खोयी हुई आजादी…

खोयी हुई आजादी… भीतर गहराई से हम स्वतंत्र प्राणी हैं। लगभग। जन्म के समय हमारी स्वतन्त्रता का बोध कराने के लिए, हमें बंधन मुक्त करने को नाभि की नाड़ भी काट दी जाती है, इसी तथ्य को दर्शाते हुए कि हमारा मूल संबंध स्वयं से होता है, न कि अन्यों से। ‘स्व-तंत्र’ का मतलब है…

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लैंडलाइन प्रेम

लैंडलाइन प्रेम   यह प्रेम कहानी उस ज़माने की है जिस वक़्त मोबाइल फोन नहीं थे और लैंड लाइन के फोन के तारों के इर्द-गिर्द घूमती थी यह दुनिया। लैंड लाइन का फोन भी हर किसी के घर में नहीं होता था और लैंड लाइन का फोन रखना एक रुतबे की बात मानी जाती थी।…

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त्योहारों में उल्लास

त्योहारों में उल्लास ढूंढना हो अगर त्योहारों मे तो उसका ध्येय ढ़ूंढ़िए उद्देश्य ढ़ूंढ़िए। उपहारों के बंद डब्बों मे लेने वाले की मुस्कान देनेवाले का अरमान ढ़ू़ंढ़िए। त्योहार धर्मों का नहीं उमंग और उल्लास का होता है, बड़ी कठिन डगर है इस जीवन की ये छोटे छोटे त्यौहारों के पड़ाव ना होंगे तो हम थक…

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भारत बनाम इंडिया विकास-गाथा !!

भारत बनाम इंडिया विकास-गाथा !! अनेक नामों में इस देश का एक नाम है भारतवर्ष। इस नाम में इसका प्राचीन गौरव समाहित है। ‘अमरकोश’ में वाचस्पति का एक श्लोक आता है- “स्यात भारतं किंपुरुष च दक्षिणां: रम्यं हिरण्यमयकर, हिमाद्रेरुत्तरास्त्राय:। भद्रश्वकेतुमालो तू द्वहो वर्षो पूर्वपश्चिमो इलाव्रित्त तू मध्यस्थ सुमेरुयर्ष तिष्ठति।।” इस श्लोक के अनुसार प्राचीनकाल में…

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इसोफ़ेगस

इसोफ़ेगस   रात की पार्टी के बाद शिखा बेसुध पड़ी थी, बार्नेट अस्पताल के इमर्जेन्सी वार्ड की कुर्सी में। एक्यूट डीहाइड्रेशन। फिंचली मेमोरियल अस्पताल के वॉक-इन-सेंटर में नर्स ने शुरुआती जाँच-पड़ताल में ही अमित से कह दिया था, “शरीर पानी भी नहीं रोक पा रहा है, फ़्लूइड चढ़ाना होगा – बार्नेट के आपातकालीन वार्ड में…

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माँ

माँ मां की महिमा कोई कैसे कहे । है अपरंपार जगत में माँ ।। हर मुश्किल का हल है माँ । अनगिन पुण्यों का फल है माँ ।। अपनी हर संतान की खातिर। अमृत सा प्रभावी जल है माँ ।। माँ के जैसा कोई और नहीं मां के जैसी माँ ही है ना ।। है…

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“राष्ट्रपिता”

“राष्ट्रपिता” किसने जाना था कि सत्य के प्रतीक बन जाओगे अहिंसा के मसीहा भारत की तकदीर बना जाओगे ! किसने समझा था तुम्हे एक दुबली सी काया देगा भारत को आजादी का स्वरुप ! आज नत हम भारतवासी तुम्हारी अद्भुत सीख को याद करे बापू समय के इस चक्र में संसार को समझना होगा संकल्प…

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जल समाधि  

        जल समाधि   उस रात मैं दुखी मन से बिस्तर पर लेटी करवटें बदल रही थी | उस दिन गुलाबो चाची जी की तेरहवीं थी | सबके मुंह पर एक ही बात थी कि गुलाबो चाची बड़ी धर्मात्मा थीं | उन्हें अपनी मृत्यु का अहसास हो गया था, इसीलिए उन्होंने प्रातः चार…

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