मातृरुपेण हिंदी

मातृरुपेण हिंदी हे मातृरुपेण हिंदी!! हमारी मातृभाषा, हम सब की ज्ञान की दाता हो, जब से हमने होश संभाला, तूने ही ज्ञान के सागर से, संस्कारों का दीप जलाया, हर गुरुजनों की शान हो तुम, उनकी कर्मभूमि हो तुम, जिसने ज्ञान-विज्ञान,वेद-ऋचाओं, और! कर्त्तव्यों का एहसास कराया, सभ्यता-संस्कृति को जीवित रखा, देश विदेश को जोड़े रखा,…

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निःस्वार्थ प्रेम की दास्तान है वैलेंटाइन

निःस्वार्थ प्रेम की दास्तान है वैलेंटाइन ये कटु सत्य है कि प्रेम मानवीय वृत्तियों का दिव्यतम रूप है।प्रेम पाषाण ह्रदय को भी पिघलाकर सरस बना देता है उसके अभाव में सब कुछ नीरस लगता है।जिस ह्रदय में प्रेम का संचार हो जाता है उसका मन मयूर की भांति नाचने लगता है।वाक़ई प्रेम एक अछूता एहसास…

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प्रतिभाशाली रानी- एलिजाबेथ प्रथम

प्रतिभाशाली रानी- एलिजाबेथ प्रथम वे गगन सी विस्तृत,सूरज सी ओजस्वी और ध्रुव तारे सी उज्ज्वल थीं । वे उच्च चारित्रिक मूल्यों वाली सशक्त महिला थीं और एक महान रानी थी। एलिजाबेथ प्रथम का जन्म 7 सितम्बर, 1533 को पैलेस ऑफ प्लेसेंटिया ,ग्रीनविच, इंग्लैंड में हुआ था। हेनरी अष्टम और उनकी दूसरी पत्नी ऐनी बोलिन की…

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पलाश

पलाश ’’माँ…….माँ ………. हमारे खेत की मुँडेर पर जो पेड़ लगे हैं उन पर कितने सुन्दर फूल आऐं हैं, देखा तुमने?” “वह तो हर साल आते हैं……. इन्हीं दिनों, होली के समय……… टेसू कहते हैं उसे….” “माँ….उन फूलों का रंग कितना सुन्दर है, गहरा पीला…नारंगी…….. कहीं कहीं काले धब्बे हैं पर माँ ऐसा लग रहा…

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छठ सिखाता है – डूबना अन्त नहीं है

छठ सिखाता है – डूबना अन्त नहीं है छठ पूजा को महापर्व के नाम से अलंकृत किया जाता है। इसकी उपासना से आत्मिक उत्कर्ष के साथ परिवार के सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है।कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला महनीय पर्व है।सूर्योपासना के यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार…

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पर्यावरणविद

पर्यावरणविद राखी का त्यौहार आने में भले ही 2 महीने पड़े हों लेकिन भाई-बहनों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। खासकर जो बहनें अपने भाईयों से मिलो दूर बैठी हैं वो राखी से एक महीने पहले ही उन्हें राखी भेज देंगी। बात अगर राखी ट्रैंड की करें तो आजकल हर कोई इको-फ्रैंडली राखी में…

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शत शत नमन अमर सुभाष

महानायक जिस समय महात्मा गांधी अहिंसा के ध्वजवाहक बन सारे विश्व में चर्चा के केंद्र बिंदु बने हुए थे, ठीक उसी वक्त गुलामी की जंग छुड़ाने के लिए साम्राज्यवादियों को झुलसा देने वाली आंच की आवश्यकता का अनुभव करनेवाली उग्र विचारधारा का समर्थन करने वाले सुभाषचंद्र का राष्ट्रीय आंदोलन के क्षितिज पर होना ही एक…

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मां के सपने

मां के सपने कितने सपने संजोए थे तूने, हम सबके संग, कितने सपने थे तुम्हारी आंखों में, कितनी कल्पनाएं थी, तुम्हारे आंखों में चमक, जिन्दगी जीने की ललक, एक उल्लास मन में लिए, सबको संवारा बड़ी लगन से, अपनी सजग नयन से, कई सपने भी टूटे, फिर भी !! तुम मुस्कुराती रही, हम-बच्चों के संग,…

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मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद मुंशी प्रेमचंद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं उनका कथा संसार इतना समृद्ध है कि यदि कोई साहित्य सरिता मे डूबना चाहे तो उसका रोम रोम अमृत मय हो जाए।गोदान गबन सेवा सदन निर्मला जैसी ऐसी कई कालजयी कृतियाँ मुंशी प्रेमचंद ने भारतीय साहित्य को दिए हैं जिसके लिए हिन्दुस्तानी साहित्य उनका ऋणि…

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