मातृरुपेण हिंदी

मातृरुपेण हिंदी हे मातृरुपेण हिंदी!! हमारी मातृभाषा, हम सब की ज्ञान की दाता हो, जब से हमने होश संभाला, तूने ही ज्ञान के सागर से, संस्कारों का दीप जलाया, हर गुरुजनों की शान हो तुम, उनकी कर्मभूमि हो तुम, जिसने ज्ञान-विज्ञान,वेद-ऋचाओं, और! कर्त्तव्यों का एहसास कराया, सभ्यता-संस्कृति को जीवित रखा, देश विदेश को जोड़े रखा,…

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अंतर्नाद

अंतर्नाद आप सबों की शुभकामनाओं से आज मुझे आंतरिक हर्षोल्लास है कि मेरा प्रथम काव्यसंग्रह”अंतर्नाद” जो मेरी १५१ कविताओं का संग्रह है,निकट भविष्य में प्रस्तुत होने वाला है। यह काव्य संग्रह मेरे पिता स्वर्गीय ‘श्री हरीश चंद्र सर्राफ’को समर्पित है।भले ही वो भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, पर दिल में आज भी जीवित…

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वर दे, वीणा वादिनी वर दे !

वर दे, वीणा वादिनी वर दे ! अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः। अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा॥ (ऋग्वेद 10/ 125) मैं (वाग्देवी) रुद्रों (प्राणतत्त्व, एकादश रुद्र), वसुओं (पृथ्वी आदि आठ वसुओं), आदित्यों (बारह आदित्य सूर्य) तथा विश्वेदेवों (सभी देवों, सभी दिव्य विभूतियों) के रूपों में विचरण करती हूँ। मैं मित्र और वरुण (सौरतत्त्व और जलीय तत्त्व) तथा इन्द्र…

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घर में भेड़िये

घर में भेड़िये   रात भर इमली दर्द से कराहती रही,पोर पोर फोड़े की तरह पिरा रहा था।उसे जानवरों की तरह पीटा गया।कसूर—नारी निकेतन की संचालिका के पति को उसने चाँटा मारा। उसकी हवस की टपकती लार के विरोध में —- “माई,हमको ये बापू बहुत मारता है,चिमटी काटता है,उसकी बात न माने तो हाथ मरोड़ता…

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हिंदी दिवस

हिंदी दिवस हिंद देश की हिंदी भाषा कितनी है आसान, सूरज जैसी बिंदिया है मेरे भारत की शान। बनाओ राष्ट्र भाषा, करें हम सब अभिलाषा। सबसे प्यारी सबसे मीठी हिंदी हिंद की आन, सूर कबीरा और रसखाना मीरा की पहचान। बनाओ राष्ट्र भाषा, करें हम सब अभिलाषा। भाषाओं की बड़ी बहिन है नहीं किसी से…

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जुझारू नेत्री-रोज़ा लुईज़ मक्कॉली पार्क्स

जुझारू नेत्री-रोज़ा लुईज़ मक्कॉली पार्क्स रोज़ा लुईज़ मक्कॉली पार्क्स (4 फ़रवरी 1913 – 24 अक्टूबर 2005) अफ़्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकार कार्यकर्त्ता थीं जिन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस ने “द फ़र्स्ट लेडी ऑफ़ सिविल राइट्स” (नागरिक अधिकारों की पहली औरत) और “द मदर ऑफ़ द फ्रीडम मूवमेंट” (आज़ादी लहर की माँ) नामों से पुकारा। रोजा पार्क्स…

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अपने राम

अपने राम   इनके,उनके,किनके राम, सबके होते अपने राम। कबिरा के भी अपने राम, तुलसी के भी अपने राम।   तन में राम,मन में राम, सृष्टि के कण -कण में राम। क्षण में राम, तृण में राम, सब भक्तों के दिल में राम।   केवट के भी अपने राम, सबरी के भी अपने राम। सुग्रीव…

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प्रेमचंद की कहानी”बड़े भाईसाहब”- एक विश्लेषण

प्रेमचंद की कहानी”बड़े भाईसाहब”- एक विश्लेषण कहानी का सार… प्रेमचंद जी की सभी सशक्त और जीवंत रचनाओं में मुझे “बड़े भाई साहब” नामक कहानी अत्यंत ही आकर्षित करती है। इस कहानी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पाठकों का मनोरंजन करती हुई आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और शिक्षा प्रणाली पर चोट…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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