सरिता सुराणा की कविताएं

सरिता सुराणा की कविताएं १.आओ अमृत महोत्सव मनाएं आओ अमृत महोत्सव मनाएं आजादी की गौरव गाथा गाएं। याद करें आजादी के रणबांकुरों को गुमनामी के अंधेरों में खोए उन वीर शहीदों को श्रद्धानत हम शीश नवाएं। आओ अमृत महोत्सव मनाएं।। न भूलें बाल, पाल और लाल के साहस को भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदानों…

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मेरा चाँद

मेरा चाँद आज है करवा चौथ की रात कितनी मदमाती ये रात है हर साल होता है मुझे चौथ के चाँद का इन्तज़ार छलनी से होता है साजन का बड़ी अदा से दीदार आसमान पर है चौथ का चाँद मुझको उसमें मेरा प्यारा पिया बस तू ही तू नजर आता है। करुँ मैं आज सोलह…

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डॉ जया आनंद की कविताएं 

डॉ जया आनंद की कविताएं  1.धरती धरती नेह से लरजती है संवरती है उपजाती है सरस जीवन , सहन करती है बोझ उपेक्षा का, घृणा का और अति होने पर कम्पित हो जता देती है अपना आक्रोश नहीं ..अब और नहीं 2.लड़कियां लड़कियां सहेज लेती हैं घर परिवार रिश्ते-नाते ,मित्र और अपना अस्तित्व लड़कियां द्वार…

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बेटी

बेटी नये इलाके में उन लोगों का अभी तक सभी से पूरा परिचय भी नहीं हुआ था। शाम को श्याम किशोर और उनकी पत्नी जब घूमने निकलते तब कुछ लोगों से बातचीत के माध्यम से परिचय हो रहा था। साथ में रहने वाली बीना को केवल अपने ड्युटी और घर से ही मतलब था इसके…

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Quarantine

Quarantine Pandemic world is not mine although I drift with it with mask on my face through surroundings possessed by the springtime Isolated I cannot smell the flowers I am not enjoying virtual paradise walk just around the corner of my seclusion Izabela zubko Writer Poland IZABELA ZUBKO – poetess, journalist and translator. She is…

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है दुर्गा आनेवाली

है दुर्गा आनेवाली है दुर्गा आनेवाली काश फूलों से सज गई धरती सुगंध महकाए शेफाली है दुर्गा आनेवाली। न है मंडप की शोभा न है रोशनी की लड़ी न है घूमने फिरने की बारी कब थमेगी यह महामारी ? किसान का आत्महनन है जारी उसपर हल का बोझ हुआ भारी ऊपर से कर्ज की लाचारी…

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मातु विनत वंदना हमारी

मातु विनत वंदना हमारी तुम्हे समर्पित ह्रुदयांतर से ,मातु विनत वंदना हमारी, अक्षर अक्षर बांध लिया है ,भाव- सुमन मुक्ताहारों से, स्वर वैभव के गीत रचाकर ,सरगम के स्नेहिल तारों से विश्वासों का दीप जलाये ,मातु सहज प्रार्थना हमारी . मातु विनत वंदना हमारी पाँव भटकतेजग-अरण्य में,मन बोझिल और पथ दुर्गम है, लक्ष्य शिखर को…

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मानवता की सेवा में सन्नद्ध–कर्मवीरों के नाम

मानवता की सेवा में सन्नद्ध–कर्मवीरों के नाम है नमन तुम्हे मानवता हित जीवन अर्पित करने वालों सेवा से संकट मोचक बन हमको गर्वित करने वालों हर जंग जहां जीती हमने दुश्मन को धूल चटाई है संक्रामकता -निशिचर के दमन की कसम उठाई है है नमन तुम्हे खतरों से भी आंधी बन टकराने वालों है नमन…

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एक मजबूत व्यक्तित्व -गोल्डा मीर

एक मजबूत व्यक्तित्व -गोल्डा मीर   दुनिया का इतिहास बहुविविध रहा है। सभ्यता -संस्कृति का विकास भी हर जगह अलग तरीके से हुआ है।आज की विकसित और समृद्ध दुनिया में अनेकानेक महापुरुषों ने हर क्षेत्र मे योगदान दिया है शिक्षा,स्वास्थ्य,सामाजिक और राजनैतिक जीवन में भी।गत 100 वर्ष के इतिहास में आधुनिक विश्व की अवधारणा विकसित…

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