एक दूजे के लिए
प्र.- शादी के बाद कितनी बदली आप लोगों की जिंदगी??? उ.- शादी के बाद कुछ परिवर्तन आतें तो है परंतु हम दोनों एक दूसरे से पहले से परिचित थे और परिवार भी बहुत अच्छा और प्रेम करने वाला रहा इसलिये ज्यादा मुश्किलें नही आयी। दोनों ही परिवारों में मैं सबसे छोटी थी इसलिये मुझपर किसी…
संपादक की बात
संपादक की बात चलना है, केवल चलना है ! जीवन चलता ही रहता है ! रुक जाना है मर जाना ही, निर्झर यह झड़ कर कहता है (आर सी प्रसाद) जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है जिसने सोने को खोदा, लोहा मोड़ा है जो…
Obliterating Time
Obliterating Time The earth shall I draw again… and time shall I intoxicate… Thus shall I obliterate the minutes of your absence Of sterile seasons, of gloomy days, Of faceless months! I shall obliterate the moments when my tears Swell up! LIVES without you Shall I build anew! Nights devoid of your form Shall I…
THE WORLD LOOKS LIKE WOMEN
THE WORLD LOOKS LIKE WOMEN Hopes Of the years bring exhaustions And regrets Sometimes it happens Disappointments The world looks like women. Need to finish, hates Need not to be, angers Unending fights These pains in women Do not end The world looks like women. Pains Screamings are heard Do not end injustice Sometimes it…
नमक का दरोगा
नमक का दारोगा हिंदी साहित्य के इतिहास में उपन्यास और कहानियों की बात हो और मुंशी प्रेमचंद का नाम न हो ऐसा हो ही नहीं सकता है। प्रेमचंद युगांतकारी कथाकार हैं ।इनकी कहानियों में किसानों की दयनीय दशा सामाजिक बंधनों में तड़पती नारियों की वेदना वर्ण व्यवस्था का खोखलापन हरिजनों की पीड़ा आदि का बड़ा…
नर का पौरुष
नर का पौरुष जब-जब संकट ने जाल बुना नर ने पौरुष का वार चुना यूँ शैय्या पर जीकर क्या हो उसने मृत्यु अधिकार चुना विद्युत सम तलवार लिये तड़ितों को अपने तुनीर धरे लगा गाँठ जनेऊ में भरकर भीषण हुंकार चला कितने रत्नाकर लाँघ दिए अगणित सेतु भी बाँध दिए माँ के वचनों की रक्षा…