सरिता सुराणा की कविताएं

सरिता सुराणा की कविताएं १.आओ अमृत महोत्सव मनाएं आओ अमृत महोत्सव मनाएं आजादी की गौरव गाथा गाएं। याद करें आजादी के रणबांकुरों को गुमनामी के अंधेरों में खोए उन वीर शहीदों को श्रद्धानत हम शीश नवाएं। आओ अमृत महोत्सव मनाएं।। न भूलें बाल, पाल और लाल के साहस को भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदानों…

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Father’s Day

मेरे आदर्श और मैं उनकी छाया पापा के बारे में मैं क्या कहूं। दुनिया के सबसे अच्छे पिता थे। मेरे सबसे अच्छे मित्र सबसे अच्छे सलाहकार और सबसे अच्छे मार्गदर्शक थे। मैं जो कुछ भी हूं उन्हीं के कारण हूँ।पिता जी की सबसे अच्छी बात थी कि वह अपने बच्चों के साथ समय बिताते थे…

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काश यूँ भी कभी

काश….. यूँ भी कभी सोचती हूँ काश मैं भी सांता बन पाती । हर जीवन में प्रेम अमृत की गंगा मैं बहाती । रोतें बच्चों के आँखों से सारे आसूँ छीन लाती उनके कोमल अधरों पर गीत बन गुनगुनाती।। जीनव धूप में थके किसान पिता की चिंता मैं मिटाती धरती माँ की आँखों से दर्द…

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ये तब नहीं समझा

ये तब नहीं समझा मेरी दादी, जिन्हें हम ईया बुलाते थे पाँच फीट से भी कम उनकी हाईट थी पर किसी धोखे में न रहना इच्छाशक्ति में वह बिल्कुल डायनामाइट थीं लंबे वक्त से वैधव्य झेलते हुए उस छोटी, बेहद दुबली सी काया में कमाल की सेन्स ऑफ फाईट थी बेटियों की शादी, इकलौते पुत्र…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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मेरे अंतस के बुद्ध

मेरे अंतस के बुद्ध बुद्ध ना सिर्फ कपिलवस्तु में थे और ना ही मात्र कुशीनारा में, बल्कि वो तो सदैव से ही साधनारत थे मेरे भी मन की सुप्त गुफाओं में, क्योंकि महसूस करती हूं मैंने भी अक्सर वो असहनीय वेदना जो बूढ़े , बीमार और लाचार को देख कर उमड़ती है, गरीबों की दयनीयता…

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Bharat ke mahanayak/telanga kharia/dr uma singh kislay

वीर महापुरुष तेलंगा खड़िया “धन्य हुई मिट्टी हमारी जहां सूर्य किरण सा चमका तेलंगा अंग्रेजों से लोहा ले आजादी का मार्ग दिखाया तेलंगा ” सोने की चिड़िया कहलाने वाले हमारे देश भारत ने लगभग एक हजार साल की गुलामी झेली । हमारी संस्कृति एवं प्राकृतिक परिवेश, हमारी राजसी ठाठ बाट, राज वैभव एवं आर्यव्रत संस्कृति…

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यू आर माय वैलेंटाइन

    यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और…

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देश सर्वोपरि

  देश सर्वोपरि देश है घर मेरा देश है घर तेरा फिक्र खुद की अगर है बचा लो इसे राह रौशन रहे चाह रौशन रहे तुम बनो सारथी और सँभालो इसे ! गाय ,गंगा , हिमालय की हो आरती , माँ से बढ़कर है हम सब की माँ भारती , आओ वंदन करें अभिनंदन करें…

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