बिन पिता के

बिन पिता के स्वाभिमान, सुरक्षा, स्नेह, समर्पण वटवृक्ष सी छाया जिसने की अर्पण चरणों में जिसके सब कर्म धर्म समझाया जिसने जीवन का मर्म माँ के जीवन के, जो थे परिभाषा मिली उन्हीं से अदम्य जिजीविषा निष्ठा, कर्त्तव्य, पोषण, अनुशासन मूल मंत्र सा जिसने, फूंका अंतर्मन बिन तुम्हारे अधूरा हर संकल्प तुम बिन दूजा न…

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नई राष्ट्रीय शैक्षिक नीति और उच्च शिक्षा प्रणाली

नई राष्ट्रीय शैक्षिक नीति और उच्च शिक्षा प्रणाली नई राष्ट्रीय शैक्षिक नीति (NEP) 2020 भारत में शिक्षा के सभी स्तरों पर परिवर्तनों लागू करने का प्रयास है, जिसमें देश में शिक्षा की nai समझ- स्कूलों, कॉलेजों और शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता पर बल है एनईपी ने मानव संसाधन विकास…

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हमारी लड़ाई

हमारी लड़ाई नर्स आकर जब कुलवंती के कान में यह कहने लगी तो कुलवंती को मूर्छा आ गई| उसका पूरा शरीर कांपने लगा| … “यह क्या हुआ” कहते हुए वह थहरा कर बैठ गई | कुलवंती को दांत लग गया| नर्स अपना पूरा जोर लगा कर कुलवंती को पकड़ कर सामने पड़े ओसारे के पर…

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गण-तंत्र 

गण-तंत्र  हम कितने भाग्यशाली हैं कि हम भारत की संतान हैं, जो पूरी तरह से लोकतंत्र या कहिये गणतंत्र राष्ट्र है..हमारा संविधान विश्व का सबसे विस्तृत और विशाल लिखित संविधान है. लोकतंत्र की विशेषता है कि यह जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा संचालित होता है. हमारा गणतंत्र अपने उद्देश्यों की कसौटी पर…

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महात्मा गांधीजी के महत्वपूर्ण विचार

महात्मा गांधीजी के महत्वपूर्ण विचार सर्वप्रथम महात्मा गांधी जी के संबंध में जानकारी ;मोहनदास करमचन्द गांधी (२ अक्टूबर १८६९ – ३० जनवरी १९४८) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की…

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लॉकडाउन

लॉकडाउन कोरोना वैश्विक महामारी ने हम सब के जीवन को रोक सा दिया है । सब कुछ बंद है, आवागमन ,व्यापार , पर्यटन , उद्योग धन्धे , होटल रेस्टोरेंट , सिनेमा उद्योग , नौकरियां आदि । सब कुछ वर्क फ्रॉम होम हो गया है चाहे वह शिक्षा यो या सरकारी , प्राइवेट काम काज ।…

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बुरा है

बुरा है हाँ हिंदु बुरा है न मुसलमान बुरा है जो ज़ेहन का गंदा हो वो इंसान बुरा है ए भाई मेरे ,प्यार के चल फूल खिलाएं यह तोप यह तलवार ये सामान बुरा है दोनों का लहू पीके भी प्यासा ही रहेगा ए दोस्त मेरे ,जंग का मैदान बुरा है इँसान किये जाता है…

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मिट्टी की मूरतों में देवी की खोज

‘मिट्टी की मूरतों में देवी की खोज’ इंसान की विनम्रता है कि पंचतत्त्वों से निर्मित अपने शरीर को वह मिट्टी मानता है,अपने आराध्यों की कल्पना भी वह मिट्टी से ही साकार करता है,किंतु इन मूर्तियों के लिए मिट्टी एकत्रित करना खासा मुश्किल भरा काम है। नवरात्र में जगतजननी मां दुर्गा की मूर्ति के लिए दस…

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माँ

माँ बच्चो के चुप होने से, वो बात समझ जाए बच्चो की उदासी पर, खुद आँसु बहाए वो हमारी माँ कहलाए… अपनी थकान को वो ना बताए दर्द को अपने छुपाती जाए एक आवाज देने पर वो उठ जाए वो हमारी माँ कहलाए… मायके की याद को सीने मे दबाए सबकी चिंता मे वो ना…

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Unexpected days

Unexpected days We are living in unexpected days, the whole world seized by a primary instinct of self-preservation has locked itself in and is trying to escape death. States are destitute, unprepared and obsessed with winning more and more, they behave without humanity. No cologne to put on our hands or disinfectant, not even simple…

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