साक्ष्य में राम
साक्ष्य में राम राम तुम्हारा चरित ही स्वयं काव्य है कोई कवि बन जाए सहज सम्भाव्य है राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त की ये पंक्तियाँ राम के चरित्र का अन्यतम रूप प्रदर्शित करती हैं। राम का चरित्र एक आदर्श पुंज है और उस चरित्र को जिसने भी गुना है वह यश के चरम पर पहुँचा…