बिन पिता के

बिन पिता के स्वाभिमान, सुरक्षा, स्नेह, समर्पण वटवृक्ष सी छाया जिसने की अर्पण चरणों में जिसके सब कर्म धर्म समझाया जिसने जीवन का मर्म माँ के जीवन के, जो थे परिभाषा मिली उन्हीं से अदम्य जिजीविषा निष्ठा, कर्त्तव्य, पोषण, अनुशासन मूल मंत्र सा जिसने, फूंका अंतर्मन बिन तुम्हारे अधूरा हर संकल्प तुम बिन दूजा न…

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प्रत्यक्ष भगवान

प्रत्यक्ष भगवान ईश्वर को किया जा सकता है महसूस मगर डाँक्टर जब देता है मरीज को जीवन दान तो दर्शन होते हैं प्रत्यक्ष भगवान के जो न बंधा होता है किसी पंथ/जाति/रंग हर सीमा से दूर मानवता का पोषक सेवा का अवतार मान/अपमान की परवाह किये बिना कर्तव्य के पथ पर अग्रसर सोनिया अक्स समर्पित…

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ज्ञान की बात

ज्ञान की बात टेलीविजन पर शंकराचार्य और मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का प्रसंग चल रहा था। जीत और हार के लिए जो मानक निर्धारित किए गए थे मुझे उस समय वह बड़े हास्यास्पद लग रहे थे। दोनों के गले में फूलों की एक-एक माला थी और जिस की माला मुरझा जाएगी उसी को हारा हुआ…

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कटहल

कटहल राम प्रसाद जी का परिवार बनारस शहर के प्रसिद्ध रामघाट पर गंगा जी के किनारे स्थित पक्का महाल सिंधिया हाउस के पुरानी हवेली के दो कमरों में किराए पर रहते थे।उनके परिवार में पत्नी बेटा ,बहू तथा छोटा नाती कुल पांच लोगों का परिवार था।उस समय लोगों में बहुत एकता,प्रेम, भाईचारा व अपनापन हुआ…

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EVER TROUBLING COVID SYNDROME : ARE WE SUFFICIENTLY SENSITIZED ?

EVER TROUBLING COVID SYNDROME : ARE WE SUFFICIENTLY SENSITIZED ? Even when hardly 500 confirmed Covid cases were registered, we declared a LockDown(L.D)on 23rd March’20.The second one was clamped on 4th April,2021. Modus Operandi of the two differed. Idea has been common: Preacutionary Measures.Health Minister gave comprehensive justifications to Parliament. The second L.D. became necessary…

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अंकुरण

        अंकुरण रिंगटोन के बजते ही फोन के स्क्रीन पर अल्फाबेट के जिन सदस्यों ने एक परिचित नाम को उकेरा, वैसे ही भय और उत्साह दोनों की ही बेमेल संगति ने हृदय के धड़कने की गति को मानो बेलगाम कर दिया। मेरी आशंकाओं के विरुद्ध फोन के दूसरी तरफ आश्वस्तिपूर्ण ध्वनितरंगें पृथ्क…

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उम्मीद की टिमटिमाती लौ

उम्मीद की टिमटिमाती लौ हुक्का चिलम बनवा लो , गले का हार बनवा लो , हाथ की घडी़ बनवा लो…… चिल्लाते हुए दढ़ियल बाबा हर उस जगह ज़रा दर और ठहर जातें , जहाँ बच्चे खड़े होते थें । ” घर के बड़े चिढ़ कर कहतें … … ये लो जी , आज फिर आ…

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माँ

माँ संस्कारों के दिव्य अलंकरण की शक्ति है माँ । स्नेह भरे संबल का सुखद स्पंदन है माँ । जीवन की ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों पर धैर्य से आगे बढ़ने की शिक्षा है माँ । जिन्दगी की कटु अनुभूतियों की मधुर अभिव्यक्ति है माँ । तुझ में है हम हममें हो तुम हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व की पहचान…

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