गीता जयंती

गीता जयंती गीता जयंती के शुभ अवसर पर आयोजित भगवत् गीता के श्लोकों का चिंतन-मनन यह एक सार्थक पहल है, यह उपक्रम सतत चलता रहे तो सभी को बौद्धिक और आध्यात्मिक लाभ होगा । आज मैं “अवतारवाद” पर अपनी अल्प बुद्धि से कुछ विचार व्यक्त कर करना चाहती हूं । अवतार का अर्थ स्वयं परमात्मा…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- राजा राम मोहन राय

नवजागरण युग के पितामह- राजा राम मोहन राय राजा राम मोहन राय 18 वी सदी के महापुरुष,आधुनिक समाज के जन्मदाता,ब्रह्म समाज के संस्थापक,देश को जगाने वाले स्वतंत्रता सेनानी,बहुआयामी समाज सेवी, भारत भाषायी प्रेस प्रवर्तक तथा बंगाल के नवजागरण युग के पितामह। स्वर्गीय राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 को राधा नगर जिला मुर्शिदाबाद,…

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EVER TROUBLING COVID SYNDROME : ARE WE SUFFICIENTLY SENSITIZED ?

EVER TROUBLING COVID SYNDROME : ARE WE SUFFICIENTLY SENSITIZED ? Even when hardly 500 confirmed Covid cases were registered, we declared a LockDown(L.D)on 23rd March’20.The second one was clamped on 4th April,2021. Modus Operandi of the two differed. Idea has been common: Preacutionary Measures.Health Minister gave comprehensive justifications to Parliament. The second L.D. became necessary…

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यंगर्स लव

यंगर्स लव   वो मुझे बहुत ही आकर्षक व्यक्तित्व की प्रतिमूर्ति लग रही थी।मुझे उसमे खो जाना, डूबना, डूबकर तैरते हुए किनारे आ जाना अच्छा लग रहा था।मैंउसके चेहरे को देख रहा था, वो अपने नैना बन्द किये मेरी गोद में सिर रख अलौकिक जगत की सैर कर रही थी।उसका चेहरा मुझे मुल्तानी मिट्टी से…

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बाजीगर

बाजीगर बैठी हूं आसमान तले सामने लहरों का बाजार है , उन्मादीत लहरों के दिखते अच्छे नहीं आसार हैं । अब उफनाती लहरों से कह दो राह मेरी छोड़ दे, बैठी हूं चट्टान बनकर रुख अपना मोड़ ले । ज्वार भाटा से निकली प्रचंड अग्नि का सैलाब हूं, हैवानियत को जलाकर खाक करने वाली आग…

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अच्छा लगता है

अच्छा लगता है सुनो न , बहुत दिन से कुछ कहना है तुमसे! पर उस बात का ज़ायका मुँह में घुलता है कुछ इस तरह, वो बात कह ही नहीं पाती । सुनो तो….. तुम अच्छे लगते हो अब ये मत पूछना क्यों : इन फैक्ट मेरी बात पूरी होने दो पहले फिर कुछ भी…

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स्त्रीयोचित गुण ही सशक्तिकरण

स्त्रीयोचित गुण ही सशक्तिकरण अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष की तरह 8 मार्च को आ गया | पिछले दिनों भारतीय महिलाओं ने शारीरिक मानसिक ,राजनैतिक आर्थिक सभी दंश झेले हैं | यौन उत्पीड़न का मानसिक त्रास , बलात्कार और घरेलु हिंसा के शारीरिक घाव ,महंगाई की आर्थिक मार , शाहीन बाग़ और दंगों के राजनीतिक…

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“पसरते शहर ……….….. सिकुड़ते लोग” !!

  “पसरते शहर ……….….. सिकुड़ते लोग” !! सुविधाएं जब सनक और रुतबे का रुप ले लेती है, तो दबे पांव जिंदगी में घुन लगना शुरू हो जाता है। कभी शहर का मतलब सुख-सुविधाओं और बेहतर जीवन रहा होगा, पर आज शहरों की हालत देखते हुए ऐसा बिल्कुल नहीं नजर आता। अब हर कोई शहरों की…

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बदलता होली का स्वरूप

बदलता होली का स्वरूप बिहार में जली थी होलिका………..राख से खेली जाती है होली !! जिंदगी जब सारी खुशियों को स्‍वयं में समेटकर प्रस्‍तुति का बहाना माँगती है तब प्रकृति मनुष्‍य को होली जैसा त्‍योहार देती है। होली हमारे देश का एक विशिष्‍ट सांस्‍कृतिक एवं आध्‍यात्‍मिक त्‍योहार है। अध्‍यात्‍म का अर्थ है मनुष्‍य का ईश्‍वर…

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