भारतं त्वम् भारतं

  भारतं त्वम् भारतं विश्व का इतिहास देखो खुद को सबके साथ देखो सूर्य की पहली किरण से तुमने जग को रौशनी दी जानता है जग ये सारा मन में मानवता भरा है सभ्यता का सूर्य भारत ज्ञान की नव चेतना है प्रण-प्रतिज्ञा प्रेम-पावन कर लो तुम प्रण-प्राण से कल का भारत आज तुमको फिर…

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हमारी त्वचा

हमारी त्वचा स्वस्थ एवं सुंदर त्वचा, निखरा हुआ रंग हरेक की चाहत होती है। आइए पहले जानते हैं कि आखिर यह त्वचा है क्या? त्वचा शरीर का वाह्य आवरण है जिसे एपिडर्मिस भी कहते हैं। यह शरीर प्रणाली का सबसे बड़ा अंग है और उपकला उत्तक की कई परतों द्वारा बनता है ।अंतर्निहित मांसपेशियों, अस्थियों,…

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औरत ,औरत की दुश्मन

प्रायः यह जुमला सुनने को मिल ही जाता है जब कभी किसी औरत को दूसरी औरत द्वारा प्रताड़ित या परेशान किया जाता है। काफ़ी लोगों का यह मानना है कि अधिकतर औरत ही औरत की परेशानी का कारण होती है। यदि हम आस – पास नज़र डालें और औरतों के प्रति हो रहे अपराधों के…

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दीप जलायें

दीप जलायें कोई न होअन्धविश्वासी ऐसे मानव को सजग बनायें, आओ नव सृजन कर एक युग बनायें, कोई भूखा न सोये ऐसा कुछ कर जायें आओ मिल दीनमुक्त बान्धव बनायें, कोई गरीबी में न जीये, ऐसा निर्धन मुक्त देश बनायें, आओ मिलकर समृद्ध समाज बनायें, कोई न रहे अनपढ़ ऐसा ज्ञान -अलख जगायें, आओ मिल…

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सौलह कलाओं वाला चन्द्रमा

सौलह कलाओं वाला चन्द्रमा शरद चांदनी बरसी अंजुरी भर कर पी लो ऊंघ रहे हैँ तारे सिहरी सरसी ओ प्रिय कुमुद ताकते अनझिप क्षणों में तुम भी जी लो @अज्ञेय अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। शरद पूर्णिमा को कोजगरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा के नाम से भी…

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रास्ते और भी हैं

रास्ते और भी हैं “बोलो बाँके बिहारी लाल की जय ! बोलो बंसी वाले की जय ! जय जय श्री राधे…..!” और असंख्य स्वर एक साथ दोनों हाथ ऊपर उठाते हुए दंडवत प्रणाम करने लगते हैं। नित्य प्रतिदिन मंगला झांकी का यही दृश्य होता है। आरती आरम्भ हो चुकी है। नेत्र बन्द किए पद्मा ध्यान…

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है दुर्गा आनेवाली

है दुर्गा आनेवाली है दुर्गा आनेवाली काश फूलों से सज गई धरती सुगंध महकाए शेफाली है दुर्गा आनेवाली। न है मंडप की शोभा न है रोशनी की लड़ी न है घूमने फिरने की बारी कब थमेगी यह महामारी ? किसान का आत्महनन है जारी उसपर हल का बोझ हुआ भारी ऊपर से कर्ज की लाचारी…

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कोरोना ने सिखाया : धर्म का सही मर्म

कोरोना ने सिखाया : धर्म का सही मर्म कार्ल मार्क्स ने कहा था कि धर्म एक अफीम है । आज कोरोना काल जैसी विभीषिका और महामारी के दौर में भी कुछ लोगों ने धर्म की ऐसी व्याख्या और ऐसा अनुपालन किया है कि पुन: एक बार यह सोचने की जरूरत आन पड़ी है कि धर्म…

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आधी आबादी- पूरी आबादी की जननी

आधी आबादी- पूरी आबादी की जननी आधी आबादी पूरी आबादी की जननी है । पर फिर भी हर युग में इन्हें अपना स्थान बनाने और बचाये रखने में संघर्ष ही करना पड़ा है।खैर आज की परिस्थिति काफी अलग है या यों कहूं कि पहले से संतोषजनक है क्योंकि सुखद परिवर्तन हुआ है ।खैर…. संघर्ष आज…

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विस्थापित

विस्थापित इंसानों के भीतर एक अग्नि, जठराग्नि… बहुत तेज ताप वाली अग्नि का, धीमे – धीमे जलना, इसी जठराग्नि के वशीभूत हो, उसका चलायमान हो जाना, एक चकाचौंध भरी जादू नगरी की ओर, पर उसकी आत्मा तो वहीं रह जाती है, खेत के किसी कोने में, या गली के नुक्कड़ पर। आत्मा बहुत कम जगह…

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