कुछ नया सा

कुछ नया सा अंजलि को जब भी घबराहट महसूस होती है, वह अपने नाखून चबाने लगती है। कितनी बार उसने यह आदत छोड़ने की कोशिश की, लेकिन जाने अनजाने यह हो जाता है। अविनाश ने कितनी बार टोका होगा – लेकिन आदत तो छूटती नहीं। अब यही देखो ना, अविनाश को भूलने की कोशिश भी…

Read More

मंच हमारा विचार आपका

मंच हमारा विचार आपका भारतीय समाज आज शिक्षित ,स्वतंत्र और आधुनिक होने के बाद भी मध्यकालीन युगीन भारतीय समाज की तरह ही महिलाओं के प्रति संकीर्ण एवं विकृत मानसिकता का शिकार है जिसके कारण महिलाओं पर अपराध दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। आज महिलाओं के प्रति अपराध में तेजी से बढ़ोतरी हुई है…

Read More

मजदूर

मजदूर जिसके सर पर छत है खुले आकाश का,होता रहता वज्रपात, फिर भी वह आत्मविश्वास से लबरेज है , वह है मजदूर। कंधों पर सपनों का बोझ ढो रहा, चला जा रहा मंजिल है दूर, अपने पसीने से भूमि सींचता,है श्रम से थक कर है वह चूर। अपने हथौड़े से करता एक-एक प्रहार,रखता जाता एक-…

Read More

तब से अब तक

तब से अब तक यह तो अब हम सब जानते हैं कि 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन दुनिया में महिलाओं के जीवन में सुधार लाने, उनमें जागरुकता बढ़ाने जैसे कई विषयों पर जोर दिया जाता है। विचारणीय है दुनिया को इसकी जरूरत क्यों पड़ी! इसके लिए…

Read More

बापू

बापू तुम्हारे वजूद से थी मेरे गुलिस्ताँ में रौनकें सारी, तुम्हारे बगैर इस दुनिया को मै वीरान लिखती हूँ …..बापू सभी रिश्तों पर खुब लिखा जाता हैं माँ पर दोस्ती पर ,आज मै अपने पापा के बाते  लिखूंगी, मै अपने पापा को बापू के सम्बोधन से पुकारती थी,जहाँ सब डैड कहते मै उन्हें बापू कहती…

Read More

नहीं जाती

नहीं जाती ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती चलो पैदल वहाँ लारी नहीं जाती चली जाती है हँसने और हँसाने से दवा खाने से बीमारी नहीं जाती ज़ियादा सोचने से नींद जाती है मगर इससे परेशानी नहीं जाती मुआफ़ी माँ ने दे दी ख़्वाब में आकर मगर सर से पशेमानी नहीं जाती उसे जाने…

Read More

तस्वीर भीड़तंत्र की

तस्वीर भीड़तंत्र की कुछ संसद में, कुछ सड़क पर चिल्ला रहे हैं छुप भीड़ में, हमें मारने की योजना बना रहे हैं ! चाल सियासी हो या फिर बात हो धार्मिक उन्माद की ताक पर रख मानवता, शिकार हमें बस बना रहे हैं ! योजना वद्ध तरीके से शिकार हमारे करते हैं कौन जिन्दा, कौन…

Read More

मेरी कहानी

मेरी कहानी शाम का धुंधलका और एक सोलह साल की लड़की अपनी किताबों की दुनिया में खोई अपने को रानी झाँसी समझ रही थी तभी उसके कानों में पिता के शब्द पड़े जो माँ से कह रहे थे की ऐसा रिश्ता जल्दी नहीं मिलेगा ।माँ का जवाब था अरे अभी वो छोटी हैं और फिर…

Read More

स्वतः एक बदलाव

स्वतः एक बदलाव आज पूरा विश्व कोरोना की महामारी से त्रस्त है। दुनियाभर को पीड़ित करने वाला कोरोना वायरस प्रकृति से ‘जूनेटिक’ है। इसका मतलब यह है कि यह जानवर से मनुष्यों में फैलता है लेकिन कोविड 19 जैसे कुछ कोरोना वायरस मनुष्यों से मनुष्यों में फैलते हैं। कोरोना एक खास प्रकार का वायरस है…

Read More