Father’s Day

मेरे बाबूजी भोले भाले ,सीधे-साधे, सबसे अच्छे बाबूजी थे । दृढ़ प्रतिज्ञ, उज्जवल चरित्र, कर्म योग के योगी थे। सबसे प्यारे सबसे अच्छे बाबूजी थे। अनुशासित जीवन था उनका। उच्च कोटि के शुद्ध विचार। न्याय सदा करते थे। सबसे प्यारे सबसे अच्छे बाबूजी थे । गहराई से सोच समझ कर कर, बात समय पर करते…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन   प्यार मोहब्बत आशिकी ये बस अल्फाज थे। मगर… जब तुम मिले तब इन अल्फाजोंं को मायने मिले बदलना आता नहीं हमें मौसम की तरह, हर इक रुत में तेरा इंतज़ार करते हैं, ना तुम समझ सकोगे जिसे क़यामत तक, कसम तुम्हारी तुम्हें इतना प्यार करते हैं।   0

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फागुन

                                                     फागुन                          माघ बीता फागुन आया, लाया रंगों की बौछार,  होली में…….                         कजरारे नैनों की भाषा,  कुंदन बदन की अभिलाषा,                           है वह निपट गंवार अनाड़ी, जो न समझे होली में…….                                कैरी टपकी, कोयल कूकी, टेसू दहका, भौंरा बहका,                            कनकनी दूर हुई,  पानी पर आया प्यार होली में…….                            छ्र्रर्र्र पिचकारी बरसे,  उड़े अबीर गुलाल के…

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माता और पिता

माता और पिता मैं अपने पिता की सबसे बड़ी आलोचक रहीं हूँ, मेरी अति सौम्य मृदुभाषिनी माता की तुलना में, वे काफी रूखे, सख्त, अहंकारी और अनुशासित इंसान दिखते रहें हैं। अगर प्रतीकों की भाषा में कहा जाए तो, माँ एक कोमल कविता सी हैं, तो पिता एक राष्ट्र गान जैसे, माँ के नर्म –…

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अखण्ड भारत का सरदार

अखण्ड भारत का सरदार वल्लभ भाई पटेल जी का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राजनीतिज्ञों में प्रमुख है। भारत की धरती पर उनका नाम ,एक सुलझे हुए सेनानी और राजनेता के रुप में सदा अमर रहेगा ।वल्लभ भाई झावेरभाई पटेल (३१ अक्टूबर १८७५-१५ दिसंबर१९५०) जी सरदार पटेल के नाम से लोकप्रिय थे,वे भारतीय राजनीतिज्ञ थे।उन्होने…

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माँ

माँ मां की महिमा कोई कैसे कहे । है अपरंपार जगत में माँ ।। हर मुश्किल का हल है माँ । अनगिन पुण्यों का फल है माँ ।। अपनी हर संतान की खातिर। अमृत सा प्रभावी जल है माँ ।। माँ के जैसा कोई और नहीं मां के जैसी माँ ही है ना ।। है…

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कर्मयोगिनी दिव्या माथुर

कर्मयोगिनी दिव्या माथुर कार्यक्रम का आयोजन हो या हिन्दी का प्रचार-प्रसार अथवा लेखन, दिव्या माथुर की सजग आँखों और कर्तव्यपरायण मन से कुछ नहीं छूटता। कई बार तो मुझे लगता है कि दिव्या जी के एक दिन में कई-कई दिन समाए रहते हैं अन्यथा कैसे वे नेहरू सेंटर के प्रति माह के दस-बारह कार्यक्रमों के…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन लम्हा इक छोटा सा फिर उम्रे दराजाँ दे गया दिल गया धड़कन गयी और जाने क्या-क्या ले गया वो जो चिंगारी दबी थी प्यार के उन्माद की होठ पर आई तो दिल पे कोई दस्तक दे गया उम्र पहले प्यार की हर पल ही घटती जा रही उसकी आँखों का ये…

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गुरू एक पथ प्रदर्शक

गुरू एक पथ प्रदर्शक वैदिक काल से शुरू हुआ गुरूकुल का प्रचलन हुआ आवश्यक है गुरू सानिध्य गुरू का हो सुंदर आशीष संसार के हर उत्तम कर्म ज्ञान औ विद्या होये संगम जन्म लेता है मानव शिशु माता पिता पाये औ सीखे सांसारिकता का ज्ञान मिले पर बिन गुरू ना दिशा मिले अक्षर ज्ञान से…

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मजबूरी का सौदा

मजबूरी का सौदा गौरीपुरा गाँव के ठीक बीचों-बीच, बरगद के पेड़ के नीचे, गिरधारी की छोटी-सी दुकान थी। दुकान क्या थी, एक फटी-पुरानी चारपाई, जिस पर कुछ लकड़ी के खिलौने रखे रहते थे। गिरधारी के हाथ में जादू था। उसकी छेनी और हथौड़ी से बेजान लकड़ी में जान आ जाती थी। वह सुबह सूरज निकलने…

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