बदल रही है भारत की तस्वीर

बदल रही है भारत की तस्वीर हमारा गणतंत्र -हमारी राष्ट्रीय एकता-सम्प्रभुता-और अस्मिता का एक गौरवशाली दिन, पूर्ण स्वराज्य की अवधारणा के साकार प्रतिफलन का एक उज्जवल क्षण , एक नई सुबह-जागृति की, विश्वास की,एकता व गर्व-बोध से भरे गणतंत्र की, हाथों में तिरंगे झंडे उठाये हजारों बच्चों की एक सम्मिलित आवाज ” भारत माता की…

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तुम में ही खुद की तलाश है

तुम में ही खुद की तलाश है लोग कहते है तू मेरी परछाई है मैं कहती हूँ तू मुझमे है मैं तुझमे हूँ ये क्या एहसास है कि तुम में ही खुद की तलाश है ज़ब भी देखूँ तुम्हे मेरा अक्स नज़र आये आइना है मेरा तू ,तुझे देख ही श्रृंगार हो जाये ये क्या…

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विषाणु कोरोना

विषाणु कोरोना कोरोना वायरस की आपदा विश्वव्यापी थी। इस संकट से निपटने में हमारे सक्षम प्रधानमंत्री मोदी जी की दूरदर्शिता और कर्मठता का ही परिणाम था कि हमारे देश में कोरोना वायरस उतनी तेजी से नहीं फैला जैसा अन्य देश में फैला था। मोदी जी ने देश के फस्टफ्रंट पर काम करने वाले सभी डाक्टर,…

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बड़े भाईसाहब

बड़े भाईसाहब प्रेमचंद जी की लिखी हुई यूं तो बहुत सी कहानियाँ हैं जो मुझे पसंद हैं जैसे ईदगाह, बड़े घर की बेटी, दो बैल, हार की जीत, बड़े भाईसाहब, पूस की रात, गरीब की हाय आदि। पर आज मैं “बड़े भाईसाहब” के बारे में यहाँ बताना चाहूंगी। “बड़े भाईसाहब”, कहानी दो भाइयों के बीच…

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गांधी गुजरात का!!

गांधी गुजरात का!! ना मानी हार जो करता गया वार वो, बंदूक ना गोली से प्यार की बोली से वो संत अहिंसा का करता रहा चमत्कार जो!! मन में था जिसके कुछ भी कर जाने की, हर सांस में थी उसके धुन आज़ादी पाने की, लाज बचाने भारत मां की त्याग दिया घर -बार जो,…

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हम तुम

हम तुम हम तुम जब मिले थे कितने अंजान एक दूसरे से बिल्कुल दो अजनबी से धीरे धीरे हुई जान पहचान कभी नोंक झोंक कभी तीखी तकरार कभी गुस्सा कभी सुलह यूँ कब फिर बन गए दोस्त और रंग गये एक दूजे के प्यार में खबर भी न हुई यूँ वक्त लेता रहा इम्तिहान कई…

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कोरा कागज

कोरा कागज सफेद गंदगी से कोसों दूर, दो मोटे तहों के बीच सहेज कर रखी, काली धब्बे स्याह से बची । कोरा कागज था सिर्फ कोरा। जमाने की गंदगी से महरूम था वह, रोडे हिचकोले को जानता नहीं था पहचानता नहीं था। अनगिनत लिखावटों से घिरा है अब वह। रंग रूप से अपना स्वरूप खो…

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हम सब एक चमन के फूल

हम सब एक चमन के फूल साक्षी है इतिहास हमारा गए नहीं हम भूल, हम सब एक चमन के फूल हम सब एक चमन के फूल। हम हैं हिंदू,हम हैं मुस्लिम,हम हैं सिख ईसाई, जाति धर्म के झूठे झगड़ों में हम पढ़े ना भाई, गीता,ग्रंथ,कुरान,बाइबिल सबका एक ही मूल, हम सब एक चमन के फूल…

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टिस

टिस गर्मी की तपती धूप सर्दी की ठिठुरन आंधी , तूफान या हो भीगी बारिश हर मौसम की मार सहता हूँ मैं बेबस मज़दूर क्योंकि मेहनत ही मेरा कर्म है वही मेरी रोज़ी रोटी बनाता हूँ बड़े बड़े घर, इमारतें,आलीशान बंगले उठा टोकरे मिट्टी ईंटो, गारे, सीमेंट के पर खुद के रहने के लिये होती…

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