भारतीय गणतंत्र का मूल्यांकन

भारतीय गणतंत्र का मूल्यांकन कोविड-19 से उपजी समस्याओं और दुश्चिंताओं के बीच देश 72वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी में है।धर्मनिरपेक्ष ,समाजवादी और लोकतान्त्रिक गणराज्य भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसी उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रपति द्वारा दिल्ली के राजपथ पर राष्ट्र-ध्वजारोहण किया जाता है।सभी भारतीय नागरिकों द्वारा यह…

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अयोध्या की स्थापना

अयोध्या की स्थापना अयोध्या जिसे साकेत और राम नगरी भी कहा जाता है, भारत के उत्तर प्रदेश में स्थित है। इसका ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व अवर्णनीय है। इतिहास में इसे कौशल जनपद भी कहा जाता था। अयोध्या कौशल राज्य की प्रारंभिक राजधानी थी । गौतम बुद्ध के समय में कोशल के दो भाग हो गए…

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मानवता और सामाजिक बदलाव

मानवता और सामाजिक बदलाव..! कोरोना एक वैश्विक महामारी ही नहीं है बल्कि समस्त विश्व के समक्ष एक चुनौती है।यह केवल मानव जीवन को ही नहीं बल्कि मानव सभ्यता द्वारा निर्मित प्रत्येक क्षेत्र पर घातक प्रहार कर रहा है।कोरोना से बचाव के लिए न कोई दवाई हैं और ना ही कोई वैक्सीन।इससे बचाव का एकमात्र उपाय…

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बादलों के संग क्यों उड़ने लगा है मन

बादलों के संग क्यों उड़ने लगा है मन (१) बादलों के संग क्यों उड़ने लगा है मन कल्पना के जाल क्यों बुनने लगा है मन इन्द्रधनुषी स्वप्न के संग रात भर , बीन के तारों सदृस बजने लगा हैं मन ? हरित वर्णा हो गई है सांवरी धरती , बादलों के प्यार ने क्या चातुरी…

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औरत ,औरत की दुश्मन

प्रायः यह जुमला सुनने को मिल ही जाता है जब कभी किसी औरत को दूसरी औरत द्वारा प्रताड़ित या परेशान किया जाता है। काफ़ी लोगों का यह मानना है कि अधिकतर औरत ही औरत की परेशानी का कारण होती है। यदि हम आस – पास नज़र डालें और औरतों के प्रति हो रहे अपराधों के…

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संस्कार

संस्कार वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीर पराई जाने रे.. नरसी मेहता का भजन नेपथ्य में कहीं चल रहा था । ” पर दु:खे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आणे रे..” सरला बेन भी साथ में गुनगुनाने लगीं । मिहिका सामने बैठी अपनी वृद्धा विधवा माँ के चेहरे की रुहानियत और मासूमियत को…

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लेखा जोखा 2020

लेखा जोखा 2020 साल 2020 अब बस कुछ ही घंटों का मेहमान है। ना मौसम बदलेगा, ना ही हवाएँ बदलेंगी – बस कैलेंडर की तारीखें बदल जाएगी। सरसों के पीले फूल, गेंदे के फूल, गुलदाबदी, डहलियाँ की सुंदर क्यारियाँ भी ज्यों कि त्यों रहेंगी। लेकिन साल बदल जाएगा। एक और साल चित्रगुप्त के मोटी बहीखाते…

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हार कभी न मानी

  हार कभी न मानी   राह कठिन है जीवन की पर हार नहीं मानी है. पर्वत-सी ऊँची मंज़िल पर चढ़ने की ठानी है. जीवन के पाँच दशक पार हो जाने के बाद जब अपने जीवन को एक द्रष्टा के तौर पर देखती और विश्लेषण करती हूँ तो लगता है एक व्यक्तित्व वस्तुतः अपने माता-पिता…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- अरूणा आसफ़ अली

भारत रत्न अरूणा आसफ़ अली आज़ादी के पचहत्तरवें वर्ष में जब हम देश भर में ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं । तब अपनी मातृभूमि को सौभाग्यशालिनी कहने से मन को असीम प्रशंसा होती है। भारत भूमि सदा विशेष रही है ।अपनी धन संपदा, वनसंपदा, खनिज भंडारों और प्राकृतिक सौंदर्य और विविधता के क्षेत्र…

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