राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी
राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी शर्मसार हैं हम बापू , अंधे ,बहरे और गूँगे बन कर ही रह गए , क्याें न पड़ा हमारे कानों में किसान, मज़दूर और दलित का क्रंदन, क्याें न हम देख पाए निम्न वर्ग का शोषण, क्याें न हमने आवाज़ उठाई अत्याचार के ख़िलाफ़, क्याें हम सुषुप्ति में डूबे रहे बेख़बर,…