शत शत नमन

  शत शत नमन शत शत नमन मां शारदे तुमको विद्या बुद्धि का वर दे हमको, कर दो उज्ज्वल हम सबका जीवन पावन कर दो ये तन और ये मन !! सुंदर हो हर भाव हमारा सद्बुद्धि का आशीष हमें दो, अपने वीणा के हर तार से मैया मधु मधुर जीवन को कर दो!! करती…

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मज़दूर की बेटी 

मज़दूर की बेटी विनायक अंकल आप मेरे पापा बनोगे? शैली के अप्रत्याशित सवाल से बुरी तरह से हड़बड़ा गए थे विनायक जी अरे बेटा मै तुम्हारे पिता जैसा ही हूँ ख़ुद को संयत करते हुए विनायक जी ने ज़वाब दिया। पिता जैसा होने में और पिता होने में काफ़ी फर्क़ होता है अंकल शैली की…

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सकारात्मक सोच

सकारात्मक सोच “अरे !यह तो रजत है।”आश्चर्य से मीनू मैडम बोली।लाइब्रेरी में अखबार पढ़ते हुए उनकी नजर अखबार के प्रथम पृष्ठ पर बड़े अक्षरों में यूपीएससी का रिजल्ट और साथ में हाई रैंक कैंडिडेट का नाम फोटो के साथ छपी थी, वहां टिक गई। “यह देखो अपना रजत उसकी फोटो छपी है। इसी विद्यालय से…

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कफन

कफन उपन्यास सम्राट प्रेमचंद जी के, सभी उपन्यास,कहानियाँ वक्त की नब्ज को पकड़ कर लिखी गईं है।समाज का दर्पण हैं।यूँ तो मुंशी जी की सभी रचनायें अप्रतिम हैं,लेकिन जब किसी एक की पसंद का बात हो तो यकायक बिजली सी कौंध जाती है,स्मृति पटल पर वह रचना,जो किसानों के शोषण,साहूकार,जमींदारों के प्रभुत्व को दर्शाने के…

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शिक्षा का उद्देश्य और नई शिक्षा नीति

शिक्षा का उद्देश्य और नई शिक्षा नीति अच्छी पढ़ाई, अच्छा जीवन’ – ये नारा शायद सदियों से बच्चों को, उनके माता-पिता को जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहा है। शिक्षा से अनेक द्वारा खुल जाते हैं; ज्ञान के, अच्छे समाज के, अच्छी नौकरी के। मानव जाति में एक जिज्ञासु प्रवृत्ति है और…

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पिता के नाम पत्र

पिता के नाम पत्र पूज्य पापा, सादर प्रणाम सबसे पहले आपको मैं पितृदिवस की हार्दिक शुभकामनायें देते हुये ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करती हूँ ।सुबह सबेरे जब हमने आपसे फोन पर बात की थी तब आपको उन खतों की याद दिलाई थी जो हमनें आपको लिखे थे बहुत लम्बे लम्बे खर्रों के…

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दिव्या माथुर की कहानियों में संवेदना और शिल्प

दिव्या माथुर की कहानियों में संवेदना और शिल्प दिव्या माथुर वर्षों से साहित्यिक रचना में संलग्न हैं। उनकी रचनात्मक प्रतिभा के विविध आयाम कविता, कहानी और उपन्यास की विधाओं में प्रतिफलित हुए हैं। द क्राफ्ट ऑफ फिक्शन में पर्सी लबक ने ‘कथ्य का अधिकतम प्रयोग’ द्वारा संवेदना और शिल्प के संबन्ध का स्पष्टीकरण किया है।…

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बापू की ओर

  बापू की ओर मिथ्या से सत्य की ओर घृणा से प्रेम और करुणा की ओर सांप्रदायिकता से भाईचारे की ओर हिंसा की बर्बरता से अहिंसा की संवेदना की ओर बर्बर भीडतंत्र से सत्याग्रह की ओर विलासिता से सच्चरित्रता की ओर उपभोक्तावाद से सादगी की ओर अंध औद्योगीकरण से कुटीर उद्योग की ओर पूंजी के…

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परिणति

परिणति   अभी थोड़ी देर पहले जाकर घर का काम निपटा है। चलो अच्छा हुआ महरी भी आकर चली गई। चैन की सांस ली मैंने।अब दो घंटों की छुट्टी। रोहित चार बजे तक आएगा और उसके पापा आठ बजे तक।अपने कमरे में आकर मैंने एक पत्रिका उठाई और पेज पलटने लगी।तभी मोबाइल बज उठा।किसका हो…

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