साक्ष्य में राम

साक्ष्य में राम राम तुम्हारा चरित ही स्वयं काव्य है कोई कवि बन जाए सहज सम्भाव्य है राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त की ये पंक्तियाँ राम के चरित्र का अन्यतम रूप प्रदर्शित करती हैं। राम का चरित्र एक आदर्श पुंज है और उस चरित्र को जिसने भी गुना है वह यश के चरम पर पहुँचा…

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हिन्दी और हम

हिन्दी और हम आज हिंदी दिवस है, इस दिन भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी गयी हिंदी भाषा को भारतीय गणराज्य की राजभाषा घोषित किया था। हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए तत्कालीन भारतीय सरकार ने प्रतिवर्ष १४ सितम्बर,१९४९ को हिंदी दिवस के रूप में मनाने का अनुरोध किया था। वर्ष…

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बेबाकी और उन्मुक्तता का सशक्त स्वर : ममता कालिया

बेबाकी और उन्मुक्तता का सशक्त स्वर : ममता कालिया कुछ कहानियां श्रृंखलाबद्ध रूप में एक जगह एकत्रित मिली और जब पढ़ना शुरू किया तो पढ़ती ही चली गई । थोड़ा सा प्रगतिशील, अपत्नी, निर्मोही ,परदेशी, पीठ, बड़े दिन की पूर्व सांझ, बीमारी , कामयाब,बोलने वाली औरत ,मेला, आपकी छोटी लड़की इत्यादि-गजब का आकर्षण था कहानियों…

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राममंदिर :भव्य मंदिर निर्माण

राममंदिर :भव्य मंदिर निर्माण अयोध्या, जिसे कभी पृथ्वी की अमरावती और पवित्र सप्तपुरी कहा जाता था, वेदों और पुराणों सहित विभिन्न ग्रंथों ने इसकी प्रशंसा की है। किंवदंती है कि अयोध्या में भगवान श्री राम की जन्मभूमि का निर्माण स्वयं देवताओं ने किया था और महाराजा मनु ने इस पवित्र शहर में पृथ्वी पर मनुष्यों…

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माँ तुम कितना झूठ बोलती हो

माँ तुम कितना झूठ बोलती हो माँ तुम कितना झूठ बोलती हो , हाँ माँ तुम कितना झूठ बोलती हो बुखार में तपती भी होती हो , पर फिर भी काम करती रहती हो कहाँ है बुखार कहके हमसे , माँ तुम कितना झूठ बोलती हो परदे बंद करके रोशनी ढक के , हमें आराम…

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माँ शारदे की रहे कृपा

माँ शारदे की रहे कृपा पीले पत्तों से झरे गम सारे खिली खुशियां बन नव कलियां आया लेकर नव हर्ष नव उत्साह बसन्त ये खिली पीली सरसों चमकी सूरज की लालिमा खिली कोपलें कोमल कोमल नई पत्तियों से हुआ श्रृंगार पेड़ों का बसंत आया बन खुशियों भरे नव जीवन का दूत माँ शारदे की रहे…

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सिनेमा में होली उत्सवप्रियता का प्रतीक

सिनेमा में होली उत्सवप्रियता का प्रतीक कालिदास के अनुसार मनुष्य मात्र उत्सवप्रिय होता है। उन्होंने शताब्दियों पूर्व कहा था, ‘उत्सवप्रिया: हि मानवा:’। अधिकाँश उत्सव कृषि से जुड़े हैं। जब फ़सल लहलहा रही होती है, फ़सल कट कर आती है तो किसान अपनी मेहनत का फ़ल देख कर झूम उठता है, खुशी से नाचने-गाने लगता है।…

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‘ईदगाह’ मेरी पसंद

‘ईदगाह’ मेरी पसंद ‘ईदगाह’ हिन्दुस्तान के महान कहानीकार मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी है। यह मुझे इसलिए बहुत अच्छी लगती है क्योंकि इस कहानी का मुख्य किरदार एक छोटा सा बच्चा है हामिद । यह अपनी दादी के पास रहता है क्योंकि उसके मां-बाप दोनों की मौत हो चुकी है। बचपन के सामान्य सपने व…

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कथनी और करनी

कथनी और करनी अलार्म घड़ी ने जैसे ही सुबह पांच बजे का अलार्म बजाया,परेश ने आधी नींद में ही घड़ी टटोल कर उसका अलार्म बंद किया।उठ जाऊं- न उठूं , इसी उधेड़बुन में पांच- सात मिनट जाया करके आखिर उठने का फैसला किया। रोज की भांति नित्य कर्म, स्नानादि से निवृत्त होकर पूजा के कमरे…

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