हां मैं प्रेम में हूं
हां मैं प्रेम में हूं प्रेम में हूँ..! हां मैं प्रेम में हूं..! स्वयं के..! और लगता मुझे… ये सारा संसार है प्रेममय…! शबनमी रेशमी एक सूत.. एक धागा महीन सा..! जुड़ता जोड़ता… रूहों की खुशबूओं से.. रूहों को… और रूहानियत से.. सराबोर ये ब्रम्हांड…! कल कल करता झरने सा…! अकूत स्तोत्र के खजानों संग……