यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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निर्मला

निर्मला आदरणीय प्रेमचंद जी एक महान साहित्यकार थे। उनकी सभी रचनाएं बहुत अच्छी हैं परंतु उन सब में मुझे उनका ‘निर्मला’ उपन्यास सबसे अधिक पसंद है। ‘निर्मला’ बेमेल विवाह और दहेज प्रथा की दुखान्त कहानी है। उपन्यास का लक्ष्य अनमेल-विवाह तथा दहेज़ प्रथा के बुरे प्रभाव को अंकित करता है। निर्मला का विवाह एक अधेड़…

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मेरी माँ 

मेरी माँ आज अचानक जब कहा मेरी माँ ने मुझसे लिखो ना मेरे ऊपर भी कोई कविता और फिर ध्यान से देखा मैंने माँ को आज कई दिनों बाद । अरे ! चौंक सी गयी मैं माँ कब बूढ़ी हो गयी ? सौंदर्य से दमकता उनका वो चेहरा जाने कब ढँक गया झुर्रियों से माँ…

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सबके राम, सबमें राम

सबके राम, सबमें राम तुलसी के रामराज्य की कल्पना आज के युग में भी सामाजिक चेतना का आदर्श है। उन्होंने समाज को राक्षसों से बचाने के लिए वानरी वृत्ति तक के लोगों के भीतर की सोई शक्ति को जगाया। भारतीय जो अपना गौरवमय अतीत नही भूल पाए थे और नए शासकों (मुगलों) के ढर्रे, तौर-तरीकों…

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पिता

पिता जो पीता है बच्चों के लिए दुख और तकलीफ़ जो आकंठ डूबा होता है स्नेह से, मगर मौन शांत रहकर सींचता है अपने वृक्ष – बेलों को… पिता जो पी लेता है हर विषम परिस्थितियों के विष को मात्र अपनी संतान को अमृत की जीवनदायिनी घूंट देने के लिए… पिता खुद लड़खड़ाता तो है…

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अबला से आत्मनिर्भरता की राह

अबला से आत्मनिर्भरता की राह ये कहानी है शशिकला जी की जो हर लड़की की तरह एक खुशहाल और जिम्मेदार लड़की थी। छोटे छोटे सपनों ने आँखों में जगह बनानी शुरू ही की थी कि १७ वर्ष के उम्र में विवाह के बंधन में बांध दिया गया। अपनी सारी जिम्मेदारिओं को भली भांति निभाते हुए…

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वे सड़कें बना रहे हैं..

वे सड़कें बना रहे हैं.. गर्म तपती भट्ठियों सी , तप्त सड़कों पर कोलतार की धार गिराते , मजदूरों के झुलस रहे हैं पाँव. पर तपती धरती पर, गिट्टियां बिछाते, मानो स्नेह का लेप लगा रहे हैं, वे सड़कें बना रहे हैं. गर्म जलाते टायरों का , फैलता है धुंआ ,आग उगलता, जला रहा है…

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गुरुपूर्णिमा पर विशेष

गुरुपूर्णिमा पर विशेष अपने राष्ट्र और सामाजिक जीवन में गुरुपूर्णिमा-आषाढ़ पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है। व्यास महर्षि आदिगुरु हैं। उन्होंने मानव जीवन को गुणों पर निर्धारित करते हुए उन महान आदर्शों को व्यवस्थित रूप में समाज के सामने रखा। हनुमान चालीसा हम सब को कंठस्थ है, प्रथम दोहे में ही कहा गया है “श्री गुरुचरण…

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