देसी गर्ल्स

देसी गर्ल्स महिलाओं के लिए खुद को खुलकर व्यक्त करना कभी आसान नहीं रहा, लेकिन लेखन एक ऐसा तरीका है जिसके द्वारा वे यह कर सकती हैं। जेन ऑस्टेन के बहुचर्चित उपन्यासों के माध्यम से हम उनके जीवन और समाज को देख सकते हैं। फिर भी, जेन ऑस्टिन के लिए एक पुरुष की दुनिया में…

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CHRISTMAS EVE

CHRISTMAS EVE This cold winter day offers A gift – shooting and twinkling like the first star. Joy –childish but so justified on that day, Hope – as green as a mistletoe, Faith which can move mountains, But often so tiny and fragile. And Love-always the biggest, Although you can find it in a crib….

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वजन कम करें

वजन कम करें यदि आप वजन कम कराना चाहते हैं और वह भी बिना किसी डायटिंग के, तो भी यह सम्भव है क्योंकि कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो आप के वजन कम करने में सहायक हो सकते हैं।जैसे- ब्राउन राइस सफेद चावल खाने से वजन बढ़ता है परंतु क्या आपको पता है यदि आप…

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सीता

सीता सीता थी स्वभिमानी। अभिमानी नही। रक्षा की,अपने स्वभिमान की। राम ने सीता को त्यागा। सीता ने अयोध्या त्याग दी। वन की शरण ली। जंगल को ही मंगल किया। राम की व्याहता सीता। राजा राम की बेकसूर रानी। भोली-भाली सब से अनजान। गर्भवती बेचारी। राम की मनसा को जान, कितना दुख हुआ होगा? कितनी आहत…

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ममता कालिया-समकालीन हिंदी साहित्य जगत का जगमगाता सितारा

ममता कालिया-समकालीन हिंदी साहित्य जगत का जगमगाता सितारा ममता कालिया समकालीन हिंदी साहित्य जगत की प्रखर हस्ताक्षर हैं। उनका गद्य की हर विधा में एक सार्थक हस्तक्षेप है। भावों के महीन धागों से बुनी उनकी कविताओं में आम जीवन से जुड़े वे सभी ख़ास पहलू हैं जो पाठकों को स्वतः ही अपना बना लेते हैं…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-विश्वनाथ प्रताप सिंह

विश्वनाथ प्रताप सिंह विश्वनाथ प्रताप सिंह जी का जन्म इलाहाबाद के जमींदार परिवार में 25 जून 1931 को हुआ था। आपके असली पिता का नाम राजा भगवती प्रसाद सिंह था। मांडा के राजा बहादुर राय गोपाल सिंह निःसंतान होने के कारण उन्होंने 1936 में 5 वर्ष की आयु में आपको गोद ले लिया था। 1941…

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हिंदी दिवस के जन्मदाता

हिंदी दिवस के जन्मदाता गत वर्ष गृहस्वामिनी में मेरा एक संस्मरण प्रकाशित हुआ स्वर्गीय व्यौहार राजेंद्र सिंह से जुड़े , उनके साथ कुछ पल रेलवे प्लेटफॉर्म पर एक छोटी सी मुलाकात के रूप में । आज उनके ही पौत्र डॉ व्यौहार अनुपम सिन्हा , जो मेरी छोटी बुआ का मंझला बेटा काका जी( श्री राजेंद्र…

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मैं नारी हूँ

मैं नारी हूँ मैं नारी हूँ, हाँ मैं नारी हूँ ईश्वर की आभारी हूँ । स्वेच्छा से मैं कभी भी कहीं भी आ जा सकती हूँ पर ससुराल प्राथमिकता है मेरी अत: कभी कभी जरूरत के वक्त मैं मैके को भी हारी हूँ …. हाँ मैं नारी हूँ । छोटे से रसोई घर की मैं…

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समय

समय आदिकाल से भविष्य का चक्र। हर होने से, न होने का नियम, जो है उसके ख़त्म होने का संयम । अदि, अंत, अनंत। देव, मानव,पाताल लोक का विभाजन, सागर मंथन भेद से सर्व लोक समीकरण ।। युग निर्माण, समाज परिवर्तन । सत्य,त्रेता, द्वापर से कलि का बदलाव, रामराज्य में सीताहरण, कलि में सती का…

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