नारी अधिकारियों का मजबूत कंधा-एलिस पाॅल

नारी अधिकारियों का मजबूत कंधा-एलिस पाॅल एलिस स्ट्रोक्स पाॅल का जन्म 11 जनवरी 1885 को न्यूजर्सी के माऊंट लार्रेल टाउन में हुआ। इनके पिता विलियम मिल पाॅल एक सफल व्यवसाई थे तथा विंथ्रोब परिवार के वंशज थे।इनकी मांँ टेसी पेरी पॉल सोसाइटी ऑफ फ्रेंड्स के आंदोलन में सक्रिय सदस्य थीं। एलिस दो बहन एवं दो…

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शहादत के खुले -अधखुले पन्ने

शहादत के खुले -अधखुले पन्ने विद्रोह ,गदर, क्रांति-इन शब्दों के अर्थ कभी भी बहुत स्पष्ट नहीं रहे। जुल्म के खिलाफ समय-समय पर फूटे जन असंतोष को यदि शासकों , शासितों ने अलग- अलग नाम दिए तो इसका कारण स्पष्ट है-दोनों की मंशा अलग होती है, उद्देश्य अलग। जिस विद्रोह को विप्लव, गदर, राजद्रोह कहकर जुल्मी…

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Expectation

Expectation Empty chair by the Christmas table. Thousands of glittering flames Dance on colorful ornaments. The whole world trembles, it slowly rocks. Green spruce smells like the woods. Like Ariadne, I weave Angel hair into memories and silence. I return to happy hours, To events that are now but dreams. I listen to every murmur,…

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सुन लें

सुन लें आज ‘ऑटिज्म डे ‘है।यह भयंकर बीमारी है।सजग नहीं होने पर विकराल रूप ले लेता है।यह मानसिक रोग है।इससे ग्रसित बच्चे का मानसिक विकार के कारण विकास रूक जाता है। सामान्य बच्चों की अपेक्षा इन बच्चों का विकास बहुत धीमे गति से होता है। ऑटिज्म के बहुत कारण होते हैं।गर्भ काल में माँ की…

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गणतंत्रता दिवस

गणतंत्रता दिवस सोनू रोज़ ही सिग्नल पर कभी गुब्बारे, कभी पैन ,कभी मूँगफली बेचता दिख जाया करता था और मैं उससे बिना ज़रूरत के भी चीज़ें खरीद लिया करती । सोनू की उम्र लगभग दस साल होगी। एक अनकहा सा खिंचाव महसूस होने लगा था मुझे उसके प्रति। पर आज वह कहीं नहीं दिखा। हरी…

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दूध के दाम

दूध के दाम प्रेमचंद साहित्य की समीक्षा करना थोड़ी जुर्रत की बात है! कहानी विधा के दूसरे उन्मेष काल के चमकते सितारे प्रेमचंद थे।कोई सोच भी नहीं सकता था कि किसी की लेखनी से कहानियों की ऐसी गंगा प्रवाहित होगी जिसमें भारतीय ग्रामीण समाज केंद्र में होगा और बरसों ये कहानियाँ समय की धारा में…

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कोरोना दारुण व्याधि रचायो

कोरोना दारुण व्याधि रचायो कोरोना दारुण व्याधि रचायो, चीन देश वाहि पैदा कीन्हों, सब जग माहि पठायो, जर्मन, इटली, फ़्रांस, रूस, सारे जग को भरमायो, इंगलैंड और अमेरिका सोचें, सधै ना कोनु उपायो, जग पूछे बेशर्म चीन से, क्यों चमगादड़ खायो, हालैंड, पाकिस्तान, कनाडा, सब को सोच थकायो, भारत के तत्पर प्रयास लख सब जग…

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श्रद्धांजलि

महान लोक-शिक्षक ……स्वामी विवेकानंद !! नव भारत का उदय होने दो। उसका उदय हल चलानेवाले किसानों की कुटिया से, मछुए, मोचियों और मेहतरों की झोपड़ियों से हो, बनिये की दुकान से, रोटी बेचने वाले की भट्ठी के पास से प्रकट हो। कारखानों, हाटों और बाजारों से वह निकले। वह नव भारत अमराइयों और जंगलों से,…

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