यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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बढ़ती जनसंख्या परेशानी का सबब

बढ़ती जनसंख्या परेशानी का सबब ग्यारह जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाता है।इसको मनाने का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या के प्रति ध्यान खींचना है और लोगों को जागरूक बनाना है।आज पूरे विश्व में हर सेकेण्ड में चार बच्चों का जन्म होता है जबकि मृत्यु दर इसकी आधी है।अगर जनसंख्या इसी दर से…

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शुरुआत

शुरुआत सारे घर में आज एक बार फिर से खूब चहल-पहल थी। हर कोना बड़े मनोयोग से सजाया जा रहा था। विभिन्न आकृतियों वाले गुब्बारे, रंग बिरंगी बंदनवार , फूल, जिस जिसने जो भी सुझाव दिया था, महक ने हर उस चीज का इस्तेमाल किया था। खासतौर पर बैठक में, जहाँ आज शाम को यह…

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गणतंत्र कैसा ये गणतंत्र

गणतंत्र कैसा ये गणतंत्र गणतंत्र कैसा ये गणतंत्र जहाँ आज भी धर्म पर होते बवाल कई न आज़ादी मंदिर की न आज़ादी मस्ज़िद की न ही गुरुद्वारे गिरजाघर की बंटे धर्म , मज़हब सारे यूँ देश में अपने ही ।। गणतंत्र कैसा ये गणतंत्र जहाँ नहीं महफूज़ लड़की कभी कोख में कभी घर में कभी…

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गुरु वंदना

गुरु वंदना गुरुजनों के ज्ञान को , तू देना सदा सम्मान । दुख संताप वे हर लेगें , ऐसे वे इंसान ।। लोभ दौलत का तुझको है तो,विद्या धन एकत्र कर। चोर न चोरी कर सके , तू चाहे सर्वत्र भर।। विद्या और कल्याण की दौलत, लूट सके तो लूट। कोई न जाने किस पल…

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Life is A Dream

Life is A Dream 1. As if I’d stepped into the world three times Over the earth three rivers flowed Delivering their waters to the great ocean Their stones their sand left outside The edge is meaning of the first river Where in the same figure all branches meet The wreck of a row boat…

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निर्णय

निर्णय एक तो खुद अपने परिवार की इतनी बड़ी जिम्मेदारी और ऊपर से मौसमी के घर की पहरेदारी। और भी तो कितने पड़ोसी हैं ,सबके साथ मौसमी की अच्छी पटती भी है।कई बार सोची कि मौसमी से कह दूं कि तुम अब चाबी किसी और के घर में रखा करो। पर पता नहीं क्यों मैं…

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Biography Of Elisa Mascia

Biography of Elisa Mascia Elisa Mascia was born in Santa Croce di Magliano (Cb), on 13/04/1956, she lives and works in San Giuliano di Puglia (Cb). Retired teacher. Writing is a real need for life and draws inspiration from anything or any surrounding event. She has participated in various national and international poetry competitions obtaining…

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मैं भूत बनकर आऊँगी

मैं भूत बनकर आऊँगी मैं भूत बनकर आऊँगी सुनो, मैं भूत बनकर आऊँगी ये जो मैं रोज़ तिल-तिल कर मरती हूँ ना उससे मैं थोड़ा-थोड़ा भूत बनती हूँ मुझे यक़ीन है, मैं जल्द ही पूरा मर जाऊँगी मैं जल्द ही पूरा बन जाऊँगी सुनो, मैं भूत बन कर आऊँगी और तुम्हारी गंदी नज़रों की रेखाओं…

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