बड़ी बहू

बड़ी बहू “अरे सुनती हो अम्मा! सोनू मोनू के लिए बड़ा अच्छा रिश्ता मिल रहा है।” राम प्रसाद जी ने मां को बड़ी प्रसन्नता से बताया। उनका एक एक अंग उनकी प्रसन्नता को प्रकट कर रहा था। मां अपनी बहू को आंख के इशारे से पास में बुलाती हुई बोली,”अरे किसने बताया है रिश्ता और…

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नयी दिशा

नयी दिशा धूप-गुगुल के सुगंध से सुवासित और स्त्रियों के शुभ मंगल गान से गुंजायमान था हरिपुर गांव का वातावरण। लाल-पीली साड़ियों में स्त्रियाँ, धोती-कुर्ते में पुरुष और रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चे-बच्चियाँ उत्सव सा माहौल बना रहे थे,उनके परिधान सुख-समृद्धि की गवाही दे रहे थे।सब के चेहरे से संतुष्टि और खुशी झलक रही थी।अवसर…

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महारानी विक्टोरिया

महारानी विक्टोरिया यूँ तो माँ भारती की वीरभूमि में कई महानायिकाओं ने जन्म लिया है। किन्तु विश्वमंच भी ऐसी कई महान विभूतियों से भरा पड़ा है। झोपड़ी से लेकर महलों तक में इन वीरांगनाओं की प्रखर ओजस्वी गाथाएँ आज भी गाई जाती हैं। इनकी विशेषताओं और जज़्बे ने इतिहास रच डाला है। भारत की रानी…

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प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना 

प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना  हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो मान्यता मिली है उसका एक मूल कारण है प्रवासी भारतीय लेखक, जो एक लम्बे समय से भारत की भाषा, कला और संस्कृति को विदेशों में फैलाने का महत्वपूर्ण प्रयास करते आ रहे हैं। समय तेज़ी से बदल रहा है, ज़ाहिर है कि हमारे…

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शत शत नमन अमर सुभाष

महानायक जिस समय महात्मा गांधी अहिंसा के ध्वजवाहक बन सारे विश्व में चर्चा के केंद्र बिंदु बने हुए थे, ठीक उसी वक्त गुलामी की जंग छुड़ाने के लिए साम्राज्यवादियों को झुलसा देने वाली आंच की आवश्यकता का अनुभव करनेवाली उग्र विचारधारा का समर्थन करने वाले सुभाषचंद्र का राष्ट्रीय आंदोलन के क्षितिज पर होना ही एक…

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गणतंत्र का सबसे मजबूत अस्त्र शिक्षा

गणतंत्र का सबसे मजबूत अस्त्र शिक्षा 72 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विशेष शुभकामनाएं। 21वीं सदी का पहला गणतंत्र, युवा भारत के सपनों का गणतंत्र, अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाता, राज करता भारतीय गणतंत्र, जन गण मन तक राष्ट्रीयता के संदेश पहुंचाता गणतंत्र । हमारी शैक्षणिक विरासत पर हमें गर्व है…. नालंदा तक्षशिला…

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भारत का मजबूर मजदूर

भारत के मजबूर मजदूर “चढ़ रही थी धूप, गर्मियों के दिन, दिवा का तमतमाता रूप, उठी झुलसती हुई लू, रूई ज्यों जलती हुई भू, गर्द चिनगीं छा गयी, प्रायः हुई दुपहर, वह तोड़ती पत्थर..” आप सबमें से कुछ लोगों ने महाकवि निराला की यह कविता सुनी होगी और मेरा दावा है जब भी आपने सुनी…

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हार कभी न मानी

  हार कभी न मानी   राह कठिन है जीवन की पर हार नहीं मानी है. पर्वत-सी ऊँची मंज़िल पर चढ़ने की ठानी है. जीवन के पाँच दशक पार हो जाने के बाद जब अपने जीवन को एक द्रष्टा के तौर पर देखती और विश्लेषण करती हूँ तो लगता है एक व्यक्तित्व वस्तुतः अपने माता-पिता…

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मां कभी अबला नही होती

मां कभी अबला नही होती स्त्रियों को देवी कह कर पूजने वाले भारत में महिलाओं का जीवन अत्यंत ही संघर्षपूर्ण रहा है।हमारे जिस समाज में महिलाओं को हमेशा एक अबला नारी के रूप में देखा जाता है।आज मैं उसी समाज की एक ऐसी महिला की बात करूंगी, जिसको मैंने अपने बचपन से लेकर आज तक…

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