जब आप जंग पे निकली थीं, अस्पताल को

    जब आप जंग पे निकली थीं, अस्पताल को मेरे बाग़ में फलों से भरा एक दिव्य वृक्ष है, वृक्ष यह वृक्ष मेरे बाग़ की मुस्कुराहट है; मुस्कुराहट यह मुस्कुराहट जा रही है कल अवकाश पर! अवकाश उस अवकाश पर जहाँ सँवारा जाएगा मेरे पसंद की मुस्कुराहट की शाख़ को, शाख़ उस शाख़ को…

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दिव्या माथुर का ‘आक्रोश’

दिव्या माथुर का ‘आक्रोश’ नेहरु केन्द्र के एक दूसरे कार्यक्रम के दौरान दिव्या ने मुझसे पूछा कि तुम्हें मेरी किताब पढ़ने का मौक़ा अभी मिला है कि नहीं? अट्ठारहवीं शताब्दी के अंग्रेज़ लेखक रेवरेंड सिडनी स्मिथ के एक प्रसिद्ध कथन के अनुसार, किसी पुस्तक की समीक्षा बड़ा घातक हो सकता है। मेरे दिव्या के आक्रोश…

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दिव्या जी को जितना मैंने जाना

दिव्या जी को जितना मैंने जाना मिलना मिलाना कहते हैं ईश्वर के हाथों का खेल है और जीवन के किस मोड़ पर किसी ऐसी शख्सियत से भेंट करवा दें कि लगे जैसे आपको तो बहुत पहले से जानते हैं| प्रवासी हिंदी साहित्य लेखन की प्रतिनिधि साहित्यकार जिनका रचना संसार बहुआयामी है, सुश्री दिव्या माथुर जी…

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पूर्व-पक्ष

पूर्व-पक्ष दिव्या माथुर से मेरा परिचय लगभग ढाई दशक पूर्व हुआ और इसका श्रेय डॉ. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी को है जो उस समय ब्रिटेन के भारतीय उच्चायुक्त थे और हिंदी के प्रचार-प्रसार में सक्रिय थे। दिव्या के दूसरे काव्य संकलन ‘ख़याल तेरा’ का आमुख उन्होंने ही लिखा था इसलिए वह उनकी काव्य प्रतिभा से परिचित थे।…

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वह ध्रुव है!

वह ध्रुव है! क्षितिज के छोर से एक तारा सरक कर आ छिपा धरती के आँचल में उसे ललचाया था शायद धरती की सोंधी सुगंध ने उसे उकसाया था कि वह अपनी नन्ही रौशनी से लोगों को दिशाभ्रम होने से बचाए वह रौशनी उसके साथ चलती रहे, चलती रहे बढ़ने की उमंग के साथ प्रेरणा…

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कर्मयोगिनी दिव्या माथुर

कर्मयोगिनी दिव्या माथुर कार्यक्रम का आयोजन हो या हिन्दी का प्रचार-प्रसार अथवा लेखन, दिव्या माथुर की सजग आँखों और कर्तव्यपरायण मन से कुछ नहीं छूटता। कई बार तो मुझे लगता है कि दिव्या जी के एक दिन में कई-कई दिन समाए रहते हैं अन्यथा कैसे वे नेहरू सेंटर के प्रति माह के दस-बारह कार्यक्रमों के…

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प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना 

प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना  हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो मान्यता मिली है उसका एक मूल कारण है प्रवासी भारतीय लेखक, जो एक लम्बे समय से भारत की भाषा, कला और संस्कृति को विदेशों में फैलाने का महत्वपूर्ण प्रयास करते आ रहे हैं। समय तेज़ी से बदल रहा है, ज़ाहिर है कि हमारे…

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देसी गर्ल्स

देसी गर्ल्स महिलाओं के लिए खुद को खुलकर व्यक्त करना कभी आसान नहीं रहा, लेकिन लेखन एक ऐसा तरीका है जिसके द्वारा वे यह कर सकती हैं। जेन ऑस्टेन के बहुचर्चित उपन्यासों के माध्यम से हम उनके जीवन और समाज को देख सकते हैं। फिर भी, जेन ऑस्टिन के लिए एक पुरुष की दुनिया में…

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