कहानी ‘मेला’ एक वैचारिक दृष्टिकोण

कहानी ‘मेला’ एक वैचारिक दृष्टिकोण साहित्य संसार की प्रतिष्ठित कथाकर, जो, केवल कहानियों में ही नहीं, नाटक, उपन्यास, कविता, निबंध, पत्रकारिता,लगभग साहित्य की अधिकांश विधाओं में अपना हस्तक्षेप रखतीं हैं और अपने लेखन के लिये अनेक साहित्य सम्मान से नवाज़ी गईं हैं। प्रबुद्ध, सरल -सहज, सौम्य, चेहरे पर,निर्बाध, निश्छल हँसी ऐसे दिखती है,जैसे पूस में…

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क्लारा बार्टन- नर्सिंग की प्रणेता

क्लारा बार्टन- नर्सिंग की प्रणेता जीवन काल-दिनांक: 25 दिसंबर, 1821 – 12 अप्रैल, 1912 (क्रिसमस दिवस और गुड फ्राइडे) व्यवसाय- नर्स, मानवतावादी, शिक्षक पारिवारिक पृष्ठभूमि- पिता: स्टीफन बार्टन, किसान, चयनकर्ता और विधायक (मैसाचुसेट्स), माता : सारा (सैली) स्टोन बार्टन, चार बड़े भाई-बहन: दो भाई, दो बहनें शिक्षा- लिबरल इंस्टीट्यूट, क्लिंटन, एनवाई (1851), क्लारा बार्टन ने…

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मेरे इश्क का रंग है केसरिया

मेरे इश्क का रंग है केसरिया देश मेरे …. रंगरेज मेरे मेरे इश्क का रंग है केसरिया तेरी आन की खातिर मैं न मरा तो खाक यह जीवन मैंने जीया देश मेरे…… कायर ने छुप कर वार किया अस्मिता पर प्रहार किया किंचित न गम है मिटने का हाँ दुख है न योद्धा दिखने का…

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देवी नहीं, नारी हूँ मैंं

देवी नहीं, नारी हूँ मैंं मुझे चाहत नहीं मैं कोई देवी बनूँ, शक्ति का पर्याय कहलाऊँ करुणा की वेदी बनूँ चाह मुझे बस इतनी कि मैं इंसान रहूँ खुलकर साँस लूँ अविरल धारा सी बहूँ, खुले आसमान में पँख फैलाकर उड़ूँ, खुश रहूँ,सपने देखूँ उसे निर्बाध पूरा करूँ अपने प्रेम को हँसता देखूँ अपनी ममता…

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प्रथम गुरु – मां

गुरु पूर्णिमा विशेष प्रथम गुरु – मां मां तुम मेरी प्रथम गुरु हो तुमने ही मुझे पढ़ाया है तुमने ही सुख दुख में मुझको जीवन का सार बताया है, करूं वर्णन कैसे तेरी महिमा का मेरी नींव है तुम पर टिकी हुई जीवन में हर एक रिश्ते की पहचान तुम्हीं से मिली हुई तुमने ही…

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गणतंत्र का सबसे मजबूत अस्त्र शिक्षा

गणतंत्र का सबसे मजबूत अस्त्र शिक्षा 72 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विशेष शुभकामनाएं। 21वीं सदी का पहला गणतंत्र, युवा भारत के सपनों का गणतंत्र, अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाता, राज करता भारतीय गणतंत्र, जन गण मन तक राष्ट्रीयता के संदेश पहुंचाता गणतंत्र । हमारी शैक्षणिक विरासत पर हमें गर्व है…. नालंदा तक्षशिला…

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रोबोट

रोबोट इस आधुनिक शिक्षा प्रणाली ने बच्चों को रोबोट बना दिया हैं।नन्हें-नन्हे कंधों पर भारी बस्तें और स्कूल से आते ही कोंचिग जाने की तैयारी,वहां से आकर होमवर्क के बाद जल्दी सुलाने की कवायद। अपने छोटे से पोते-पोती की दिनचर्या देखकर सविता मन ही मन कुढ़ती और बच्चों पर बेहद तरस आता। लेकिन कुछ कह…

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ये विषाणु

ये विषाणु कुछ कह रहा है ये विषाणु : मैं कारण भी परिणाम भी, बरसों से धुंधलाये नयनों से जो आज हुआ है नज़ारा, निर्मल नीलाम्बर , सुंदर प्यारा, दिए जा रहा प्रमाण भी। जीवन के पांचों मूल तत्वों से किया कितना ही खिलवाड़, बन्द कर दिया सघन चिकित्सालय के वार्ड। पिता अंतरिक्ष को ही…

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कविता का साधक हो जाना

कविता का साधक हो जाना “जीवन का सुख-दुःख, यश-अपयश, सहज धीर होकर अपनाना, सबसे दुष्कर है जीवन में, कविता का साधक हो जाना..!! कौन भला झेले जीवन में, चिंताओं की अनहद ढ़ेरी, कौन भला चाहे आँखों में, सपनों के शव, पीर घनेरी, लेन देन के वणिक जगत में, कौन भला स्वीकार करेगा, जनमानस की तनिक…

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