अयोध्या नगरी

अयोध्या नगरी अयोध्या भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक अति प्राचीन धार्मिक नगर है। यह नगर पवित्र सरयू नदी के किनारे पर बसा हुआ है। इसे ‘कौशल देश’ भी कहा जाता था। अयोध्या बौद्ध धर्म, हिन्दू धर्म का पवित्र और प्राचीन तीर्थ स्थल में से एक है जैन धर्म का शाश्वत तीर्थक्षेत्र है। यह…

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कुछ कही कुछ अनकही 

कुछ कही कुछ अनकही    एक थी केतकी ,पहाड़ों की खुशनुमा वादियों में अपने रूप रंग की खुशबू बिखेरती,हिरनी सी कुलांचें भरती, इस बुग्याल से उस बुग्याल तक दौड़ती चली जाती थी बस अपने आप में खोई हुई,अपने आप में मगन।दीन दुनिया से कोई वास्ता न था बस अपनी ही धुन में किसी भी टीले…

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सावन बदला अपना स्वरूप ?

सावन बदला अपना स्वरूप ? काले काले बदर धुमड घुमड कर आए वर्षा रानी भी जमकर बरसी बिजली कौन्धी और जोरों की कड़की भी, सावन न्यौता जो लेकर आई मस्ती की,झूमने की भींगने और भिगाने की रूठने की, मनाने की सपनाने की ,अलसाने की। नहीं, सावन नहीं बदला अपना स्वरूप, हां, बदला झूमने का रूप…

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तेरे मेरे सपने

तेरे मेरे सपने ज़मीन के उस छोटे से टुकड़े पर पूरा एक जहाँ फैला है…. बृज और गौरा की दुनिया जिसमें सपने रूप बदल तितली से उड़ा करते हैं। पानी के इंजन की धक-धक और काले धुएँ में, बहते पानी में, धरती में दबते बीज में, अंकुरण में और नवांकुर के ऊपर आने में अनगिनत…

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काश !

काश! विमान मिलान ऐयरपोर्ट से टेक ऑफ कर इटली की सीमा को छोड़कर भारत की ओर बढ़ चुका था | विशाल और श्यामली दोनों बहुत खुश थे | भारत पहुँचकर सबसे मिलने की कल्पना मात्र से उनका मन उमंग से भर उठा था | पिछले पाँच सालों से वे अपने घरवालों से नहीं मिले थे…

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दुविधा’

‘दुविधा’ आज है नारी दिवस सुबह से ही लगा है तांता बधाई संदेशों का पर मैं हो रही हूँ दो चार दुविधा से मौका खुशी का है या फिर गम का नही कर पा रही तय मैं जब झांकती हूँ भूतकाल में देखती हूँ तृप्ता , मरियम, यशोदा, जीजा बाई होती हूॅ गर्वित कि मैं…

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पापा की तरह

पापा की तरह नहीं बन पाती कलाकार पापा की तरह फटी जेब में भी जो मुस्कुराहटें संभाल लाते थे परेशानियों के गद्दे पर भी जो रेशमी चादर बिछाते थे हर ईंट में खुद को ढाल घर हमारे लिए बनाते थे । नहीं आता हुनर पापा की तरह पसीने से तर – बतर जो जेठ की…

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हिन्दी हमारा मान है

हिन्दी हमारा मान है शीघ्र ही हिन्दी बनेगी, अब हमारी राष्ट्र-भाषा। हो यही विश्वास मन में, हम तनिक छोड़ें न आशा।। एक दिन यह बात सचमुच, सत्य होकर ही रहेगी। हिंद की भाषा किसी दिन, विश्व की भाषा बनेगी।। मान हिन्दी का रखेंगे, शान कम होने न देंगे। अन्य भाषा-भाव को भी, हम उचित सम्मान…

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माँ की याद

माँ की याद ————— तुम याद बहुत आती हो माँ। खुद में तुमकों, तुममें खुद को पाती हूँ, माँ तुम याद बहुत आती हो माँ। आती हैं याद बचपन की। जब बच्चो को करती प्यार डांट और फटकार लगाती, तब तुझको खुद में पाती हूँ माँ। तुम याद———-। हम बच्चों के खातिर, दिन भर करती…

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जात न पूछो साधू की….

जात न पूछो साधू की…. वातावरण की गंभीरता को अपने अंदर समेटते हुए मंत्र गूंज रहा था… न जायते म्रियते वा कदाचित् नायं भूत्वा भविता वा न भूयः। अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥ गंगा जब यह मंत्र पढ़कर नानाजी की तेरहवीं के कर्मकांड करवा रही थी, तब मुझे लगा कि अब नानाजी…

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