भाग्यरेखा ने उकेरा

भाग्यरेखा ने उकेरा भाग्य रेखा ने उकेरा स्वप्न रेशम रूप तेरा ले रहा आकार अंतर में सलोना रूप तेरा।। मांगती रहती विधाता से सुमन रस राग भीगे। दे रहा प्रारब्ध ही यूं हो सदय उपहार मेरा।। पलक के आह्लाद पर है वाणियों का मूक पहरा। खिलखिलाती आ गयीं खुशियां, ह्रदय का मार फेरा।। अधर कोपल…

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गुलाब

गुलाब फूलों का ये राजा है सबके दिल को भाता। प्यार बांटता सारे जग को कांटों में मुस्काता। लाल गुलाबी नीले पीले कितने रंग तुम्हारे। प्यार बढ़ाते तुम आपस में सबका दिल हर्षाता।। सबके मन के बगिया में तुम प्यार खिलाते हो। मनमोहक रंगों में खिल कर सबको भाते हो। मन का भौरा गुनगुन करता…

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World environment day/nachiket parmar

  इस  चित्र को बारह वर्षीय  नचिकेत परमार ने बनाया है जिस में उन्होंने बेहद खूबसूरत, स्पष्ट और  सार्थक संदेश के साथ  चेतावनी भी दिया हैं। नचिकेत परमार विश्व पर्यावरण दिवस विध्वंसक नही संरक्षक बने समस्त ब्रह्माण्ड मे खरबो खरबो मिलों तक फैले आकाशगंगा मे जीवन का नमोनिशान नहीं न उपस्थित प्राणवायु न ही जल…

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मन और गुलाब

मन और गुलाब मन गुलाब सा कोमल सुरभित, आज कर रहा स्नेह निवेदित संग साथ का सुख चाहें हम मेरी कविता तुम्हें समर्पित मन वाणी और भाव हृदय के आज सभी तुमको को है अर्पित यह गुलाब सी रंजित कविता बने दोस्ती की मिसाल जब हम तुम बंधे एक बंधन में गुथे हुए फूलों से…

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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भारतीय शिक्षा जगत को नई दिशा दी। उनका जन्मदिन देश ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाता है। वे निष्काम कर्मयोगी, करुण हृदयी, धैर्यवान, विवेकशील और विनम्र थे। उनका आादर्श जीवन भारतीयों के लिए ही नहीं, अपितु संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। डॉ. राधाकृष्णन…

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प्रेम का पथ

प्रेम का पथ प्रकृति ने सिखाया प्रेम समर्पित भाव से बंधन मानव से मानव करे प्रेम हृदय देखो बने चंदन। नेह से बने रिश्तों का महकता है सदा प्रकाश प्रेम जोत जगे हृदय में हो जाता मन वृंदावन। ममता के पलने में झूले प्रेम आनंदित हो संतान मात पिता , गुरू सखा प्रेम ही है…

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उम्मीद की टिमटिमाती लौ

उम्मीद की टिमटिमाती लौ हुक्का चिलम बनवा लो , गले का हार बनवा लो , हाथ की घडी़ बनवा लो…… चिल्लाते हुए दढ़ियल बाबा हर उस जगह ज़रा दर और ठहर जातें , जहाँ बच्चे खड़े होते थें । ” घर के बड़े चिढ़ कर कहतें … … ये लो जी , आज फिर आ…

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समा जाये तेरे हर गुण मुझ में

समा जाये तेरे हर गुण मुझ में माँ जीवन का सार हो तुम मेरी ताल लय मीठी धुन हो मेरी तेरे जैसे बनना है, सदा रहूँ कदमों में तेरी। सदा नयन में बसती हो मेरी हृदय में विराजती मेरी जीवन से और कोई चाहत नहीं परछाई बनना है तेरी। हो धरा सी क्षमाशीला जानकी सदृश…

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माँ! तेरी दुआ चाहिए

माँ! तेरी दुआ चाहिए ज़िन्दगी है क्या ….. ? गर पता चाहिए। बस दुआओं का इक सिलसिला चाहिए।। ज़िन्दगी के मसाइल से लड़ता रहूँ। ये ख़ुदा! मुझ को वो हौसला चाहिए।। ज़िन्दगी मौत से छीन लाऊँगा मैं। उमर भर माँ, तेरा आसरा चाहिए।। आ कभी मिल मिरे माँ से, फिर बता। मुझ को क्यों, ज़न्नत…

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