बेटी
बेटी बेटे बेटी के मसलों को,कब तक उलझाओगे प्यारे रिश्तों को कब तक भरमाओगे। अनमोल हैं माता पिता के दोनों समाज,कब तक भ्रम फैलाओगे। श्री रूप धर आई बेटियाँ सरस्वती बन पधारी बेटियाँ अपनी उपस्थिति से घर को महकाती हैं जानकी की अवतार हैं बेटियाँ। संस्कृतियों का संगम हैं ये संस्कारों की धरोहर हैं ये…