भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-सरोजिनी नायडू

विरासत: श्रीमती सरोजिनी नायडू भारतवर्ष के अमृतमहोत्सव पर यह कहना कदाचित अतिशयोक्ति नहीं होगा कि हर वर्तमान की नींव इतिहास में ही रखी जाती है, विशेषकर कला, संस्कृति, विज्ञान की। कृषि के क्षेत्र से लेकर औद्योगिकीकरण, तकनीकीकरण से डिजिटाइजेशन, मानवाधिकार के क्षेत्र में स्त्री पुरुष को सामाजिक, मानसिक एवं व्यवसायिक क्षेत्र में समान अधिकार का…

Read More

जिंदगी एक एवरेस्ट है

  जिंदगी एक एवरेस्ट है एवरेस्ट के शिखर पर फतह पाने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल ,सही महिलाओं के लिए एक आदर्श व प्रेरणास्रोत हैं। उनके अचीवमेंट के पीछे उनका निरंतर संघर्ष, प्रयास, मेहनत, लगन और चुनौतियों का सामना पूरे आत्मविश्वास और साहस के करने की प्रकृति के कारण ही संभव हो पाया है…

Read More

मैं बोल रही हूँ

मैं बोल रही हूँ शाम के तीन बज चुके थे। सेमिनार खत्‍म होने में एक घंटा और था। स्‍मृति सामने बैठकर सुन रही थी। कमरे में अच्‍छी खासी भीड़ थी। ज्‍यादातर अभी अभी कॉलेज से निकले युवा थे। इस सेमिनार में डॉ.. त्‍यागी, मधुसूदन गुलाटी भाई अग्रवाल और न जाने कितने नामी गिरामी लोग थे।…

Read More

संस्मरण प्रेमचंद जी के परिवार का

संस्मरण प्रेमचंद जी के परिवार का बचपन में पांचवीं, छटी से ही पुस्तकों में दिनकर, महादेवी वर्मा,मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जिनके नाम का तिराहा आज भी है, डॉ राम कुमार वर्मा, हरिवंश राय बच्चन जी जो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के “अंग्रेज़ी डिपार्टमेंट , फ़िराक़ गोरखपुरी जी भी अंग्रेज़ी डिपार्टमेंट के हेड रहे पर दोनों…

Read More

प्रेमचंद जयंती

कलम के सिपाही हिंदी साहित्य के सम्राट, प्रगतिशील विचारों के पुरोधा,युगद्रष्टा और कलम के सच्चे सिपाही मुंशी प्रेमचंद जी को शत शत नमन।बेहद ही साधारण देखने वाले प्रेमचंद का व्यक्तित्व अत्यन्त अद्वितीय था।गृहस्वामिनी उनके 139वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करती है ।   साहित्य-गगन का चाँद साहित्य-गगन का चाँद विहंसता है अम्बर में, और धरा…

Read More

प्रेम-रुमानियत से रुहानियत

प्रेम- रुमानियत से रुहानियत प्रेम ने अपनी जादुई किरणों से मेरी आँखें खोलीं और अपनी जोशीली उँगलियों से मेरी रूह को छुआ तब….जब उठ गया था प्रेम या प्रेम जैसे किसी शब्द पर से मेरा विश्वास प्रेम ने दुबारा मेरी ज़िन्दगी के अनसुलझे रहस्यों को खोलने का सिलसिला शुरू किया फिर से उन अनोखे पलों…

Read More

माँ

माँ माँ सहनशक्ति की अनुपम मिसाल है, उसका हर रूप बच्चों हेतु बेमिसाल है। वह सृजनकर्ता है,नित प्राण रक्षक है, बच्चों पर आँच आ जाये तो बनती भक्षक है। वह अन्नपूर्णा है घर की संचालिका है, वह जो न हो घर मे तो घर का नही कोई मालिक है। वह हिम्मत है,वह ताकत है, वह…

Read More

अमिट छाप

अमिट छाप हिंदी के महान कहानीकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म काशी के समीप लमही नमक गांव में ३१ जुलाई १८८० को हुआ था।प्रेमचंद जी का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।८ वर्ष की उम्र में इनकी माता एवम् १६ वर्ष की उम्र में इनके पिताजी का देहांत होने से घर का…

Read More

प्राण का संबंध

प्राण का संबंध “सुनो तुम्हारी माँ का क्या नाम है?” स्कूल के प्रांगण में एक छात्रा को रोकते हुए प्रीति ने पूछा। लड़की हतप्रभ होकर प्रीति को देखने लगी। प्रीति मुस्कुराई। लड़की से कहा- “मैं समझ रही हूँ तुम्हारे दिल की बात। लोग अमूमन पिता का नाम पूछते हैं और मैंने तुमसे तुम्हारी माँ का…

Read More