मेरी मुट्ठी में आसमां

मेरी मुट्ठी में आसमां आज जब मैं महिला सशक्तिकरण की बातें सुनती हूं तो सोचने लग जाती हूँ कि मैं कितनी सशक्त हूँ , यह समाज की महिलाएं कितनी सशक्त हैं l हम एक आधुनिक दौर में जी रहे हैं, जहां शिक्षा, सुख सुविधाएं, समाज का प्रोत्साहन सभी कुछ हम स्त्रियों को मिल रहा है…

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तुम सब कैसे जान जाती हो

जब जब उदास होती हूं पर तुम्हें ना बताती हूं, क्यों दर्द दूं अपने गम को बताकर इसलिए तुमसे छुपाती हूं, पर जादूगरी कैसी तुमको आती है मां !तुम सब कैसे जान जाती हो … जागती हूं में रातों को जब नयनों में समंदर लिए, तुम भी तो फिक्र में मेरी रात आंखों में बिताती…

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मुझे नहीं मिले गुलाब

“मुझे नहीं मिले गुलाब” आँखों की पुतलियों का रंग कत्थई था होंठों की फ़लियाँ मूंगिया रंगीं थीं गालों पर चम्पई असर लिये मैं प्रेमिका बनी शब्दों की चाल ढाल भाषा मेरे लिए हमेशा शालीन रही सिंगार और श्रंगार हमेशा सौम्य रहा प्रथम पुरूष की तरफ आकर्षण प्रकृति की तरह हुआ और प्रेम में मैं पृथ्वी…

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मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद महान साहित्यकार युग दृष्टा, कालजई कथाकार मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर हार्दिक नमन। मुंशी प्रेमचंद जी की कहानियां आज भी प्रसांगिक है। प्रेमचंद जी सर्वांगीण संपूर्णता के कुशल कथाकार कहे जाते हैं। प्रेमचंद जी कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे उन्होंने पहले उर्दू में लिखा फिर हिंदी में लिखने लगे उन्होंने बहुत…

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माँ शारदे की रहे कृपा

माँ शारदे की रहे कृपा पीले पत्तों से झरे गम सारे खिली खुशियां बन नव कलियां आया लेकर नव हर्ष नव उत्साह बसन्त ये खिली पीली सरसों चमकी सूरज की लालिमा खिली कोपलें कोमल कोमल नई पत्तियों से हुआ श्रृंगार पेड़ों का बसंत आया बन खुशियों भरे नव जीवन का दूत माँ शारदे की रहे…

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मुख़्तसर सी बात है … तुमसे प्यार है

मुख़्तसर सी बात है … तुमसे प्यार है चैत के महीने पहाड़ी क्षेत्रों में घुर-घुर का राग अलापती घुघुती विरह का कोई लोकगीत सा गाती सुनाई पड़ती है। घुघुती हमारे उत्तराखंड की बहुत लोकप्रिय पक्षी है। गौरैया की तरह ही इंसानी आवास के आसपास रहना पसंद करती है। थोड़ा आत्मकेंद्रित भी,कि अगर खाने-पीने के लिए…

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माँ तो बस माँ ही होती है

माँ तो बस माँ ही होती है आज भी याद है माँ की वह तस्वीर बचपन में ,स्कूल जाते समय टीफिन लेकर पीछे दौड़ती माँ स्कूल से आते ही खाना खिलाने के लिए घंटों मशक्कत करती माँ लुकछिपी के खेल में जानबूझ कर शिकस्त खाती माँ मेरी चिंता में हर पल अपने आपको जलाती माँ…

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हम हिन्दुस्तानी की है शान

हम हिन्दुस्तानी की है शान प्यारी “मां” की बिंदी । सबकी प्यारी हिंदी।। भारत वर्ष में चारों ओर बोलने वाली अनगिनत भाषाओं में यह कहना की कौन सी भाषा अधिक व कौन सी कम बोली जाती है। उत्तर भारत में हमेशा से ही हिन्दी बोली जाती हैं कि । अनेकों लेखक ,कवि ,संतों ने हिंदी…

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पर्यावरण में फिर से हरा रंग भरें

पर्यावरण में फिर से हरा रंग भरें आओ मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को हम हरित करें, इस बेरंग होते पर्यावरण में फिर से हरा रंग भरें। ग्लोबल वार्मिंग जो हो रहा भूमंडल नाशक है, पेड़ों के काटने से जो बनी स्तिथी नाजुक है. आओ मिलकर कोई उपाए हम त्वरित करें, इस बेरंग होते पर्यावरण में फिर…

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