मुर्दा खामोशी

” मुर्दा खामोशी “ तेरे जग में भीड़ बहुत है आगे बढ़ने की होड़ बहुत है मंज़िल की मुर्दा खामोशी रस्तों का पर शोर बहुत है ख़्वाबों के साये को थामे जीने की घुड़दौड़ बहुत है बुत से दिखते चलते फिरते मरे हुओं की फ़ौज बहुत है पीठों में खंजर…भोंकते प्यार जताते यार बहुत है…

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मेरी प्रिय, प्रथमा

मेरी प्रिय, प्रथमा ” हमारी सभ्यता, साहित्य पर आधारित है और आज हम जो कुछ भी हैं, अपने साहित्य के बदौलत ही हैं।”- यह उद्गार है महान साहित्यकार प्रेमचंद का, जो उनकी रचनात्मक सजगता और संवेदनशील साहित्यिक प्रेम को दर्शाता है। प्रेमचंद हिंदी साहित्य का एक ऐसा नाम है, जिसने हिंदी कथा लेखन के संपूर्ण…

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हिंदी भाषा काः हिन्दुस्तानियों से संवाद ।

हिंदी भाषा काः हिन्दुस्तानियों से संवाद । अभी तो मेरे अच्छे दिन हैं । काश ये सपना टूटे ना, हिन्दी पखवाड़ा बीते ना। अभी ही तो होंगे, काव्य गोष्ठी और पुस्तक विमोचन, और ना जाने कितने कितने? कार्यक्रमों के आयोजन । नेता हो या अभिनेता, सब अभी ही तो हिन्दी बोलेंगे, कानों में मिसरी घोलेंगे।…

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आज भी जिंदा है होरी

आज भी जिंदा है होरी त्रासदी सामान्य मनुष्य के जीवन का एक अनिवार्य अंग है। सुख और दुख दोनों ही जीवन के दो पहलू हैं। आशावादी कलाकार जीवन के दुख में क्षणों में भी आने वाले सुख की किरण देखता है और निराशावादी इस द्विधा में जीवन में दुखाक्रांत क्षणों को ही देखता है और…

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हार्ट अटैक

युवाओं में हार्ट अटैक आज जब हार्ट अटैक सबसे ज्यादा मौतों का कारण बन चुका है, इसलिए हमारे लिए यह जानना आवश्यक है कि हार्ट अटैक क्या है? हार्ट अटैक पड़ने पर क्या किया जाए और हार्ट अटैक के बाद क्या सावधानियां बरती जाएँ ? आम तौर पर ज्यादातर लोग दिल के दौरे की सही…

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बढ़ते कदम : 1947 से आज तक

बढ़ते कदम : 1947 से आज तक स्वतंत्रता संग्राम, आजादी की लड़ाई, गुलामी से मुक्ति, स्वराज्य – ये मात्र शब्द नहीं हैं। इनसे हमारे भावनात्मक संबंध हैं जो आज से 73 साल पहले 15 अगस्त, 1947 को पूरे हुए। एक कड़े संघर्ष के बाद देश अपने लिए खड़ा था, अपने पैरों पर। अपना राज्य, अपनी…

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महात्मा गांधी का जीवन विश्व कल्याण के लिए

महात्मा गांधी का जीवन विश्व कल्याण के लिए गांधीजी की कार्य शैली और साधना वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत पर आधारित रही । गांधी जी के समन्वयवादी सिद्धांत मनुमष्य के विवेक की धुरी हैं । सत्याग्रह और अहिंसा पर आधारित गांधी जी की विचारधारा और कार्यशैली संपूर्ण विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है ।…

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स्वराज एवं एक भाषा के हिमायती – महर्षि दयानन्द सरस्वती

स्वराज एवं एक भाषा के हिमायती – महर्षि दयानन्द सरस्वती महर्षि दयानन्द सरस्वती के बारे में जब चिन्तन करने लगते है तो सामान्य मनुष्य अथवा महापुरूषों के व्यक्तित्व व कृतित्व के समान चिन्तन तो करना ही होता है किन्तु यहां पर एक विशेष चिन्तन की गहनता दिखती है, जो उनका ‘ऋषित्व’ होता है। गुजरात के…

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सीमा भाटिया की कविताएं 

सीमा भाटिया की कविताएं    1.उद्घोष    धूल धूसरित यह धरा बार-बार है पुकार रही युवा शक्ति को फ़िर से नव चेतना हेतु ललकार रही   मस्तक पर तिलक मेरा करो और जोश का वरण करो रिपु को मिटाने के लिए अस्त्र शस्त्र अब धारण करो मातृ भूमि की रक्षा हेतु लश्कर अपने बल संवार…

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प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना 

प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना  हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो मान्यता मिली है उसका एक मूल कारण है प्रवासी भारतीय लेखक, जो एक लम्बे समय से भारत की भाषा, कला और संस्कृति को विदेशों में फैलाने का महत्वपूर्ण प्रयास करते आ रहे हैं। समय तेज़ी से बदल रहा है, ज़ाहिर है कि हमारे…

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