बूढ़ी काकी

बूढ़ी काकी हिंदी कहानी विधा में मुंशी प्रेमचंद का नाम सर्वोपरि है | मानव समाज की अनुभूतियों संवेदनाओं, एवं व्यवहार का यथार्थ चित्रण करती हुई प्रेमचंद जी की रचनाएं पाठक के हृदय को सीधे स्पर्श करती हैं | पाठक स्वयं को कहानी का एक पात्र समझकर उन कहानियों में खो सा जाता है | आगे…

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घर में भेड़िये

घर में भेड़िये   रात भर इमली दर्द से कराहती रही,पोर पोर फोड़े की तरह पिरा रहा था।उसे जानवरों की तरह पीटा गया।कसूर—नारी निकेतन की संचालिका के पति को उसने चाँटा मारा। उसकी हवस की टपकती लार के विरोध में —- “माई,हमको ये बापू बहुत मारता है,चिमटी काटता है,उसकी बात न माने तो हाथ मरोड़ता…

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काया की माया

काया की माया रामबाण से घायल होकर पड़ा भूमि पर जब दशकंधर, लक्ष्मण से बोले तब रघुवीर , शिक्षा लो रावण से जाकर रावण के समीप जा लक्ष्मण, रहा प्रतीक्षा करता कुछ क्षण , फिर रघुवर से जाकर बोला, वह तो कुछ भी नहीं बोलता, कहा राम ने खड़े थे कहाँ बोला सिर के पास…

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ये विषाणु

ये विषाणु कुछ कह रहा है ये विषाणु : मैं कारण भी परिणाम भी, बरसों से धुंधलाये नयनों से जो आज हुआ है नज़ारा, निर्मल नीलाम्बर , सुंदर प्यारा, दिए जा रहा प्रमाण भी। जीवन के पांचों मूल तत्वों से किया कितना ही खिलवाड़, बन्द कर दिया सघन चिकित्सालय के वार्ड। पिता अंतरिक्ष को ही…

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क्षमायाचना

क्षमायाचना हे नेता सुभाष बोस जी-तुम्हे शत शत नमन्न हमारा है। गुनाहगार ये है देश आपका-जिसने यूं मौन को धारा है।। तेरे क्रान्ति के जज़्बे को-और हम तेरे साहस को भूल गए। हम तो उन्हे भी भूले हैं-जो हंस हंसकर फांसी झूल गए।। आज़ादी के दिवानों का-नही हमने है कोई प्रतिकार किया। प्रतिकार तो क्या…

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राष्ट्रकवि डॉ रामधारी सिंह दिनकर

राष्ट्रकवि डॉ रामधारी सिंह दिनकर हिन्दी साहित्य और राष्ट्र के गौरव “राष्ट्र कवि डॉ रामधारी सिंह दिनकर जी”की जयंती के अवसर पर उन्हें ‌अपने अविस्मरणीय पल के श्रद्धासुमन अर्पित कर रही ‌हूँ। उन्हें शत-शत नमन।ऐसी‌ महान‌ व्यक्ति का एक संस्मरण मेरे विद्यार्थी जीवन ‌का है। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी दिनकर जी का साक्षात्कार, अपनापन और…

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नर्तक

नर्तक वह मस्त होकर नाच रहा था। वह नटुआ नाच का अभ्यस्त लगता था. उसने हरे रंग की काँछ दार धोती और सिर पर पगड़ी पहनी थी जिसमें हरे तोते के पंख खोंसे गए थे। उसके शरीर का ऊपरी भाग नंगा था, लेकिन रंग बिरंगी मोतियों की माला और फूलों की माला से वह कुछ…

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सीता

सीता सीता थी स्वभिमानी। अभिमानी नही। रक्षा की,अपने स्वभिमान की। राम ने सीता को त्यागा। सीता ने अयोध्या त्याग दी। वन की शरण ली। जंगल को ही मंगल किया। राम की व्याहता सीता। राजा राम की बेकसूर रानी। भोली-भाली सब से अनजान। गर्भवती बेचारी। राम की मनसा को जान, कितना दुख हुआ होगा? कितनी आहत…

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अयोध्या की स्थापना

अयोध्या की स्थापना अयोध्या जिसे साकेत और राम नगरी भी कहा जाता है, भारत के उत्तर प्रदेश में स्थित है। इसका ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व अवर्णनीय है। इतिहास में इसे कौशल जनपद भी कहा जाता था। अयोध्या कौशल राज्य की प्रारंभिक राजधानी थी । गौतम बुद्ध के समय में कोशल के दो भाग हो गए…

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