मातृरुपेण हिंदी

मातृरुपेण हिंदी हे मातृरुपेण हिंदी!! हमारी मातृभाषा, हम सब की ज्ञान की दाता हो, जब से हमने होश संभाला, तूने ही ज्ञान के सागर से, संस्कारों का दीप जलाया, हर गुरुजनों की शान हो तुम, उनकी कर्मभूमि हो तुम, जिसने ज्ञान-विज्ञान,वेद-ऋचाओं, और! कर्त्तव्यों का एहसास कराया, सभ्यता-संस्कृति को जीवित रखा, देश विदेश को जोड़े रखा,…

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टिस

टिस गर्मी की तपती धूप सर्दी की ठिठुरन आंधी , तूफान या हो भीगी बारिश हर मौसम की मार सहता हूँ मैं बेबस मज़दूर क्योंकि मेहनत ही मेरा कर्म है वही मेरी रोज़ी रोटी बनाता हूँ बड़े बड़े घर, इमारतें,आलीशान बंगले उठा टोकरे मिट्टी ईंटो, गारे, सीमेंट के पर खुद के रहने के लिये होती…

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पावन बेला

पावन बेला   अयोध्या नगरी में खुशियाँ ले रही हिलोरें मंगल बेला है आई आनंद छाया हर ओर जगमग जगमग दीपों से होगा उजाला हर घर हर मंदिर, हर द्वार तोरन, फूल मालाओं, रंगोली से सज उठेगा कोना कोना महक उठेंगी फूलों की मालाएं क्या गेंदा, गुलाब, मोगरा, रजनीगंधा धूप, कपूर, अगरबत्ती की महक से…

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अब मैं भी माँ जैसी ही माँ बनूँगी

अब मैं भी माँ जैसी ही माँ बनूँगी… ” मैं भी एक माँ हूँ पर टूट जाती हूँ कई बार… फिर माँ आती है … कभी ख़्वाबों में,कभी बातों में और बढ़ाती है अपना हाथ खींच लेती है मेरे सारे दर्द दफन कर लेती है उन्हें भी अपने सीने में किसी को भनक नहीं लगने…

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हस्त-रेखा को चुनौती 

हस्त-रेखा को चुनौती  आज से साठ-सत्तर साल पहले एक मध्यम वर्ग परिवार में एक बेटी होने के बाद, मात्र ग्यारह महीने के अंतराल में दूसरी बेटी के रूप में जन्म लेना कोई खुशखबरी नहीं थी… परिवार के सारे प्यार, दुलार, और देखभाल की एक मात्र अधिकारिणी मैं कभी न बन सकी… पालने में ही शायद…

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वसीयत

वसीयत दिन – रात, सोते- जाते ,उठते- बैठते, एक ही ख्याल, एक ही बात , एक ही विचार, अपनी लाडली के नाम वसीयत में क्या करूँ ? क्या दूँ उसे जो उसकी मुस्कान सदाबहार बनी रहे ? क्या करूँ उसके नाम कि उसकी आँखों में बिजलियाँ चमकती रहें, क्या लिख दूँ जिसे पाकर वह सनातन…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- सिंधुताई सपकाल

सिंधुताई सपकाल – अनाथों की मॉं  “लकीर की फकीर हूँ मै, उसका कोई गम नही, नही धन तो क्या हुआ, इज्जत तो मेरी कम नही!” यह कहने वाली हम सबकी माई सिंधुताई सपकाल जो कि 1400 बच्‍चों की मॉं है जिसके परिवार में  250 दामाद, 50 बहुएं और 250 गाएं हैं, उन्‍होंने अंधेरे में डूबती…

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नन्हा शिक्षक

नन्हा शिक्षक लिजिए आंटी जी मुँह मीठा किजिए राज्यस्तरीय हॉकी टीम में सिलेक्ट हो गया आपका छोटू चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान और हाथ में पेड़ा का डिब्बा लिए तेज खड़ा था। गले लगाकर शाबासी देना चाहती थी, माथा चूमने का भी मन हुआ था पर पता नहीं कौन सी अदृश्य शक्ति मुझे ऐसा करने…

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