सच्चा साथी

सच्चा साथी रीना मण्डल के घर से जोर जोर से लड़ने झगड़ने की आवाज़ आ रही थी । रात के सन्नाटे में तो आवाज़ और भी तेज सुनाई देती है।कुछ देर के बाद आवाजें बन्द हो गयी और रीना के रोने की हल्की-हल्की सी आवाजें आने लगीं । यह उनकेे घर की लगभग हर तीसरे-चौथे…

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पिता एक उम्मीद

पिता एक उम्मीद पिता -चाँद सितारों में निखर उम्मीद की किरण बन जाते है। नई उम्मीद के साथ ख़ुशियों जहाँ बसा जाते हैं । पिता,पिता के प्यार से गूँजती सारा भु मंडल हैं । उदगार सजा रखा धरती मैया है । पिता- बच्चों के दिल किताबों में प्यार सजा रखा हैं । पन्ने की हरकत…

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फागुन की बयार

फागुन की बयार छाया है बसंत चहुंओर बही है फागुन की बयार धरती ने ओढ़ी पीली चुनरिया हुलसे है जियरा हमार पूरी धरती है लाल-लाल चारों ओर उड़ा गुलाल नीले,पीले, लाल हो रहे सभी के गाल और द्वार चढा नशा भाँग का कर रहे हम आज हुड़दंग आज तो खूब सखि रे मनवा में छाया…

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ये तब नहीं समझा

ये तब नहीं समझा मेरी दादी, जिन्हें हम ईया बुलाते थे पाँच फीट से भी कम उनकी हाईट थी पर किसी धोखे में न रहना इच्छाशक्ति में वह बिल्कुल डायनामाइट थीं लंबे वक्त से वैधव्य झेलते हुए उस छोटी, बेहद दुबली सी काया में कमाल की सेन्स ऑफ फाईट थी बेटियों की शादी, इकलौते पुत्र…

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तेरे जैसा दोस्त कहाँ

जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी! सिर्फ हमारे प्यार में ही नहीं बल्कि दुनिया के हर रिश्ते में शामिल होना चाहिए दोस्ती का एक अहम भाव क्योंकि सुना है दोस्त तब भी जान लुटा सकते हैं जब दोस्त की जान पर बन आए फिर चाहे वो सही हो या गलत, दोस्त अपनाते हैं…

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Before Christmas

Before Christmas One day before Christmas comes Twenty-four hours before enjoining the Christmas carol My fingers have sung themselves with poetry I filled the sheets of my life with the lyrics of my songs Then I’m going to look for you I invite to accompany me here Feel the presence of the little Lord Jesus…

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PEACE ON EARTH

PEACE ON EARTH Christmas is a time of venerable peace, You can look at bejewelled stacks of trees, And the world often perceived as intense, When family reunions break messy fences. Snow’s candid praise bedecks the gate, Children hang their socks and wait , It is the eve of Christmas never late, Harbinger of change…

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माँ

माँ वो मां ही तो है, जिस ने सबसे पहले , सिखलाया धीरज रखना सिखलाया बिन व्याकुलता , भी संपन हो सकता है हर कार्य। सिखाया उसी ने, सरलता से जीना उलझनों के बीच रहकर भी, जीत हार के संग, समान व्यवहार का पाठ भी, सबसे पहले उसने ही पढ़ाया। मन जब दुख से घबरा…

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मुख़्तसर सी बात है … तुमसे प्यार है

मुख़्तसर सी बात है … तुमसे प्यार है चैत के महीने पहाड़ी क्षेत्रों में घुर-घुर का राग अलापती घुघुती विरह का कोई लोकगीत सा गाती सुनाई पड़ती है। घुघुती हमारे उत्तराखंड की बहुत लोकप्रिय पक्षी है। गौरैया की तरह ही इंसानी आवास के आसपास रहना पसंद करती है। थोड़ा आत्मकेंद्रित भी,कि अगर खाने-पीने के लिए…

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