भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-स्वामी विवेकानंद

नवजागरण के अग्रदूत- स्वामी विवेकानन्द स्वामी विवेकानंद एक ऐसा नाम है जिसमे यदि मैं कहूं पूरा भारत समाया है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु जिनके तेज के सामने पूरा विश्व झुक गया।उनके जीवन चरित्र को कुछ शब्दों में बांध पाना बहुत मुश्किल है,फिर भी एक छोटी सी कोशिश है। स्वामी विवेकानन्द का…

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लॉकडाउन और शिक्षण समाज

लॉकडाउन और शिक्षण समाज बात उन दिनों की है जब समपूर्ण संसार में हड़कंप मचा था,त्राहिमाम की वस्तु स्थिति थी जीवन चक्र जैसे रूक सा गया था।एक अंजान अदृश्य शत्रु के भय से और इस भय से उपजा जो रक्षात्मक उपाय था उसे लॉकडाउन की संज्ञा दी गई।क्या विद्यालय क्या देवालय सब जगह बस ताले…

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नारी का अस्तित्व

नारी का अस्तित्व हां मैं भी चाहती हूँ अपनी पहचान बनाना! चाहती हूँ अपना अस्तित्व स्थापित करना! ढूंढती हूँ हर गली,हर मोड़ पर! अपने अतीत में, मैं कौन हूँ? मैं कौन हूँ? मैं कौन हूँ…..?? कभी बेटी,,,कभी बहन,… कभी बहु और कभी पत्नी,.. ना जाने कितने नामों से मैं पहचानी जाती हूँ! पर ढूंढती हूँ…

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सुन लें

सुन लें आज ‘ऑटिज्म डे ‘है।यह भयंकर बीमारी है।सजग नहीं होने पर विकराल रूप ले लेता है।यह मानसिक रोग है।इससे ग्रसित बच्चे का मानसिक विकार के कारण विकास रूक जाता है। सामान्य बच्चों की अपेक्षा इन बच्चों का विकास बहुत धीमे गति से होता है। ऑटिज्म के बहुत कारण होते हैं।गर्भ काल में माँ की…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव

परमवीर-कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव हम कहते हैं आजादी हमें देश के नेताओं ने नागरिकों ने, क्रांतिकारियों ने, समाज सुधारकों ने, अहिंसा  के पुजारियों ने, अपना लहू बहाकर, तन-मन -धन न्योछावर करके दिलवाई है। लेकिन कभी हमने सोचा कि यह आजादी सदा यूँ ही बनी रहे,  अक्षुण्ण रहे और हमारे देश का तिरंगा नील गगन में…

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पेच्ची

पेच्ची कितना मुश्किल है जीवन का यथार्थ ये तो सभी जानते हैं। इतना कि दुःख ही सत्य लगता है सुख नहीं! हाट की चहल-पहल व धूल के बीच पेच्ची उदास बैठी है।साथ में लचकी खड़ी है।उसकी बड़ी-बड़ी आँखें ख़ुशी व्यक्त कर रहीं हैं या उदासी कहना कठिन है। सत्य यही है कि दोनों की आँखों…

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सौभाग्यवती रहूँ

अमर ज्योति मैं कहां जाऊंगी मैं तो आती रहूंगी यूहीं सांसे टूटने तक अपनी गुनगुनाती रहूंगी यूहीं!! जब भी डूबने को होगा सांझ का ये सूरज, जुगनू बन आंगन में तेरे टिमटिमाती रहूंगी यूहीं… मोल नहीं मांगूंगी कभी अपनी मोहब्बत का, हक अदा करूंगी सदा अपनी इस उल्फत का, बेमोल अपने प्यार को लुटाती रहूंगी…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- अरूणा आसफ़ अली

भारत रत्न अरूणा आसफ़ अली आज़ादी के पचहत्तरवें वर्ष में जब हम देश भर में ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं । तब अपनी मातृभूमि को सौभाग्यशालिनी कहने से मन को असीम प्रशंसा होती है। भारत भूमि सदा विशेष रही है ।अपनी धन संपदा, वनसंपदा, खनिज भंडारों और प्राकृतिक सौंदर्य और विविधता के क्षेत्र…

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