फिर होली में

फिर होली में हुई आहट खोला था जब द्वार मिला त्यौहार । आया फागुन बिखरी कैसी छटा मनभावन। खेले हैं फाग वृन्दावन में कान्हा राधा तू आना। तन व मन भीगे इस तरह रंगों के संग। स्नेह का रंग बरसे कुछ ऐसे छूटे ना अंग। रंगी है गोरी प्रीत भरे रंगों से लजाई हुई। आई…

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छठ पर्व

छठ पर्व ये छठ पूजा जरुरी है धर्म के लिए नहीं, अपितु.. हम-आप सभी के लिए जो अपनी जड़ों से कट रहे हैं। अपनी परंपरा, सभ्यता, संस्कृति, परिवार से दूर होते जा रहे हैं। ये छठ जरुरी है उन बेटों के लिए जिनके घर आने का ये बहाना है। ये छठ जरुरी है उस माँ…

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अभी बहुत दूर जाना

अभी बहुत दूर जाना यह हम सभी जानते हैं कि पूरी दुनिया में 8 मार्च को अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के रुप में मनाया जाता है । जिसका मुख्य उद्देश्य होता है महिलाओं को खुद से परिचय करवाना , उनके दिल में खुद के प्रति सम्मान की भावना उत्पन्न करना एवं अपने अधिकारों के प्रति सचेत…

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कैक्टस

कैक्टस दस दिन के दुधमुँहे मुन्ना को गोदी में लिए, देहरी पर खड़ी संचिता, कुछ अधिक खीझ और कम भय के साथ सामने बैठक में दीवान पर लेटे सचिन को देख रही थी। उसकी सास मनियादेवी अभी-अभी पैर पटकती इसी देहरी से बाहर निकली हैं। उनके स्वर का ताप संचिता के समूचे तन से लिपटा…

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मानसिक तनाव-एक मंथन

मानसिक तनावः एक मंथन दोस्तों, हम सभी इस बात से भली-भाँति वाकिफ हैं कि मानसिक तनाव एक प्रकार का असंतुलन है जो कि हमारे दैनिक वातावरण, साथ रहने वाले लोगों के व्यवहार और इन सब के साथ, हमारे मन मस्तिष्क की प्रतिक्रियाओं का, सामंजस्य न बिठा पाने का परिणाम है, फलस्वरूप मन की शांति, भावनाओं…

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स्वागत गणतंत्र

स्वागत गणतंत्र स्वागतम सुमधुर नवल प्रभात, स्वागतम नव गणतंत्र की भोर, स्वागतम प्रथम भास्कर रश्मि, स्वागतम पुन:, स्वागतम और। जगा है अब मन में विश्वास, कि सपने पूरे होंगे सकल, कुहुक कुहकेगी कोयल कूक, खिलेगा उपवन का हर पोर। युवा होती जायेगी विजय, सुगढ़ होता जायेगा तंत्र, फैलती जायेगी मुस्कान, विहंसता जायेगा जनतंत्र। कल्पनाएं सब…

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तेंतर

तेंतर महान साहित्यकार, समाजसेवी, युगदृष्टा, युगपुरुष प्रेमचंद जी का जन्म ३१ जुलाई सन १८८० में बनारस के पास मगही गाँव में हुआ था. बचपन का नाम धनपत राय था. घोर गरीबी, सौतेली माँ के दुर्व्यवहार और  पिता की अकाल मृत्यु ने उन्हें तोड़ दिया. बमुश्किल मैट्रिक की परीक्षा दे सके. प्रतिकूल परिस्थियां भी उनके साहित्य…

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हम सुंदर दिखते हैं

हम सुंदर दिखते हैं ट्रिन ट्रिन ट्रिन… मेरी सुबह की शुरुआत ऐसी होती है। सुबह साढ़े छह बजे उठो, गैस पर चाय का पानी चढ़ाओ, उसके खौलने का इंतजार करो। परात में आटा निकालो, उसमें नमक मिलाओ और पानी डालो। फिर उसको धीरे-धीरे गूंथ डालो। चाय का पानी भभक रहा है। चाय की पत्ती डालो।…

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