy lamentation- PIETA

Holy lamentation- PIETA The heavy and embarrassed look imprisons the sadness of the moment The mourning of life The Holy Virginity captivates and invites The inanimate Divine Body completely surrendered looks eternally youthful perpetually moving The pain of the soul overflows and the Heavenly Kingdom receives the only truth crowning with glory our passions and…

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AN AWAKENING

AN AWAKENING Spring painted in water colours now, An awakening that gardens miss Spring blooms, Green parks,serene woods,open spaces, Forest,nursery,horticulture sites in gloom. Playgrounds,a meeting place for young and old, Vanished to caprice of hoteliers,commercial builders, For skyscrapers,shopping malls,night clubs sold, Graveyard of Nature now on concrete shoulders. Population,corruption,materialism flourish in gaiety, The vultures of…

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